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108 और 102 एंबुलेंस के थमे पहिये, मरीज बेहाल
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जिला अस्पताल परिसर में खड़ी सरकारी एंबुलेंस
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस कर्मियों के समायोजन सहित कई मांगों को लेकर सोमवार को एंबुलेंस कर्मियों ने जिले में सरकारी एंबुलेंस सेवा ठप कर हड़ताल पर चले गए। एंबुलेंस सेवा ठप होने से मरीजों और तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ी। गर्भवती महिलाओं से लेकर अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीज परेशान रहे। कोई मजबूरी में अपने मरीज को प्राइवेट वाहन से अस्पताल लेकर पहुंचा। तो कोई बाइक से। यहां तक लोगों को प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा।
जिले में 108 व 102 सरकारी एंबुलेंस 51 हैं। इसमें 26 गाड़ियां 102 की और 23 गाड़ियां 108 की है। इसके अलावा दो एएलएस चलती है। इन एंबुलेंस पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या जिले भर में करीब 250 के आसपास है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस कर्मियों के समायोजन और एंबुलेंस कर्मचारियों को नेशनल हेल्थ मिशन के अधीन और ठेका प्रथा से मुक्ति समेत छह मांगों को लेकर पिछले चार दिन से कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम कर रहे थे। सोमवार को जीवनदायनी स्वास्थ्य विभाग 108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के प्रदेश आह्वान पर जिले पर जिला अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह के नेतृत्व में सुबह नौ बजे पूरे जिले में चलने वाली सभी एंबुलेंसों को जिला अस्पताल परिसर में खड़ाकर हड़ताल पर चले गए। अपनी मांग को लेकर जिला अस्पताल परिसर में स्थित पार्क में प्रदर्शन किया। एंबुलेंस सेवा ठप होने से मरीजों को परेशानी बढ़ गई। एंबुलेंस प्रभारी मयंक गुप्ता और सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने कर्मचारियों से वार्ता करने के बाद ब्लॉक पर लेवल पर केवल पांच एंबुलेंस को इमरजेंसी केस के लिए रुकवा दिया। इन पांच एंबुलेंसों को शहर, बीसलपुर, पूरनपुर, अमरिया और माधोटांडा पर रोका गया है। ताकि इमरजेंसी सेवा ठप न हो, लेकिन इसके बाद भी शहर से लेकर देहात तक एंबुलेंस सेवा ठप होने से मरीज परेशान हो गए। चाहे फिर गर्भवती महिला हो फिर गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीज। सभी को इस समस्या से जूझना पड़ा। इसके चलते जिला अस्पताल इमरजेंसी में भी मरीजों की संख्या कम रही है। एंबुलेंस का संचालन ठप होने से कोरोना मरीजों के अलावा अन्य मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी।
एक दिन में 250 मरीजों को लेकर पहुंचती हैं एंबुलेंस
जिले में 51 एंबुलेंस से पूरे दिन मरीजों का अस्पताल ले जाना आना लगा रहता था। प्रतिदिन औसतन 250 मरीजों को अस्पताल लेकर आती थी, लेकिन अचानक व्यवस्था ठप होने से मरीज बेहाल हो गए। सिर्फ पांच एंबुलेंस पूरे जिले में चल रही थी। जिसके चलते अधिकांश मामलों में एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। ऐसे में किसी ने बाइक, तो किसी ने लोडर तो कोई ई-रिक्शा से अपने मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचा।
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बहन की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। 108 एंबुलेंस पर दस बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बहन की हालत बिगड़ती देख मजबूरी में बाइक से ही बहन को इलाज के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। प्रेम कुमार गांव शहपुरा
सुबह बड़े भाई की पत्नी की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। वह गर्भवती है। जिन्हें अस्पताल ले जाने के लिए सुबह चार बजे से फोन करते रहे, लेकिन हर कोई हड़ताल होने की बात कहकर फोन काट दे रहा था। मजबूरी में लोडर से भाभी को न्यूरिया सीएचसी लेकर पहुंचे। लेखराज, पंडरी
एंबुलेंस कर्मी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए थे। इसलिए परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन इमरजेंसी केस के लिए पांच एंबुलेंस संचािलत हो रही है, जो 24 घंटे सेवा देगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल सीएमओ
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जिले में 108 व 102 सरकारी एंबुलेंस 51 हैं। इसमें 26 गाड़ियां 102 की और 23 गाड़ियां 108 की है। इसके अलावा दो एएलएस चलती है। इन एंबुलेंस पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या जिले भर में करीब 250 के आसपास है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस कर्मियों के समायोजन और एंबुलेंस कर्मचारियों को नेशनल हेल्थ मिशन के अधीन और ठेका प्रथा से मुक्ति समेत छह मांगों को लेकर पिछले चार दिन से कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम कर रहे थे। सोमवार को जीवनदायनी स्वास्थ्य विभाग 108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के प्रदेश आह्वान पर जिले पर जिला अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह के नेतृत्व में सुबह नौ बजे पूरे जिले में चलने वाली सभी एंबुलेंसों को जिला अस्पताल परिसर में खड़ाकर हड़ताल पर चले गए। अपनी मांग को लेकर जिला अस्पताल परिसर में स्थित पार्क में प्रदर्शन किया। एंबुलेंस सेवा ठप होने से मरीजों को परेशानी बढ़ गई। एंबुलेंस प्रभारी मयंक गुप्ता और सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने कर्मचारियों से वार्ता करने के बाद ब्लॉक पर लेवल पर केवल पांच एंबुलेंस को इमरजेंसी केस के लिए रुकवा दिया। इन पांच एंबुलेंसों को शहर, बीसलपुर, पूरनपुर, अमरिया और माधोटांडा पर रोका गया है। ताकि इमरजेंसी सेवा ठप न हो, लेकिन इसके बाद भी शहर से लेकर देहात तक एंबुलेंस सेवा ठप होने से मरीज परेशान हो गए। चाहे फिर गर्भवती महिला हो फिर गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीज। सभी को इस समस्या से जूझना पड़ा। इसके चलते जिला अस्पताल इमरजेंसी में भी मरीजों की संख्या कम रही है। एंबुलेंस का संचालन ठप होने से कोरोना मरीजों के अलावा अन्य मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी।
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एक दिन में 250 मरीजों को लेकर पहुंचती हैं एंबुलेंस
जिले में 51 एंबुलेंस से पूरे दिन मरीजों का अस्पताल ले जाना आना लगा रहता था। प्रतिदिन औसतन 250 मरीजों को अस्पताल लेकर आती थी, लेकिन अचानक व्यवस्था ठप होने से मरीज बेहाल हो गए। सिर्फ पांच एंबुलेंस पूरे जिले में चल रही थी। जिसके चलते अधिकांश मामलों में एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। ऐसे में किसी ने बाइक, तो किसी ने लोडर तो कोई ई-रिक्शा से अपने मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचा।
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बहन की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। 108 एंबुलेंस पर दस बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बहन की हालत बिगड़ती देख मजबूरी में बाइक से ही बहन को इलाज के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। प्रेम कुमार गांव शहपुरा
सुबह बड़े भाई की पत्नी की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। वह गर्भवती है। जिन्हें अस्पताल ले जाने के लिए सुबह चार बजे से फोन करते रहे, लेकिन हर कोई हड़ताल होने की बात कहकर फोन काट दे रहा था। मजबूरी में लोडर से भाभी को न्यूरिया सीएचसी लेकर पहुंचे। लेखराज, पंडरी
एंबुलेंस कर्मी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए थे। इसलिए परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन इमरजेंसी केस के लिए पांच एंबुलेंस संचािलत हो रही है, जो 24 घंटे सेवा देगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल सीएमओ