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फाइलेरिया उन्मूलन के लिए घर-घर जाएंगी टीमें, दवाई खिलाएंगी
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पीलीभीत/अमरिया। फाइलेरिया से बचाव के लिए 22 नवंबर से स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर दवाई खिलाएंगे। इसके लिए अमरिया और ललौरीखेड़ा में कर्मचारियों का प्रशिक्षण दिया गया। स्वास्थ्य कर्मियों को फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई।
अमरिया में क्षेत्रीय फाइलेरिया उन्मूलन के नोडल अधिकारी डॉ. उदित मोहन ने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है। जिसे हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है। यह असाध्य रोग मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। अगर यह मच्छर किसी फाइलेरिया ग्रसित व्यक्ति को काटने के बाद स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के रोगाणु उस व्यक्ति के खून में प्रवेश कर जाता हैं। खून में रोगाणु के प्रवेश करने के बाद तुरंत इसका लक्षण दिखाई नहीं पड़ता है। इसके लक्षण उभरने में पांच से पंद्रह वर्षों का समय लग जाता है। उन्होंने बताया जनपद में 3815 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाना है। इसकी शुरूआत हो गई है। एडीएमओ राजीव मौर्य ने बताया कि 22 नवंबर से 07 दिसंबर 2021 तक टीमें घर-घर जाएंगी। एक सुपरवाइजर की देखरेख में छह टीमें कार्य करेंगी। एक टीम को 250 घर विजिट करने होंगे। उन्होंने बताया पात्र लाभार्थी गर्भवती महिला, गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्ति एवं 2 साल से कम आयु के बच्चों के अलावा सभी लोगों को इस दवा का सेवन करना है। इससे समुदाय के सभी लोग फाइलेरिया से आजीवन बचे रहेंगे। प्रशिक्षण में जिला मलेरिया निरीक्षक राज कुमार, बीपीएम सुरजीत कुमार, जिला समन्वयक पीसीआई मोहम्मद रिजवान, मॉनिटर डब्ल्यूएचओ सुमेर लाल आदि उपस्थित रहे।
कब-कब होगा प्रशिक्षण
एडीएमओ राजीव मौर्य ने बताया प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 नवंबर 2021 से 19 नवंबर 2021 तक चलेगा। सीएचसी बीसलपुर व बिलसंडा में 12 नवंबर, सीएचसी न्यूरिया व नगर क्षेत्र 15 नवंबर, सीएचसी बरखेड़ा व माधौटांडा में 16 नवंबर, सीएचसी पूरनपुर व कुरैया 18 नवंबर, भरतपुर व हजारा में 19 नवंबर को प्रशिक्षण होगा।
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यह रखें सावधानियां
- दवा खाली पेट नहीं खानी है
- गोलियों की अनुशंसित संख्या को आयु वर्ग के अनुसार दिया जाना है
- डीईसी को पानी के साथ निगल लिया जाना चाहिए और अल्बेंडाजोल को चबाकर खाया जाना चाहिए
कोट--
दवा पूर्णत: सुरक्षित है। किसी व्यक्ति को दवा खाने में कोई लापरवाही नहीं करनी है। फाइलेरिया जानलेवा नहीं है लेकिन प्रभावित व्यक्तियों एवं उनके परिवार पर इस बीमारी से आर्थिक बोझ पड़ जाता है।
- लोकेश कुमार गंगवार, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी
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अमरिया में क्षेत्रीय फाइलेरिया उन्मूलन के नोडल अधिकारी डॉ. उदित मोहन ने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है। जिसे हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है। यह असाध्य रोग मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। अगर यह मच्छर किसी फाइलेरिया ग्रसित व्यक्ति को काटने के बाद स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के रोगाणु उस व्यक्ति के खून में प्रवेश कर जाता हैं। खून में रोगाणु के प्रवेश करने के बाद तुरंत इसका लक्षण दिखाई नहीं पड़ता है। इसके लक्षण उभरने में पांच से पंद्रह वर्षों का समय लग जाता है। उन्होंने बताया जनपद में 3815 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाना है। इसकी शुरूआत हो गई है। एडीएमओ राजीव मौर्य ने बताया कि 22 नवंबर से 07 दिसंबर 2021 तक टीमें घर-घर जाएंगी। एक सुपरवाइजर की देखरेख में छह टीमें कार्य करेंगी। एक टीम को 250 घर विजिट करने होंगे। उन्होंने बताया पात्र लाभार्थी गर्भवती महिला, गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्ति एवं 2 साल से कम आयु के बच्चों के अलावा सभी लोगों को इस दवा का सेवन करना है। इससे समुदाय के सभी लोग फाइलेरिया से आजीवन बचे रहेंगे। प्रशिक्षण में जिला मलेरिया निरीक्षक राज कुमार, बीपीएम सुरजीत कुमार, जिला समन्वयक पीसीआई मोहम्मद रिजवान, मॉनिटर डब्ल्यूएचओ सुमेर लाल आदि उपस्थित रहे।
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कब-कब होगा प्रशिक्षण
एडीएमओ राजीव मौर्य ने बताया प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 नवंबर 2021 से 19 नवंबर 2021 तक चलेगा। सीएचसी बीसलपुर व बिलसंडा में 12 नवंबर, सीएचसी न्यूरिया व नगर क्षेत्र 15 नवंबर, सीएचसी बरखेड़ा व माधौटांडा में 16 नवंबर, सीएचसी पूरनपुर व कुरैया 18 नवंबर, भरतपुर व हजारा में 19 नवंबर को प्रशिक्षण होगा।
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यह रखें सावधानियां
- दवा खाली पेट नहीं खानी है
- गोलियों की अनुशंसित संख्या को आयु वर्ग के अनुसार दिया जाना है
- डीईसी को पानी के साथ निगल लिया जाना चाहिए और अल्बेंडाजोल को चबाकर खाया जाना चाहिए
कोट--
दवा पूर्णत: सुरक्षित है। किसी व्यक्ति को दवा खाने में कोई लापरवाही नहीं करनी है। फाइलेरिया जानलेवा नहीं है लेकिन प्रभावित व्यक्तियों एवं उनके परिवार पर इस बीमारी से आर्थिक बोझ पड़ जाता है।
- लोकेश कुमार गंगवार, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी