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साहब! ऐसे तो एंबुलेंस में ही चली जाएगी मरीजों की जान
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पीलीभीत। दुर्घटना में घायल या बीमार की जान बचाने के लिए 108 नंबर एंबुलेंस के भरोसे रहे तब तो भगवान ही मालिक हैं। जिले में संचालित अधिकतर एंबुलेंस खटारा हो चुकी हैं। पुराने उपकरण काम करना बंद कर चुके हैं। कई एंबुलेंस के एसी खराब हैं, लिहाजा शीशा खोलकर मरीजों को लाया जा रहा है। ऑक्सीजन किट सहित अन्य जीवन रक्षक उपकरण भी खराब हैं। इसमें लाए जाने वाले मरीजों की जान आफत में है, लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह हैं।
गंभीर रूप से जख्मी या बीमार मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस की मदद इसलिए ली जाती है कि उसमें मौजूद जीवन रक्षक उपकरणों और दवाओं की मदद से पीड़ित सुरक्षित रहे। वैसे तो 108 एंबुलेंस सेवा के लिए हेल्पलाइन को खूब प्रचारित-प्रसारित किया गया। अब तीमारदार 108 नंबर डॉयल कर एंबुलेंस बुलाते हैं तो फिर उसमें सवार होने के बाद मरीज सुरक्षा के लिए हर पल भगवान को ही याद करते रहतेे हैं। वजह कई सालों से चल रही 108 एंबुलेंस के ज्यादातर वाहन खटारा हो चुके हैं। कई के उपकरण जर्जर हैं तो कुछ जुगाड़ से चल रहे हैं। मरीज लेकर जिला अस्पताल पहुंचे एक एंबुलेंस चालक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि 20 से अधिक 102 व 108 एंबुलेंस में लगे एसी खराब हैं। गर्मी में मरीजों को पहुंचाया जा रहा है। गर्मी से निजात पाने के लिए चालक शीशा खोल रहे हैं। अंदर धूल आने से मरीजों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। एंबुलेंस से जिला अस्पताल में आने वाले एक मरीज के तीमारदार राजश्री और संजीव ने बताया कि गर्मी के बावजूद एंबुलेंस का एसी नहीं चल रहा था। आक्सीजन किट भी खराब थी तो स्ट्रेचर भी उपयोग लायक नहीं था। इसके कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जिले में दौड़ रही 49 एंबुलेंस
जिले में 108 एंबुलेंस 23 और 102 एंबुलेंस 26 हैं। पिछले महीने 108 एंबुुलेंस और मंगाई गई थी। इतनी एंबुलेंस होने पर भी वे समय पर नहीं पहुंचती हैं। एंबुलेंस चालकों की माने तो करीब 20 एंबुलेंस के एसी खराब हैं तो कई जगाड़ के सहारे चल रही हैं। इसको लेकर कई बार जिला अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी पर बवाल भी हो चुका है।
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108 एंबुलेंस सेवा पिछले कई सालों से चल रही है। एंबुलेंस प्रभारी को सख्त निर्देश है कि शिकायत मिलने पर तत्काल एंबुलेंस ठीक कराई जाए। पिछले माह आठ नई एंबुलेंस मिली थीं। जर्जर एंबुलेंस को बदलने का प्रयास चल रहा है।
- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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गंभीर रूप से जख्मी या बीमार मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस की मदद इसलिए ली जाती है कि उसमें मौजूद जीवन रक्षक उपकरणों और दवाओं की मदद से पीड़ित सुरक्षित रहे। वैसे तो 108 एंबुलेंस सेवा के लिए हेल्पलाइन को खूब प्रचारित-प्रसारित किया गया। अब तीमारदार 108 नंबर डॉयल कर एंबुलेंस बुलाते हैं तो फिर उसमें सवार होने के बाद मरीज सुरक्षा के लिए हर पल भगवान को ही याद करते रहतेे हैं। वजह कई सालों से चल रही 108 एंबुलेंस के ज्यादातर वाहन खटारा हो चुके हैं। कई के उपकरण जर्जर हैं तो कुछ जुगाड़ से चल रहे हैं। मरीज लेकर जिला अस्पताल पहुंचे एक एंबुलेंस चालक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि 20 से अधिक 102 व 108 एंबुलेंस में लगे एसी खराब हैं। गर्मी में मरीजों को पहुंचाया जा रहा है। गर्मी से निजात पाने के लिए चालक शीशा खोल रहे हैं। अंदर धूल आने से मरीजों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। एंबुलेंस से जिला अस्पताल में आने वाले एक मरीज के तीमारदार राजश्री और संजीव ने बताया कि गर्मी के बावजूद एंबुलेंस का एसी नहीं चल रहा था। आक्सीजन किट भी खराब थी तो स्ट्रेचर भी उपयोग लायक नहीं था। इसके कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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जिले में दौड़ रही 49 एंबुलेंस
जिले में 108 एंबुलेंस 23 और 102 एंबुलेंस 26 हैं। पिछले महीने 108 एंबुुलेंस और मंगाई गई थी। इतनी एंबुलेंस होने पर भी वे समय पर नहीं पहुंचती हैं। एंबुलेंस चालकों की माने तो करीब 20 एंबुलेंस के एसी खराब हैं तो कई जगाड़ के सहारे चल रही हैं। इसको लेकर कई बार जिला अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी पर बवाल भी हो चुका है।
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108 एंबुलेंस सेवा पिछले कई सालों से चल रही है। एंबुलेंस प्रभारी को सख्त निर्देश है कि शिकायत मिलने पर तत्काल एंबुलेंस ठीक कराई जाए। पिछले माह आठ नई एंबुलेंस मिली थीं। जर्जर एंबुलेंस को बदलने का प्रयास चल रहा है।
- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ