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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट न लगा तो शहर के चारों ओर बन जाएंगे कूड़े के पहाड़
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पीलीभीत। ढाई लाख की आबादी वाले इस शहर के जनप्रतिनिधियों ने भले ही पहचान बनाई हो, लेकिन उन्होंने शहर के बारे में कभी नहीं सोचा। यही वजह है कि शहर की समस्याएं कम होने के बजाए बढ़ती जा रही हैं। कचरे के उचित प्रबंधन के लिए अब तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो शहर में कूड़े के पहाड़ दिखने लगेंगे।
शहर की सफाई व्यवस्था चार दशक पुराने हेल्थ मैनुअल पर ही चल रही है। शहर के सभी 27 वार्डों से निकला कूड़ा कचरा सड़कों के किनारे बने 28 खुले कचराघरों में डाला जाता है। उसके बाद यही नौ टन कूड़ा उठाकर या तो देवहा नदी की तलहटी में डाला जाता है या फिर कभी कभार मीरापुर गांव में बने स्थायी डलावघर में। इसके लिए सबसे ज्यादा कसूरवार सिस्टम है। जो आने वाले खतरे से तो वाकिफ है, लेकिन उस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
कूड़े के ढेर पर बसता जा रहा शहर
शहरवासियों के लिए सड़कों के किनारे बने 28 खुले कचराघर मुसीबत का सबब बने ही हुए हैं। यही नहीं अब तो शहर में खाली पड़े प्लॉटों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े के ढेर लगा जा रहे हैं जो और परेशानी पैदा कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन कचराघरों से दोपहर एक बजे तक ही कूड़े का उठान हो पाता है। कई स्थानों पर तो लोगों ने खाली पड़े प्लॉटों को ही स्थायी कूड़ाघर समझकर कूड़ा डालना शुरू कर दिया है।
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देवहा की तलहटी में बनने लगे कूड़े के पहाड़
पिछले कई वर्षों से शहर भर का कूड़ा देवहा नदी की तलहटी में डाला जा रहा है। इससे नदी प्रदूषित हो रही है साथ ही भूगर्भ जल भी दूषित होता जा रहा है। जिसके संपर्क में आने से लोग बीमार हो रहे हैं।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को नहीं दी तवज्जो
शहर में कूड़ा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की जरूरत कई वर्षों से महसूस की जा रही है, लेकिन यह जरूरत न तो जिम्मेदारों को महसूस हो रही है और न ही यहां के जनप्रतिनिधियों को। पालिका सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाकर कूड़े का उचित प्रबंधन तो कर ही सकती है, साथ-साथ इनकम भी कर सकती है।
कूड़ा निस्तारण को स्थायी डलावघर के लिए जमीन मुहैय्या कराई गई है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर मंथन चल रहा है। इसको लेकर जल्द ही किसी कंपनी से संपर्क किया जाएगा। ताकि शहरवासियों को कूड़े से निजात मिल सके।
-विमला जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद
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शहर की सफाई व्यवस्था चार दशक पुराने हेल्थ मैनुअल पर ही चल रही है। शहर के सभी 27 वार्डों से निकला कूड़ा कचरा सड़कों के किनारे बने 28 खुले कचराघरों में डाला जाता है। उसके बाद यही नौ टन कूड़ा उठाकर या तो देवहा नदी की तलहटी में डाला जाता है या फिर कभी कभार मीरापुर गांव में बने स्थायी डलावघर में। इसके लिए सबसे ज्यादा कसूरवार सिस्टम है। जो आने वाले खतरे से तो वाकिफ है, लेकिन उस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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कूड़े के ढेर पर बसता जा रहा शहर
शहरवासियों के लिए सड़कों के किनारे बने 28 खुले कचराघर मुसीबत का सबब बने ही हुए हैं। यही नहीं अब तो शहर में खाली पड़े प्लॉटों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े के ढेर लगा जा रहे हैं जो और परेशानी पैदा कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन कचराघरों से दोपहर एक बजे तक ही कूड़े का उठान हो पाता है। कई स्थानों पर तो लोगों ने खाली पड़े प्लॉटों को ही स्थायी कूड़ाघर समझकर कूड़ा डालना शुरू कर दिया है।
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देवहा की तलहटी में बनने लगे कूड़े के पहाड़
पिछले कई वर्षों से शहर भर का कूड़ा देवहा नदी की तलहटी में डाला जा रहा है। इससे नदी प्रदूषित हो रही है साथ ही भूगर्भ जल भी दूषित होता जा रहा है। जिसके संपर्क में आने से लोग बीमार हो रहे हैं।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को नहीं दी तवज्जो
शहर में कूड़ा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की जरूरत कई वर्षों से महसूस की जा रही है, लेकिन यह जरूरत न तो जिम्मेदारों को महसूस हो रही है और न ही यहां के जनप्रतिनिधियों को। पालिका सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाकर कूड़े का उचित प्रबंधन तो कर ही सकती है, साथ-साथ इनकम भी कर सकती है।
कूड़ा निस्तारण को स्थायी डलावघर के लिए जमीन मुहैय्या कराई गई है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर मंथन चल रहा है। इसको लेकर जल्द ही किसी कंपनी से संपर्क किया जाएगा। ताकि शहरवासियों को कूड़े से निजात मिल सके।
-विमला जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद