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डॉक्टर भगवान नहीं, सीमित दायरे में करता है सेवा : डॉ. भरत सेठी
Mon, 27 Oct 2025 12:52 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Mon, 27 Oct 2025 12:52 AM IST
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प्रेस वार्ता में मौजूद आईएमए के पदाधिकारी संवाद
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पीलीभीत। महिला की मौत के बाद निजी अस्पताल में हुए हंगामे से चिकित्सकों में नाराजगी है। आईएमए से जुड़े डॉक्टरों ने रविवार को प्रेस वार्ता कर घटना की निंदा की और इसे चिकित्सक समुदाय का मनोबल तोड़ने वाला बताया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर इलाज करते हैं, चमत्कार नहीं। मरीजों के परिजनों को भी समझना होगा कि मृत्यु अटल सत्य है।
प्रेस वार्ता का संचालन आईएमए सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने किया। आईएमए अध्यक्ष डॉ. भारत सेठी ने कहा कि डॉक्टर भगवान नहीं, बल्कि सेवा देने वाला व्यक्ति है। वह मरीज की उम्मीदों को पूरा करने का प्रयास करता है, लेकिन मृत व्यक्ति को जीवित नहीं कर सकता। विज्ञान और ज्ञान समय के साथ बदलते हैं। ऐसे में समाज को शिक्षित होकर चिकित्सक की सीमाओं को समझना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
श्रीराम अवध मेडिकल कॉलेज के डॉ. जीएन मिश्रा ने कहा कि इस तरह की घटनाएं अत्यंत दुखद हैं। कोई चिकित्सक कभी नहीं चाहता कि उसके इलाज के दौरान मरीज की मौत हो। यह स्थिति मरीज के परिवार और डॉक्टर दोनों के लिए दुखदायक होती है।
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उन्होंने बताया कि 19 अक्तूबर को न्यूरिया क्षेत्र की शंकुतला देवी पत्नी सर्वेश कुमार वायरल फीवर व अन्य समस्याओं के कारण ओपीडी में आई थीं। जांच में सूजन और पीलापन पाया गया। 14 अक्तूबर की रिपोर्ट में स्थिति गंभीर पाई गई और भर्ती की सलाह दी गई लेकिन परिजनों ने मना कर दिया। बाद में हिमोग्लोबिन 7.5 और एल्ब्यूमिन 2.6 पाया गया। इलाज के दौरान तीन घंटे तक तबीयत सामान्य रही पर स्थिति बिगड़ने पर हायर सेंटर रेफर किया। कुछ देर बाद परिजन लौटे और हंगामा करने लगे। हाथापाई, तोड़फोड़ और आगजनी की धमकी दी।
डाॅ. मनीष ने आपबीती सुनाई
आईएमए अध्यक्ष डॉ. सेठी ने कहा कि यह घटना पीलीभीत में पहली बार हुई है। इसमें डॉक्टरों के साथ हाथापाई हुई। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी डॉक्टरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा की थी लेकिन कुछ लोगों की सोच नहीं बदली। मौत पर हंगामा करना गलत है। समाज को डॉक्टर की सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने पुलिस की तत्पर कार्रवाई पर संतोष जताया और उम्मीद की कि भविष्य में चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। इस मौके पर डॉ. एसके अग्रवाल भी मौजूद रहे।
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प्रेस वार्ता का संचालन आईएमए सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने किया। आईएमए अध्यक्ष डॉ. भारत सेठी ने कहा कि डॉक्टर भगवान नहीं, बल्कि सेवा देने वाला व्यक्ति है। वह मरीज की उम्मीदों को पूरा करने का प्रयास करता है, लेकिन मृत व्यक्ति को जीवित नहीं कर सकता। विज्ञान और ज्ञान समय के साथ बदलते हैं। ऐसे में समाज को शिक्षित होकर चिकित्सक की सीमाओं को समझना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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श्रीराम अवध मेडिकल कॉलेज के डॉ. जीएन मिश्रा ने कहा कि इस तरह की घटनाएं अत्यंत दुखद हैं। कोई चिकित्सक कभी नहीं चाहता कि उसके इलाज के दौरान मरीज की मौत हो। यह स्थिति मरीज के परिवार और डॉक्टर दोनों के लिए दुखदायक होती है।
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उन्होंने बताया कि 19 अक्तूबर को न्यूरिया क्षेत्र की शंकुतला देवी पत्नी सर्वेश कुमार वायरल फीवर व अन्य समस्याओं के कारण ओपीडी में आई थीं। जांच में सूजन और पीलापन पाया गया। 14 अक्तूबर की रिपोर्ट में स्थिति गंभीर पाई गई और भर्ती की सलाह दी गई लेकिन परिजनों ने मना कर दिया। बाद में हिमोग्लोबिन 7.5 और एल्ब्यूमिन 2.6 पाया गया। इलाज के दौरान तीन घंटे तक तबीयत सामान्य रही पर स्थिति बिगड़ने पर हायर सेंटर रेफर किया। कुछ देर बाद परिजन लौटे और हंगामा करने लगे। हाथापाई, तोड़फोड़ और आगजनी की धमकी दी।
डाॅ. मनीष ने आपबीती सुनाई
आईएमए अध्यक्ष डॉ. सेठी ने कहा कि यह घटना पीलीभीत में पहली बार हुई है। इसमें डॉक्टरों के साथ हाथापाई हुई। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी डॉक्टरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा की थी लेकिन कुछ लोगों की सोच नहीं बदली। मौत पर हंगामा करना गलत है। समाज को डॉक्टर की सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने पुलिस की तत्पर कार्रवाई पर संतोष जताया और उम्मीद की कि भविष्य में चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। इस मौके पर डॉ. एसके अग्रवाल भी मौजूद रहे।