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बाकी छात्राओं को भरोसे में ले पुलिस तो और खुलेंगी असिस्टेंट प्रोफेसर की करतूतें

Sun, 28 Nov 2021 01:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 28 Nov 2021 01:06 AM IST
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if the police take the rest of the student into confidence, then the assistant professor's action will open
पीलीभीत। मिशन शक्ति भले ही तीसरे फेज में चल रहा हो पर पुलिस अभी तक छात्राओं में ऐसा भरोसा नहीं पैदा कर सकी है जिससे वे अपराध के खिलाफ मुखर हों। छेड़खानी और दुष्कर्म के बाद भी छात्राएं चुप होकर बैठ जाती हैं। दुष्कर्म पीड़ित छात्रा जब असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत करने के लिए आगे बढ़ी तो तीन और ऐसी छात्राएं थीं जिन्होंने बातचीत में अपनी आपबीती शेयर की थी। इसकी रिकॉर्डिंग छात्रा के पास है लेकिन अब यह तीन छात्राएं अपनी आपबीती को पुलिस को नहीं बताना चाहती हैं क्योंकि उन्हें पुलिस कार्रवाई के दौरान अपनी पहचान उजागर होने का डर है।
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अगर पुलिस न्याय का भरोसा दे पाई तो वे तीन छात्राएं भी पुलिस के सामने असिस्टेंट प्रोफेसर की करतूतें खोल देंगी जो अभी तक कानूनी पचड़े में न पड़ने की वजह से बयान देने से परहेज कर रहीं हैं। वैसे भी सिर्फ एक छात्रा द्वारा आरोप लगाने और रिपोर्ट दर्ज कराने से यह पूरा मामला अभी तक दुष्कर्म की धाराओं तक सीमित है। सेक्स रैकेट संचालित करने के संबंध में कोई गवाही पुलिस की विवेचना में सामने नहीं आई है, लेकिन अगर उन तीन छात्राओं ने भी अपनी आपबीती पुलिस के सामने बयान कर दी तो असिस्टेंट प्रोफेसर कामरान आलम खान पर कानूनी कार्रवाई का शिकंजा और कसेगा। पुलिस के लिए सेक्स रैकेट से संबंधित आरोपों पर भी साक्ष्य जुटाना आसान होगा।
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ऐसे मामलों में पीड़ित छात्राओं को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। पुलिस उन्हें समुचित सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराए। उनका नाम मुकदमे की कार्रवाई में गोपनीय रहेगा। यदि भय के कारण छात्राएं सही बात नहीं बताएंगी तब आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर को सजा मिलना मुश्किल हो जाएगा।
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- अशोक वाजपेयी, फौजदारी मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता
पुलिस महिला अपराध रोकने के प्रति संवेदनशील है। अगर कोई छात्रा बयान देती है तो उसकी पहचान गोपनीय रखने का नियम है। पहचान गोपनीय ही रहेगी। इसलिए डरने की जरूरत नहीं है। साक्ष्य देने में कतई पीछे न रहें। पुलिस ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करती है। - दिनेश कुमार पी, पुलिस अधीक्षक
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