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पीलीभीतः होली नजदीक आते ही जनपद में बढ़ा सिंथेटिक दूध का कारोबार, जिम्मेदार बेपरवाह

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Sat, 15 Feb 2020 02:54 AM IST
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पीलीभीत। होली नजदीक आते ही शहर में दूध की मांग बढ़ी तो मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। सहालग पहले से चल रहा है, ऐसे में बाजार में सिंथेटिक दूध भी सप्लाई किया जाने लगा है। हानिकारक केमिकल से बना यह दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।
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होटलों और मिठाई की दुकानों में मिलावटी दूध से मावा और मिठाई बगैरह भी तैयार की जाने लगी है। मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई के नाम पर एफएसडीए सिर्फ छोटी दुकानों और दूधियों से नमूने लेकर खानापूरी में जुटा है। बड़ी फैक्ट्री या होटलों पर न तो खाद्य पदार्थों के न तो नमूने लिए जा रहे हैं, न ही उन पर हमेशा की तरह कोई कार्रवाई हो रही है। सिस्टम छापा मारने के बहाने दुकानदारों से मिलकर होली मनाने में जुटा है।
जिले की आबादी 20 लाख से अधिक है। उसमें सामान्य दिनों में औसतन रोजाना दूध की खपत तीन लाख लीटर है। मगर होली नजदीक होने व शादियों के चलते एक लाख लीटर अधिक दूध की मांग है। होली नजदीक आते ही घरों में दूध की डिमांड अधिक हो जाती है। यूं तो दूध या उससे बने खाद्य पदार्थों में मिलावट का कारोबार बहुत पहले से चल रहा है, लेकिन होली का त्योहार नजदीक आते ही सिंथेटिक दूध से लेकर मिलावटी मावा में तेजी आने लगी है। मिलावटखोरों ने अपना कारोबार फैलाने के लिए चुनिंदा अड्डे बना लिए हैं। वहीं पर मिलावट का काम शुरू कर दिया गया है। त्योहार के मद्देनजर रोजाना औसतन दूध की खपत की बात करें को जनपद में इस समय चार लाख लीटर दूध की जरूरत है। इसके विपरीत दूध का औसतन उत्पादन ढाई लाख लीटर ही है। बाकी डेढ़ लाख लीटर दूध की आपूर्ति पूरा करने के लिए दूधिये सिंथेटिक दूध इधर-उधर से ला रहे हैं। दूध फैक्ट्रियां भी केमिकलयुक्त सिंथेटिक दूध बनाकर स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने में पीछे नहीं हैं।
होली पर मिलावट से होंगे करोड़ों के वारे-न्यारे
मिलावटखोर हर साल होली और दिवाली के अलावा विभिन्न त्योहारों पर दूध और उससे बने उत्पादों में मिलावट का कारोबार करके करोड़ों के वारे-न्यारे करते हैं। इस साल भी यही प्लानिंग तैयार हो चुकी है। शहर के अब सुनगढ़ी तिराहा, नौगवां चौराहा, गौहनिया चौराहा, आसाम चौराहे, रेलवे स्टेशन माधोटांडा रेलवे क्रासिंग के अलावा नकटादाना चौराहे पर दूूधिये सुबह सात से 9 बजे तक खुलेआम दूध में पानी या अन्य केमिकल पदार्थ मिलाते दिख जाते हैं, लेकिन एफएसडीए टीम को यह सब कुछ नहीं दिखता। हाल ही में एक दूधिया से लिए गए नमने की परीक्षण रिपोर्ट मिलने पर दूध में डिटर्जेंट की मिलावट निकली थी। इसके बाद भी सिस्टम हो होश नहीं।
डिटर्जेंट, शैंपू और यूरिया की मिलावजट से तैयार हो रहा दूध
नाम न छापने की गुजारिश पर दूध के कारोबारी का कहना है कि मुनाफा कमाने के लिए दूध में पानी की मिलावट आम बात है। शहर की 156 डेयरियों में अधिकतर यह सब आसानी से चलता है। मगर सिंथेटिक दूध बनाने वाले कारोबारी मुनाफा कमाने के लालच में आम इंसान की जान से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते। डिटर्जेंट, यूरिया, शैंपू, हाइड्रोजन पेरोक्साइड को मिलाकर पानी का घोल तैयार करते हैं। फिर चिकनाई लाने के लिए इसमें रिफाइंड मिलाया जाता है। फिर इसे हल्की आंच पर उबालते हैं। जब इसका घनत्व दूध के बराबर हो जाता है तो उसे उबालना बंद कर देते हैं। इसके बाद पनीर निकला सपरेटा दूध उसमें मिला देते हैं। तब यह दूध शुद्ध की तरह गाढ़ा नजर आता है, लेकिन यह सिंथेटिक दूध होता है।
रबड़ जैसी मलाई यानी सिंथेटिक दूध
सिंथेटिक दूध की पहचान करना मुश्किल है। जानकारों के अनुसार इस दूध में वैसे तो मलाई जमती नहीं है। अगर मलाई जमने लगे तो वह रबड़ जैसी होगी। चूंकि यह साधारण दूध नहीं, इसलिए कई दिन तक रखा रहने के बाद भी फटता नहीं है। शैंपू की मिलावट होने के कारण हथेली पर रगड़ने से सिंथेटिक दूध झाग छोड़ने लगता है। उबालने के बाद इस दूध का रंग भी गाय के दूध की तरह पीला पड़ जाता है। इसके अलावा नेपाल के रास्ते आने वाला चाइना मिल्क पाउडर भी इसमें मिलाना कुछ कारोबारियों ने शुरू कर दिया है, ताकि इसको असली दूध साबित किया जा सके।
नेपाल और उत्तराखंड तक है सप्लाई
सिंथेटिक दूध की सप्लाई मंडल के जनपदों के अलावा जनपद से सटे उत्तराखंड के टनकपुर, खटीमा, ऊधम सिंह नगर और नेपाल तक की जाती है। दूध को खुला बेचने के साथ ही पैकेट बनाकर भी सप्लाई होती है।
इन इलाकों में होता है कारोबार
सिंथेटिक दूध बनाने के लिए जनपद के कई इलाके मशहूर हैं। माधोटांडा, न्यूरिया, पूरनपुर, अमरिया-सितारगंज मार्ग पर बड़े पैमाने पर इसको तैयार किया जाता है। यहीं से सीधी सप्लाई होती है। इसके अलावा होली के दिनों में बरेली के नवाबगंज, बहेड़ी से भी मिलावटी व सिंथेटिक दूध पीलीभीत की मंडी में सप्लाई होता है।
दिमाग से किडनी तक पर डालता है असर
मिलावटी दूध पीना सेहत के लिए हानिकारक है। डॉ. अनिल शुक्ला ने बताया कि बच्चे अगर मिलावटी या सिंथेटिक दूध का सेवन करते हैं तो उनके दिमाग पर असर पड़ता है। उनके विकास भी धीमा पड़ जाता है। इसके अलावा यह किडनी पर भी बुरा प्रभाव डालता है। गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जिनके परिणाम घातक होते हैं।
यह है दूध में मिलावट पर सजा
मिलावटी दूध का कारोबार करने वालों को दंडित करने के लिए कानून तो है, मगर इसको सख्त नहीं कहा जा सकता। आम तौर पर अधोमानक दूध बेचने वाले पर 35 हजार रुपये अधिकतम जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई यूरिया, डिटर्जेंट आदि मिलाकर दूध बनाता है और बेचता है तो उसके लिए पांच लाख रुपये जुर्माना और छह माह की सजा का प्रावधान है।
दूध एवं अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी को पकड़ने के लिए लगातार छापे मारे जाते हैं। सैंपल की परीक्षण रिपोर्ट मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होती है। अभी भी मिलावटी कारोबार रोकने के लिए छापे डाले जा रहे हैं। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
- शशांक त्रिपाठी, अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए
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