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तीसरी लहर : जिले में 1.06 लाख बच्चों पर एक डॉक्टर और 581 बच्चों पर एक बेड
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पीलीभीत। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की रफ्तार में कमी आने के साथ ही विशेषज्ञों ने तीसरी लहर के आने के संकेत भी दे दिए हैं। तीसरी लहर की महामारी से लड़ने के लिए सरकारी इंतजाम के नाम पर छह बाल रोग विशेषज्ञ और जिले में मुख्यालय समेत चार सीएचसी-पीएचसी को मिलकर 110 बेड का वार्ड तैयार कराया जा रहा है। फिलहाल मौजूदा इंतजाम यही है, जबकि जीरो से 10 साल के बच्चों की संख्या 6.40 लाख है। हालांकि महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के दावे तमाम हैं, लेकिन इन आंकड़ों को देखें तो औसतन 581 बच्चों के लिए एक बेड और 1.06 लाख बच्चों के लिए एक डॉक्टर ही मौजूद है।
अप्रैल में शुरू हुई कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर अब उतार पर है। संक्रमित मरीजों की संख्या घटने लगी है। पॉजिटिव मरीजों से भरे सरकारी और निजी अस्पतालों के बेड भी खाली होने लगे हैं। दिन का कोरोना कर्फ्यू हटा लिया गया है। बाजार फिर से खुल गए हैं। इन सबके बीच विशेषज्ञों ने अगस्त में संक्रमण की तीसरी लहर के आने के संकेत दिए हैं। जिसे लेकर शासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। लेकिन मौजूदा समय में सरकारी इंतजाम तीसरी लहर से लड़ने के लिए नाकाफी दिख रहे है। जिले में वर्तमान समय में सिर्फ छह बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इसमें तीन डॉक्टर जिला अस्पताल, एक महिला अस्पताल और बीसलपुर और पूरनपुर सीएचसी पर एक-एक बाल रोग विशषेज्ञ तैनात है। बच्चों के वार्ड के नाम पर एल-2 कोविड अस्पताल की तीसरी और चौथी मंजिल पर 40 बेड का ऑक्सीजन युक्त और 20 बेड वेंटिलेटर युक्त वाला पीकू और पीडियाट्रिक वार्ड बनाया जा रहा है। इसके अलावा सीएचसी माधोटांडा, न्यूरिया, बरखेड़ा और जहानाबाद पर 10-10 बेड बच्चों के लिए रिजर्व किए जाएंगे। हालांकि यह वार्ड अभी तक तैयार नहीं हो सके हैं, जबकि अगस्त में आने का अंदेशा जताया गया है। ऐसे में 6.40 लाख बच्चों को कवर करने के लिए सरकारी इंतजाम नाकाफी हो सकते हैं। अगर स्थिति बिगड़ी तो अप्रैल और मई के जैसे हालत बन सकते हैं।
जिला अस्पताल में छह बेड, वह भी ऑक्सीजनयुक्त नहीं
जिला अस्पताल में बच्चों के लिए छह बेड का पीडियाट्रिक वार्ड बना हुआ है। जोकि ऑॅक्सीजन युक्त नहीं है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सिलिंडर की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा कई सामान्य वार्डों में भी सेंट्रल पाइप लाइन की व्यवस्था नहीं है।
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महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में तो वेंटिलेटर हीं नहीं
अगर स्थिति बिगड़ी तो स्वास्थ्य विभाग एसएनसीयू वार्ड को कोविड पीकू में तब्दील किया जाएगा। लेकिन वहां वर्तमान में 12 बेड मौजूद है। वह भी ऑक्सीजन युक्त नहीं है। एसएनसीयू वार्ड में एक भी वेंटिलेटर मौजूद नहीं है। अगर किसी की हालत बिगड़ी तो मुश्किल और बढ़ जाएंगी।
तीसरी लहर को लेकर तैयारियां मुकाबिल कराई जा रही है। संसाधन और मानव संसाधन बढ़ाने पर जोर है। शासन के निर्देश पर ही काम किया जा रहा है। डॉक्टर कम है इसलिए डॉक्टरों को चिह्नित कर उनकी ट्रेनिंग कराई जा रही है। जो आगे जिले के अन्य डॉक्टरों को ट्रेनिंग देंगे। साथ ही निजी अस्पताल के डॉक्टरों से भी सहयोग लिया जाएगा। जैसे-जैसे गाइडलाइन मिलेगी। उसी तरह काम किया जाएगा। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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अप्रैल में शुरू हुई कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर अब उतार पर है। संक्रमित मरीजों की संख्या घटने लगी है। पॉजिटिव मरीजों से भरे सरकारी और निजी अस्पतालों के बेड भी खाली होने लगे हैं। दिन का कोरोना कर्फ्यू हटा लिया गया है। बाजार फिर से खुल गए हैं। इन सबके बीच विशेषज्ञों ने अगस्त में संक्रमण की तीसरी लहर के आने के संकेत दिए हैं। जिसे लेकर शासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। लेकिन मौजूदा समय में सरकारी इंतजाम तीसरी लहर से लड़ने के लिए नाकाफी दिख रहे है। जिले में वर्तमान समय में सिर्फ छह बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इसमें तीन डॉक्टर जिला अस्पताल, एक महिला अस्पताल और बीसलपुर और पूरनपुर सीएचसी पर एक-एक बाल रोग विशषेज्ञ तैनात है। बच्चों के वार्ड के नाम पर एल-2 कोविड अस्पताल की तीसरी और चौथी मंजिल पर 40 बेड का ऑक्सीजन युक्त और 20 बेड वेंटिलेटर युक्त वाला पीकू और पीडियाट्रिक वार्ड बनाया जा रहा है। इसके अलावा सीएचसी माधोटांडा, न्यूरिया, बरखेड़ा और जहानाबाद पर 10-10 बेड बच्चों के लिए रिजर्व किए जाएंगे। हालांकि यह वार्ड अभी तक तैयार नहीं हो सके हैं, जबकि अगस्त में आने का अंदेशा जताया गया है। ऐसे में 6.40 लाख बच्चों को कवर करने के लिए सरकारी इंतजाम नाकाफी हो सकते हैं। अगर स्थिति बिगड़ी तो अप्रैल और मई के जैसे हालत बन सकते हैं।
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जिला अस्पताल में छह बेड, वह भी ऑक्सीजनयुक्त नहीं
जिला अस्पताल में बच्चों के लिए छह बेड का पीडियाट्रिक वार्ड बना हुआ है। जोकि ऑॅक्सीजन युक्त नहीं है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सिलिंडर की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा कई सामान्य वार्डों में भी सेंट्रल पाइप लाइन की व्यवस्था नहीं है।
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महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में तो वेंटिलेटर हीं नहीं
अगर स्थिति बिगड़ी तो स्वास्थ्य विभाग एसएनसीयू वार्ड को कोविड पीकू में तब्दील किया जाएगा। लेकिन वहां वर्तमान में 12 बेड मौजूद है। वह भी ऑक्सीजन युक्त नहीं है। एसएनसीयू वार्ड में एक भी वेंटिलेटर मौजूद नहीं है। अगर किसी की हालत बिगड़ी तो मुश्किल और बढ़ जाएंगी।
तीसरी लहर को लेकर तैयारियां मुकाबिल कराई जा रही है। संसाधन और मानव संसाधन बढ़ाने पर जोर है। शासन के निर्देश पर ही काम किया जा रहा है। डॉक्टर कम है इसलिए डॉक्टरों को चिह्नित कर उनकी ट्रेनिंग कराई जा रही है। जो आगे जिले के अन्य डॉक्टरों को ट्रेनिंग देंगे। साथ ही निजी अस्पताल के डॉक्टरों से भी सहयोग लिया जाएगा। जैसे-जैसे गाइडलाइन मिलेगी। उसी तरह काम किया जाएगा। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ