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यहां तो खेलने की उम्र में बन जाते हैं दूल्हा-दुल्हन
सत्यवान अवस्थी बीसलपुर (पीलीभीत)।
Updated Tue, 25 Apr 2017 11:28 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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12 साल के महेंद्र की सगाई हुई तो छोड़ दी उसने पढ़ाई
बीसलपुर में महावट बिरादरी में है बाल विवाह की प्रथा
बीसलपुर (पीलीभीत)। बाल विवाह यूं तो कानूनन जुर्म है, लेकिन क्षेत्र के कई गांवों में महावट बिरादरी के लोग आज भी यह अपराध कर रहे हैं। हाल ही में ऐसा ही एक मामला गांव डेढ़ा में सामने आया है। गांव के सोहनलाल ने अपने 12 साल के बेटे महेंद्र का विवाह बरेली की नवाबगंज तहसील के गांव अनंदापुर में बालकराम की बेटी सीमा से तय कर दिया है। सगाई की रस्म भी हो चुकी है। घर चलाने के लिए अब महेंद्र को पढ़ाई छोड़कर नागिन बैंड में काम करना पड़ रहा है। महेंद्र ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय ईंटा रोड़ा से इस साल कक्षा छह की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। उसका कक्षा सात में प्रवेश होना था लेकिन उसने पढ़ाई छोड़ दी है। प्रधानाध्यापक कुंवरसेन ने इसकी पुष्टि की। गांव टेढ़ा लेखराज में महावट बिरादरी के करीब 30 परिवार हैं। इनकी आबादी एक हजार से अधिक है। महेंद्र इस बिरादरी में अकेला ऐसा बालक नहीं है जिसकी पढ़ाई विवाह के चक्कर में छूटी है, उसकी बिरादरी के हर घर में उसके जैसे बच्चे हैं। महावट बिरादरी में बाल विवाह आम बात है। इस बिरादरी में 30-35 साल के युवक दादा-नाना बन जाते हैं। प्रशासन इस गैर कानूनी परंपरा को अब तक खत्म नहीं करा पाया है।
इन गांवों में है बाल विवाह की प्रथा
तहसील क्षेत्र के गांव टेढ़ा लेखराज, डंडिया भगत, रूरिया, बिलहरा, दियुरिया खुर्द, मसीत और बरसिया गांवों में महावट जाति के लोगों में बाल विवाह की प्रथा जारी है।
महेंद्र के बड़े भाइयों का भी किशोरावस्था में हुआ विवाह
महेंद्रपाल के पिता सोहनलाल ने बताया कि उनकी बिरादरी में सदियों से बाल विवाह की प्रथा है। सोहनलाल ने बताया कि उनका विवाह भी 13 साल की आयु में हो गया था। उन्होंने अपने बड़े बेटे प्रताप का विवाह 14 साल और मझले बेटे मंगल का विवाह 15 साल की उम्र में कर दिया था। अब वह अपने तीसरे बेटे महेंद्र का विवाह 12 साल की उम्र में कर रहे हैं।
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जल्दी शादी, जल्दी बच्चे
गांव टेढ़ा लेखराज निवासी 75 वर्षीय हरप्रसाद ने बताया कि 13-14 साल की उम्र में शादी होने पर 15-16 साल की उम्र में पिता बन जाते हैं। बच्चों की शादी जल्दी होने पर 30-35 साल की उम्र में दादा-नाना बन जाते हैं। गांव में महावट बिरादरी के लोग वर्ष 1970 से रह रहे हैं। पहले ये लोग डेरे-तंबू में रहते थे, लेकिन अब घर बनाकर रहने लगे हैं।
ज्यादा उम्र होने पर नहीं होता विवाह
महावट जाति के इंद्रपाल ने बताया कि उनका विवाह तो 11 वर्ष की आयु में हो गया था। बिरादरी में ज्यादा उम्र होने पर विवाह ही नहीं हो पाता है। लिहाजा मजबूरी है बच्चों का बचपन में विवाह करना।
परंपरा तोड़ने को कोई तैयार नहीं
ग्राम प्रधान रामरतन ने बताया कि उन्होंने गांव में महावट जाति के लोगों को बाल विवाह न करने के लिए काफी समझाया लेकिन वे अपनी बिरादरी की इस परंपरा तोड़ने किसी कीमत पर छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
एसडीएम बोले, बाल विवाह रोकना पुलिस की जिम्मेदारी
एसडीएम बीपी सिंह ने बताया कि गांव टेढ़ा लेखराज में बालक महेंद्रपाल का विवाह तय होने और सगाई की रस्म पूरी हो जाने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वैसे भी बाल विवाह रोकना पुलिस की जिम्मेदारी है।
सीओ ने जिला प्रोवेशन अधिकारी का बताया जिम्मेदार
सीओ हरीश भदौरिया ने बताया कि यदि लिखित शिकायत मिलेगी तो पुलिस को भेजकर बाल विवाह रुकवा दिया जाएगा। वैसे बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी जिला प्रोवेशन अधिकारी की है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी कराएंगे जांच
श्रम प्रवर्तन अधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि सगाई होने के बाद छात्र महेंद्र के पढ़ाई छोड़कर बैंड पार्टी में काम करने की जानकारी उन्हें नहीं है। अगर ऐसा है तो मामले को दिखवाया जाएगा। छात्र को श्रम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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12 साल के महेंद्र की सगाई हुई तो छोड़ दी उसने पढ़ाई
बीसलपुर में महावट बिरादरी में है बाल विवाह की प्रथा
बीसलपुर (पीलीभीत)। बाल विवाह यूं तो कानूनन जुर्म है, लेकिन क्षेत्र के कई गांवों में महावट बिरादरी के लोग आज भी यह अपराध कर रहे हैं। हाल ही में ऐसा ही एक मामला गांव डेढ़ा में सामने आया है। गांव के सोहनलाल ने अपने 12 साल के बेटे महेंद्र का विवाह बरेली की नवाबगंज तहसील के गांव अनंदापुर में बालकराम की बेटी सीमा से तय कर दिया है। सगाई की रस्म भी हो चुकी है। घर चलाने के लिए अब महेंद्र को पढ़ाई छोड़कर नागिन बैंड में काम करना पड़ रहा है। महेंद्र ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय ईंटा रोड़ा से इस साल कक्षा छह की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। उसका कक्षा सात में प्रवेश होना था लेकिन उसने पढ़ाई छोड़ दी है। प्रधानाध्यापक कुंवरसेन ने इसकी पुष्टि की। गांव टेढ़ा लेखराज में महावट बिरादरी के करीब 30 परिवार हैं। इनकी आबादी एक हजार से अधिक है। महेंद्र इस बिरादरी में अकेला ऐसा बालक नहीं है जिसकी पढ़ाई विवाह के चक्कर में छूटी है, उसकी बिरादरी के हर घर में उसके जैसे बच्चे हैं। महावट बिरादरी में बाल विवाह आम बात है। इस बिरादरी में 30-35 साल के युवक दादा-नाना बन जाते हैं। प्रशासन इस गैर कानूनी परंपरा को अब तक खत्म नहीं करा पाया है।
इन गांवों में है बाल विवाह की प्रथा
तहसील क्षेत्र के गांव टेढ़ा लेखराज, डंडिया भगत, रूरिया, बिलहरा, दियुरिया खुर्द, मसीत और बरसिया गांवों में महावट जाति के लोगों में बाल विवाह की प्रथा जारी है।
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महेंद्र के बड़े भाइयों का भी किशोरावस्था में हुआ विवाह
महेंद्रपाल के पिता सोहनलाल ने बताया कि उनकी बिरादरी में सदियों से बाल विवाह की प्रथा है। सोहनलाल ने बताया कि उनका विवाह भी 13 साल की आयु में हो गया था। उन्होंने अपने बड़े बेटे प्रताप का विवाह 14 साल और मझले बेटे मंगल का विवाह 15 साल की उम्र में कर दिया था। अब वह अपने तीसरे बेटे महेंद्र का विवाह 12 साल की उम्र में कर रहे हैं।
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जल्दी शादी, जल्दी बच्चे
गांव टेढ़ा लेखराज निवासी 75 वर्षीय हरप्रसाद ने बताया कि 13-14 साल की उम्र में शादी होने पर 15-16 साल की उम्र में पिता बन जाते हैं। बच्चों की शादी जल्दी होने पर 30-35 साल की उम्र में दादा-नाना बन जाते हैं। गांव में महावट बिरादरी के लोग वर्ष 1970 से रह रहे हैं। पहले ये लोग डेरे-तंबू में रहते थे, लेकिन अब घर बनाकर रहने लगे हैं।
ज्यादा उम्र होने पर नहीं होता विवाह
महावट जाति के इंद्रपाल ने बताया कि उनका विवाह तो 11 वर्ष की आयु में हो गया था। बिरादरी में ज्यादा उम्र होने पर विवाह ही नहीं हो पाता है। लिहाजा मजबूरी है बच्चों का बचपन में विवाह करना।
परंपरा तोड़ने को कोई तैयार नहीं
ग्राम प्रधान रामरतन ने बताया कि उन्होंने गांव में महावट जाति के लोगों को बाल विवाह न करने के लिए काफी समझाया लेकिन वे अपनी बिरादरी की इस परंपरा तोड़ने किसी कीमत पर छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
एसडीएम बोले, बाल विवाह रोकना पुलिस की जिम्मेदारी
एसडीएम बीपी सिंह ने बताया कि गांव टेढ़ा लेखराज में बालक महेंद्रपाल का विवाह तय होने और सगाई की रस्म पूरी हो जाने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वैसे भी बाल विवाह रोकना पुलिस की जिम्मेदारी है।
सीओ ने जिला प्रोवेशन अधिकारी का बताया जिम्मेदार
सीओ हरीश भदौरिया ने बताया कि यदि लिखित शिकायत मिलेगी तो पुलिस को भेजकर बाल विवाह रुकवा दिया जाएगा। वैसे बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी जिला प्रोवेशन अधिकारी की है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी कराएंगे जांच
श्रम प्रवर्तन अधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि सगाई होने के बाद छात्र महेंद्र के पढ़ाई छोड़कर बैंड पार्टी में काम करने की जानकारी उन्हें नहीं है। अगर ऐसा है तो मामले को दिखवाया जाएगा। छात्र को श्रम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।