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Pilibhit News: रामलीला में कलाकार निभा रहे पूर्वजों की विरासत
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दिनेश रस्तोगी।
- फोटो : 1
लीला का मंचन देखने के लिए दूर-दराज से पहुंचते हैं लोग, दुकानें भी बढ़ाती है शोभा
बीसलपुर। कस्बे के ऐतिहासिक रामलीला मेले में अधिकांश कलाकार ऐसे हैं, जो विरासत में पूर्वजों से मिली जिम्मेदारी को ईमानदारी व श्रद्धा से निभा रहे हैं। यदि क्षेत्र में खेली जाने वाली रामलीलाओं का इतिहास देखा जाए तो बीसलपुर रामलीला की एक अलग ही मिसाल होगी। संवाद
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निभा रहे रावण की भूमिका, अब पुत्र को दे रहे प्रशिक्षण
मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी 64 वर्षीय दिनेश रस्तोगी ने बताया कि वह छह वर्ष की उम्र से मेले में पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रारंभ में सैनिक, नारंतक, काल नेमी और अक्षय कुमार की भूमिका निभाई। वर्ष 1987 तक मेले में उनके पिता गंगा विष्णु उर्फ कल्लू मल ने रावण की भूमिका निभाई थी। वर्ष 1987 में उनके पिता का निधन हो गया था। उसके बाद से वह रावण की भूमिका निभाने लगे थे और अभी भी निभा रहे हैं। अब उन्होंने इस वर्ष अपने पुत्र शुभम को भी रावण की भूमिका निभाने का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है।
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11 वर्ष की उम्र से हो रहे शामिल, पिता को बताते हैं प्रेरणास्रोत
मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी 62 वर्षीय मनोज त्रिपाठी ने बताया कि वह 11 वर्ष की उम्र से मेले में पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता और मेकअप प्रभारी आदि पात्रों की भूमिका निभाई है। अब वह वर्ष 1991 से लीला संचालक की भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें मेले में पात्रों की भूमिका निभाने की प्रेरणा अपने पिता रमेश चंद्र त्रिपाठी से मिली थी। उनके पिता भी मेले में परशुराम की भूमिका निभाते थे। उनके दादा रतिराम त्रिपाठी भी मेले में पात्रों की भूमिका निभाते थे। अब वे इस दुनिया में नहीं है।
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11 वर्षों से राम दलों के पात्रों का कर रहे चयन
मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी 58 वर्षीय लखन लाल मिश्रा ने बताया कि वह 12 वर्ष की उम्र से मेले में पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अंगद और परशुराम की भूमिका निभाई है। अब वह पिछले 11 वर्षों से राम दल के पात्रों का चयन करते हैं और उन्हें उनकी भूमिका का रिहर्सल कराते हैं। उन्हें मेले में पात्रों की भूमिका निभाने की प्रेरणा अपने पिता श्री कृष्ण त्रिपाठी से मिली थी। उनके पिता मेले में विश्वामित्र की भूमिका निभाते थे। अब वह इस संसार में नहीं है।
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मेले में 12 वर्षों से निभा रहे हैं पात्रों की भूमिका
मोहल्ला दुबे निवासी अमित कुमार तिवारी ने बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से मेले में विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने पांच वर्षों तक नल की भूमिका निभाई थी और पिछले सात वर्षों से अंगद की भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें मेले में पात्रों की भूमिका निभाने की प्रेरणा अपने नाना श्री कृष्ण मिश्रा से मिली थी। उनके नाना मेले में विश्वामित्र की भूमिका निभाते थे। अब वह परलोक सिधार गए हैं।
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इन पात्रों को भी मिली है विरासत में भूमिका
मोहल्ला दुबे निवासी रिंकू दुबे पिछले 12 वर्षों से मेघनाथ की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले यह भूमिका उनके पिता रामचंद्र दुबे निभाते थे। अब उनका स्वर्गवास हो चुका है। मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी आशीष तिवारी 17 वर्षों से हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले उनके पिता रामकुमार हनुमान की भूमिका निभाते थे। आशीष के भाई मनोज 32 वर्षों से विभीषण की भूमिका निभा रहे हैं। इन दोनों भाइयों को यह कार्य अपने पिता से विरासत के रूप में मिला है। मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी अधिवक्ता राजन रस्तोगी पिछले दो दशकों से अक्षय कुमार की भूमिका निभा रहे है। उनके भाई राजगोपाल डेढ़ दशकों से नल की भूमिका निभा रहे हैं। इन दोनों भाइयों को यह कार्य अपने ताऊ गंगा विष्णु से विरासत में मिला है।
सुग्रीव की भूमिका निभाने वाले मोहल्ला दुबे निवासी विमल त्रिपाठी वर्ष 1987 से विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें इस कार्य की प्रेरणा और विरासत अपने पिता लक्ष्मी नारायण और ताऊ काशीनाथ से मिली थी। 37 वर्षों से अहिरावण की भूमिका निभाने वाले राजकीय बेसिक शिक्षक मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी सीताराम रस्तोगी को भूमिका निभाने की प्रेरणा और विरासत अपने ताऊ राम गुलाम से मिली थी। राम गुलाम भी अहिरावण बनते थे। 16 वर्षों से कुंभकरण बन रहे। सर्वेश के पिता बनवारी लाल भी यही भूमिका निभाते थे। 18 वर्षों से खरदूषण बन रहे संजय रस्तोगी के बड़े भाई सुनील रस्तोगी भी पहले यही भूमिका निभाते थे। 12 वर्षों से नारंतक बन रहे सुनील रस्तोगी के बड़े भाई विनोद कुमार भी यही भूमिका निभाते थे।
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मेले में 32 फुट ऊंचा बनता है रावण का पुतला
मेले में पुतला बनाने वाले कारीगर मोहल्ला दुबे निवासी छोटेलाल ने बताया कि मेले में प्रत्येक वर्ष रावण का पुतला 32 फुट ऊंचा और मेघनाथ का पुतला 30 फुट ऊंचा बनता है। दोनों पुतले उसी दिन बनाए जाते हैं। जिस दिन लीला होती है। पुतला दहन के साथ आतिशबाजी भी होती है।
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रावण वध लीला वाले दिन होती है आतिशबाजी प्रतियोगिता
रावण वध लीला वाले दिन आतिशबाजी प्रतियोगिता होती है। यह प्रतियोगिता काफी देर तक चलती है। विजयी प्रतियोगी को मेला कमेटी की ओर से पुरस्कार दिया जाता है।
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पात्र नहीं लेते कोई पारिश्रमिक
रामलीला मेले में पात्र पूरी निष्ठा से अपनी अपनी भूमिका निभाते हैं। इसके बदले में पात्र कोई भी पारिश्रमिक नहीं लेते हैं। अधिकांश पात्र विरासत में मिली भूमिकाओं का निर्वहन कर रहे हैं।
- गंगाधर दुबे, अध्यक्ष मेला कमेटी बीसलपुर।
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बीसलपुर। कस्बे के ऐतिहासिक रामलीला मेले में अधिकांश कलाकार ऐसे हैं, जो विरासत में पूर्वजों से मिली जिम्मेदारी को ईमानदारी व श्रद्धा से निभा रहे हैं। यदि क्षेत्र में खेली जाने वाली रामलीलाओं का इतिहास देखा जाए तो बीसलपुर रामलीला की एक अलग ही मिसाल होगी। संवाद
निभा रहे रावण की भूमिका, अब पुत्र को दे रहे प्रशिक्षण
मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी 64 वर्षीय दिनेश रस्तोगी ने बताया कि वह छह वर्ष की उम्र से मेले में पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रारंभ में सैनिक, नारंतक, काल नेमी और अक्षय कुमार की भूमिका निभाई। वर्ष 1987 तक मेले में उनके पिता गंगा विष्णु उर्फ कल्लू मल ने रावण की भूमिका निभाई थी। वर्ष 1987 में उनके पिता का निधन हो गया था। उसके बाद से वह रावण की भूमिका निभाने लगे थे और अभी भी निभा रहे हैं। अब उन्होंने इस वर्ष अपने पुत्र शुभम को भी रावण की भूमिका निभाने का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है।
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11 वर्ष की उम्र से हो रहे शामिल, पिता को बताते हैं प्रेरणास्रोत
मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी 62 वर्षीय मनोज त्रिपाठी ने बताया कि वह 11 वर्ष की उम्र से मेले में पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता और मेकअप प्रभारी आदि पात्रों की भूमिका निभाई है। अब वह वर्ष 1991 से लीला संचालक की भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें मेले में पात्रों की भूमिका निभाने की प्रेरणा अपने पिता रमेश चंद्र त्रिपाठी से मिली थी। उनके पिता भी मेले में परशुराम की भूमिका निभाते थे। उनके दादा रतिराम त्रिपाठी भी मेले में पात्रों की भूमिका निभाते थे। अब वे इस दुनिया में नहीं है।
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11 वर्षों से राम दलों के पात्रों का कर रहे चयन
मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी 58 वर्षीय लखन लाल मिश्रा ने बताया कि वह 12 वर्ष की उम्र से मेले में पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अंगद और परशुराम की भूमिका निभाई है। अब वह पिछले 11 वर्षों से राम दल के पात्रों का चयन करते हैं और उन्हें उनकी भूमिका का रिहर्सल कराते हैं। उन्हें मेले में पात्रों की भूमिका निभाने की प्रेरणा अपने पिता श्री कृष्ण त्रिपाठी से मिली थी। उनके पिता मेले में विश्वामित्र की भूमिका निभाते थे। अब वह इस संसार में नहीं है।
मेले में 12 वर्षों से निभा रहे हैं पात्रों की भूमिका
मोहल्ला दुबे निवासी अमित कुमार तिवारी ने बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से मेले में विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने पांच वर्षों तक नल की भूमिका निभाई थी और पिछले सात वर्षों से अंगद की भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें मेले में पात्रों की भूमिका निभाने की प्रेरणा अपने नाना श्री कृष्ण मिश्रा से मिली थी। उनके नाना मेले में विश्वामित्र की भूमिका निभाते थे। अब वह परलोक सिधार गए हैं।
इन पात्रों को भी मिली है विरासत में भूमिका
मोहल्ला दुबे निवासी रिंकू दुबे पिछले 12 वर्षों से मेघनाथ की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले यह भूमिका उनके पिता रामचंद्र दुबे निभाते थे। अब उनका स्वर्गवास हो चुका है। मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी आशीष तिवारी 17 वर्षों से हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले उनके पिता रामकुमार हनुमान की भूमिका निभाते थे। आशीष के भाई मनोज 32 वर्षों से विभीषण की भूमिका निभा रहे हैं। इन दोनों भाइयों को यह कार्य अपने पिता से विरासत के रूप में मिला है। मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी अधिवक्ता राजन रस्तोगी पिछले दो दशकों से अक्षय कुमार की भूमिका निभा रहे है। उनके भाई राजगोपाल डेढ़ दशकों से नल की भूमिका निभा रहे हैं। इन दोनों भाइयों को यह कार्य अपने ताऊ गंगा विष्णु से विरासत में मिला है।
सुग्रीव की भूमिका निभाने वाले मोहल्ला दुबे निवासी विमल त्रिपाठी वर्ष 1987 से विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें इस कार्य की प्रेरणा और विरासत अपने पिता लक्ष्मी नारायण और ताऊ काशीनाथ से मिली थी। 37 वर्षों से अहिरावण की भूमिका निभाने वाले राजकीय बेसिक शिक्षक मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी सीताराम रस्तोगी को भूमिका निभाने की प्रेरणा और विरासत अपने ताऊ राम गुलाम से मिली थी। राम गुलाम भी अहिरावण बनते थे। 16 वर्षों से कुंभकरण बन रहे। सर्वेश के पिता बनवारी लाल भी यही भूमिका निभाते थे। 18 वर्षों से खरदूषण बन रहे संजय रस्तोगी के बड़े भाई सुनील रस्तोगी भी पहले यही भूमिका निभाते थे। 12 वर्षों से नारंतक बन रहे सुनील रस्तोगी के बड़े भाई विनोद कुमार भी यही भूमिका निभाते थे।
मेले में 32 फुट ऊंचा बनता है रावण का पुतला
मेले में पुतला बनाने वाले कारीगर मोहल्ला दुबे निवासी छोटेलाल ने बताया कि मेले में प्रत्येक वर्ष रावण का पुतला 32 फुट ऊंचा और मेघनाथ का पुतला 30 फुट ऊंचा बनता है। दोनों पुतले उसी दिन बनाए जाते हैं। जिस दिन लीला होती है। पुतला दहन के साथ आतिशबाजी भी होती है।
रावण वध लीला वाले दिन होती है आतिशबाजी प्रतियोगिता
रावण वध लीला वाले दिन आतिशबाजी प्रतियोगिता होती है। यह प्रतियोगिता काफी देर तक चलती है। विजयी प्रतियोगी को मेला कमेटी की ओर से पुरस्कार दिया जाता है।
पात्र नहीं लेते कोई पारिश्रमिक
रामलीला मेले में पात्र पूरी निष्ठा से अपनी अपनी भूमिका निभाते हैं। इसके बदले में पात्र कोई भी पारिश्रमिक नहीं लेते हैं। अधिकांश पात्र विरासत में मिली भूमिकाओं का निर्वहन कर रहे हैं।
- गंगाधर दुबे, अध्यक्ष मेला कमेटी बीसलपुर।

दिनेश रस्तोगी।- फोटो : 1

दिनेश रस्तोगी।- फोटो : 1

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