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शर्मनाक- देवर रोते हुए फर्श पर तड़पती भाभी की मदद को बुलाता रहा, डॉक्टर बोले- दूर रहो
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पीलीभीत। तेज बुखार पीड़ित महिला के क्वारंटीन वार्ड में फर्श पर 45 मिनट तक तड़पते रहने और फिर मौत होने के मामले में अगले दिन और ज्यादा चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। महिला के देवर के वायरल हुए वीडियो से पता चलता है कि वह डॉक्टरों के चैंबरों में जाकर मदद के लिए रोते हुए बुलाता रहा था, मगर डॉक्टर अपनी जगह से हिले नहीं। वहीं कोरोना की जांच किए बिना देवर से यह भी कह दिया कि तुम भी दूर रहो। लापरवाही उजागार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने अपनी करतूत छिपाने के लिए घटना को जांच के नाम पर टाल दिया है।
गजरौला के गांव बिठौरा कला की रहने वाली 50 वर्षीय सुशीला देवी के पति की पहले ही मौत हो चुकी है। उसे चार दिन से तेज बुखार आ रहा था। बृहस्पतिवार को देवर ने एंबुलेंस बुलाई और किसी तरह जिला अस्पताल लेकर आ गया। एंबुलेंस कर्मचारी महिला को गंभीर हालत में देखकर उसे कोरोना संक्रमित समझकर पुराना अस्पताल में बने क्वारंटीन सेंटर पर लेकर पहुंच गए। महिला के देवर ने क्वारंटीन सेंटर पर मौजूद स्वास्थ कर्मी से भाभी का इलाज करने की गुहार लगाई। महिला 45 मिनट से ज्यादा समय तक तड़पती रही लेकिन किसी डॉक्टर ने कोरोना के डर से उसका चेकअप तक नहीं किया। इसके बाद एंबुलेंस कर्मियों ने महिला को जिला अस्पताल में बनी इंमरजेंसी के बाहर उतार दिया। जब महिला के देवर ने डॉक्टर को बताया कि उसकी भाभी को चार दिन से बुखार आ रहा है तो डॉक्टरों ने उसे भगाना शुरू कर दिया। डॉक्टर बोले- दूर हटो। कोई उसके पास नहीं जाएगा। तुम भी मत जाना। देवर डॉक्टरों से भाभी की जान बचाने की मिन्नतें करता रहा लेकिन डॉक्टरों ने उसको हाथ तक नहीं लगाया, जबकि उस समय तक यह तय नहीं था कि महिला को कोरोना संक्रमण है। देवर और उसके साथ में मौजूद लोगों ने सीएमओ से इसकी शिकायत की तो उन पर भी इसका असर नहीं पड़ा। डॉक्टरों ने उसका कोरोना चेकअप तक नहीं किया। समय से इलाज न मिल पाने के कारण महिला की अस्पताल में ही तड़पकर मौत हो गई। मौत के बाद परिवार वालों ने अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया। मामला बिगड़ता देखकर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने लापरवाही बरतने वालों की जांच शुरू कर दी।
कोरोना के शक में नहीं किया इलाज
कोरोना संक्रमण फैलने के बाद डॉक्टरों के दिल में डर पैदा हो गया है। गुरुवार को महिला की अस्पताल कैंपस में तड़प तड़प कर मौत हो गई। लेकिन डॉक्टरों ने उसका इलाज नहीं किया। डॉक्टरों को शक था कि महिला को कोरोना हो सकता है। बताया जाता है कि महिला को कोरोना न होकर बुखार ही था। अगर डॉक्टर उसका समय से इलाज कर देते तो शायद उसकी जान बच जाती। अब डॉक्टरों का कहना है कि सुशीला देवी की मौत के बाद उसकी बेटी, देवर और देवरानी का सैंपल लेकर कोरोना की जांच के लिए भेजा जाएगा।
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एंबुलेंस कर्मियों के बयान दर्ज
महिला की मौत के मामले में लापरवाही बरतने की बात सामने आने पर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने एंबुलेंस कर्मियों और क्वारंटीन सेंटर पर मौजूद कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं।
सुशीला देवी की मौत के मामले में घटना के वक्त मौजूद डॉक्टर और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच चल रही है। उनका जवाब मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ।
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गजरौला के गांव बिठौरा कला की रहने वाली 50 वर्षीय सुशीला देवी के पति की पहले ही मौत हो चुकी है। उसे चार दिन से तेज बुखार आ रहा था। बृहस्पतिवार को देवर ने एंबुलेंस बुलाई और किसी तरह जिला अस्पताल लेकर आ गया। एंबुलेंस कर्मचारी महिला को गंभीर हालत में देखकर उसे कोरोना संक्रमित समझकर पुराना अस्पताल में बने क्वारंटीन सेंटर पर लेकर पहुंच गए। महिला के देवर ने क्वारंटीन सेंटर पर मौजूद स्वास्थ कर्मी से भाभी का इलाज करने की गुहार लगाई। महिला 45 मिनट से ज्यादा समय तक तड़पती रही लेकिन किसी डॉक्टर ने कोरोना के डर से उसका चेकअप तक नहीं किया। इसके बाद एंबुलेंस कर्मियों ने महिला को जिला अस्पताल में बनी इंमरजेंसी के बाहर उतार दिया। जब महिला के देवर ने डॉक्टर को बताया कि उसकी भाभी को चार दिन से बुखार आ रहा है तो डॉक्टरों ने उसे भगाना शुरू कर दिया। डॉक्टर बोले- दूर हटो। कोई उसके पास नहीं जाएगा। तुम भी मत जाना। देवर डॉक्टरों से भाभी की जान बचाने की मिन्नतें करता रहा लेकिन डॉक्टरों ने उसको हाथ तक नहीं लगाया, जबकि उस समय तक यह तय नहीं था कि महिला को कोरोना संक्रमण है। देवर और उसके साथ में मौजूद लोगों ने सीएमओ से इसकी शिकायत की तो उन पर भी इसका असर नहीं पड़ा। डॉक्टरों ने उसका कोरोना चेकअप तक नहीं किया। समय से इलाज न मिल पाने के कारण महिला की अस्पताल में ही तड़पकर मौत हो गई। मौत के बाद परिवार वालों ने अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया। मामला बिगड़ता देखकर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने लापरवाही बरतने वालों की जांच शुरू कर दी।
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कोरोना के शक में नहीं किया इलाज
कोरोना संक्रमण फैलने के बाद डॉक्टरों के दिल में डर पैदा हो गया है। गुरुवार को महिला की अस्पताल कैंपस में तड़प तड़प कर मौत हो गई। लेकिन डॉक्टरों ने उसका इलाज नहीं किया। डॉक्टरों को शक था कि महिला को कोरोना हो सकता है। बताया जाता है कि महिला को कोरोना न होकर बुखार ही था। अगर डॉक्टर उसका समय से इलाज कर देते तो शायद उसकी जान बच जाती। अब डॉक्टरों का कहना है कि सुशीला देवी की मौत के बाद उसकी बेटी, देवर और देवरानी का सैंपल लेकर कोरोना की जांच के लिए भेजा जाएगा।
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एंबुलेंस कर्मियों के बयान दर्ज
महिला की मौत के मामले में लापरवाही बरतने की बात सामने आने पर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने एंबुलेंस कर्मियों और क्वारंटीन सेंटर पर मौजूद कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं।
सुशीला देवी की मौत के मामले में घटना के वक्त मौजूद डॉक्टर और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच चल रही है। उनका जवाब मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ।