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टाइगर रिजर्व के वन्य जीवों में एंथ्रेक्स बैक्टीरिया फैलने का खतरा

Sun, 31 May 2020 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 31 May 2020 12:48 AM IST
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health issue for Tiger reserve animals
पीलीभीत/माधोटांडा। पूर्वांचल में भारत-नेपाल सीमा से सटे एक अभ्यारण में एंथ्रेक्स बैक्टीरिया से गैंडे की मौत होने के बाद पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों पर भी इस बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। भारत-नेपाल खुली सीमा होने के चलते पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्चुरी से दोनों देशों के वन्यजीव एक दूसरे के जंगल में खुले रूप से विचरण करते हैं। इसलिए यह डर ज्यादा है।
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वर्ष 2020 इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी मुसीबत भरा साबित हो रहा है। पिछले माह अमेरिका में एक बाघ की कोरोना वायरस से मौत होने की बात सामने आई थी। इसके बाद नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी (एनटीसीए) द्वारा देश के सभी 51 टाइगर रिजर्व में अलर्ट जारी करते हुए वन्यजीवों के स्वास्थ्य की सख्त मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए थे। एनटीसीए के निर्देश मिलने के बाद टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने कैमरों के माध्यम से वन्यजीवों की मॉनीटरिंग कराई जा रही है।
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इधर अब टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों पर एंथ्रेक्स बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। पूर्वांचल में भारत-नेपाल सीमा से सटे भारतीय क्षेत्र के अभ्यारण में एक गैंडे की मौत एंथ्रेक्स बैक्टीरिया से होने की बात सामने आई है। इसे लेकर पूर्वांचल के अभ्यारणों में अलर्ट जारी किया गया है। मगर खतरा पीलीभीत में भी कम नहीं है। इन दिनों नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से एक मादा हाथी टाइगर रिजर्व के लग्गा भग्गा जंगल में अपने एक बच्चे के साथ घूम रही है। पड़ोसी थारू बस्ती के लोग भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य तृणभोजी वन्यजीव भी बहुतायत में एक दूसरे देश की सीमा में आते जाते रहते हैं। ऐसे में यदि कोई एंथ्रेक्स संक्रमित वन्यजीव टाइगर रिजर्व में प्रवेश करता है तो यहां के वन्यजीवों के लिए भी एंथ्रेक्स बैक्टीरिया संक्रमण का कारण बन सकता है।
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ऐसे फैलता है एंथ्रेक्स बैक्टीरिया
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. नूर उल हुदा ने बताया कि जानवरों में एक से दूसरे में संक्रमित होने वाला यह बैक्टीरिया त्वचा के घावों के रास्ते, संक्रमित पशु का मांस खाने और सांस के जरिए फैलता है। संक्रमित पशु को तेज बुखार आने के साथ ही उसका प्लीहा भी काफी बढ़ जाता है। उसकी नाक, पेशाब और मलद्वार के रास्ते खून बहने लगता है। कभी-कभी एकाएक बिना लक्षण दिखाए भी पशु की मौत हो जाती है। इससे पीड़ित पशुओं की मौत होने पर पोस्टमार्टज्म नहीं कराया जाता है। उसको ऐसे ही जमीन में दफन कर दिया जाता है।
दो साल पहले भी बैक्टीरिया संक्रमण से हो चुकी है बाघ की मौत
लगभग दो साल पहले भी एक बाघ की मौत होने के बाद जब उसका पोस्टमार्टम आईवीआरआई बरेली में कराया गया था, तो विशेषज्ञों ने बाघ की मौत एक बैक्टीरिया से होने की बात कही थी। वह बैक्टीरिया बाघ में जंगली सुअर के शिकार के माध्यम से पहुंचना बताया गया था। इसके कुछ दिन बाद एक शावक और एक तेंदुए की भी मौत हुई थी।

एंथ्रेक्स बैक्टीरिया के संक्रमण को लेकर अभी कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। कोरोना के मद्देनजर पहले से वन्यजीवों की सेहत पर टाइगर रिजर्व की पैनी नजर है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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