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ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से पनप रहीं संक्रामक बीमारियां
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पिंजरा वमनपुरी में स्कूल के पास टूटी सड़क।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। मौसम बदलने के साथ डेंगू और मलेरिया, टायफाइड और वायरल बुखार फैलता जा रहा है। बुखार और डेंगू से दो बच्चों की मौत हो चुकी है। पांच अन्य लोगों में डेंगू और मलेरिया की पुष्टि हुई है। मलेरिया और डेंगू का प्रकोप ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है। इसकी वजह गांवों में फैली गंदगी बताई जा रही है। गड्ढों और नालियों में पानी जमा रहने से डेंगू और मलेरिया बुखार पनप रहा है।
बारिश के बाद तेज धूप निकलने और उमस होने से वायरल बुखार का प्रकोप और बढ़ गया है। साथ ही अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। डेंगू और मलेरिया के केस ग्रामीण क्षेत्र में मिले रहे हैं। हालांकि अभी शहर में डेंगू होने की पुष्टि नहीं हुई है। संक्रामक बीमारियां बढ़ने से अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। न्यूरिया के सैदपुर गांव में सात साल की मासूम आरोही और रानी कॉलोनी के रहने वाले तीन साल के बालक की मौत हो चुकी है।
सप्ताह भर पहले मलेरिया की टीम ने करीब सात गांवों का सर्वे किया था। जहां टीम को करीब 12 स्थानों पर डेंगू का लार्वा मिला था। संक्रामक बीमारियां फैलने के कारण ग्रामीण इलाकों में फैली गंदगी और लोगों में जागरूकता की कमी है। सहायक मलेरिया अधिकारी राजीव मौर्या ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में अधिकांश मकानों में पानी का निकास नहीं है। अधिकांश ग्रामीणों ने घरों के बाहर कच्चे गड्ढे बना रखे हैं। जहां पानी इकट्ठा रहता है। इस कारण उनमें मलेरिया, डेंगू और टायफाइड का मच्छर पनपने लगता है।
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जानकारों के मुताबिक खास बात यह है कि डेंगू का मच्छर जमा हुए साफ पानी में ही पनपता है, जो बेहद खतरनाक होता है। जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता है। मलेरिया की टीम इस वक्त ग्रामीणों को जागरूक करने में जुटी हुई है।
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बारिश के बाद तेज धूप निकलने और उमस होने से वायरल बुखार का प्रकोप और बढ़ गया है। साथ ही अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। डेंगू और मलेरिया के केस ग्रामीण क्षेत्र में मिले रहे हैं। हालांकि अभी शहर में डेंगू होने की पुष्टि नहीं हुई है। संक्रामक बीमारियां बढ़ने से अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। न्यूरिया के सैदपुर गांव में सात साल की मासूम आरोही और रानी कॉलोनी के रहने वाले तीन साल के बालक की मौत हो चुकी है।
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सप्ताह भर पहले मलेरिया की टीम ने करीब सात गांवों का सर्वे किया था। जहां टीम को करीब 12 स्थानों पर डेंगू का लार्वा मिला था। संक्रामक बीमारियां फैलने के कारण ग्रामीण इलाकों में फैली गंदगी और लोगों में जागरूकता की कमी है। सहायक मलेरिया अधिकारी राजीव मौर्या ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में अधिकांश मकानों में पानी का निकास नहीं है। अधिकांश ग्रामीणों ने घरों के बाहर कच्चे गड्ढे बना रखे हैं। जहां पानी इकट्ठा रहता है। इस कारण उनमें मलेरिया, डेंगू और टायफाइड का मच्छर पनपने लगता है।
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जानकारों के मुताबिक खास बात यह है कि डेंगू का मच्छर जमा हुए साफ पानी में ही पनपता है, जो बेहद खतरनाक होता है। जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता है। मलेरिया की टीम इस वक्त ग्रामीणों को जागरूक करने में जुटी हुई है।