फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Health is deteriorating due to phone addiction, children and teenagers are becoming irritable.

Pilibhit News: फोन की लत से बिगड़ रही सेहत, चिड़चिड़े हो रहे बच्चे और किशोर

Sat, 07 Feb 2026 12:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 07 Feb 2026 12:31 AM IST
विज्ञापन
Health is deteriorating due to phone addiction, children and teenagers are becoming irritable.
पीलीभीत। मोबाइल फोन की लत से बच्चों और किशोरों की सेहत बिगड़ रही है। स्वभाव में चिड़चिड़ापन और मोबाइल दूर होते ही आक्रामक हो जा रहे हैं। पढ़ाई में मन न लगना, नींद की कमी और अन्य समस्याएं भी हो रही हैं। हाल यह है कि बच्चे अपने माता-पिता और शिक्षक से झगड़े पर आमादा हो जाते हैं। कुछ दिन पूर्व शहर में एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसमें मोबाइल लेने पर किशोर ने अपनी मां से ही मारपीट की थी। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक विभाग में मोबाइल फोन की लत से संबंधित दो से तीन मामले रोजाना पहुंच रहे हैं। मन कक्ष में इस तरह की समस्याओं से पीड़ित बच्चे और किशोरों की मुश्किलों का समाधान किया जा रहा है।
विज्ञापन

आक्रामक हुआ स्वभाव, मां पर ही उठा दिया हाथ
केस-एक : कुछ माह पहले जिला मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक विभाग में एक 15 वर्षीय किशोर काउंसिलिंग के लिए पहुंचा था। किशोर अधिकांश समय मोबाइल फोन में ही मस्त रहता था। मोबाइल लेने पर उसने अपनी मां से ही मारपीट की। इससे उसकी मां के अंदर डर बैठ गया। अस्पताल में काउंसिलिंग के समय भी मां डरी हुई थी। बाद में चिकित्सकों ने किशोर का इलाज किया।
विज्ञापन

शिक्षक से ही कर दिया झगड़ा
केस-दो: शहर के एक स्कूल में पढ़ने वाले छात्र ने मोबाइल फोन लाने से मना करने पर अपने शिक्षक पर ही हाथ उठा दिया था। मनोचिकित्सक विभाग में काउंसिलिंग के समय यह पता चला कि छात्र मोबाइल फोन लेकर स्कूल जाता था। धीरे-धीरे उसे मोबाइल की लत गई। मना करने पर शिक्षक से झगड़ा किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

डाउट क्लियर करने के नाम पर लगा ली लत
केस-तीन : जिला अस्पताल के मन कक्ष में एक अलग तरह का ही मामला पहुंचा। पढ़ाई में मन न लगने और नींद न आने की समस्या बताने वाली छात्रा की काउंसिलिंग की गई तो पता चला कि विषय से जुड़े डाउट (संदेह) को दूर करने के नाम पर उसने मोबाइल की लत लगा ली। एक-एक घंटे तक डाउट के नाम पर मोबाइल चलाने लगी। संवाद

---
वर्चुअल लोकप्रियता के नाम पर बढ़ रही मोबाइल की लत

मेडिकल कॉलेज की मनोचिकित्सक व विभागध्यक्ष डॉ. प्रियंका भटनागर ने बताया कि जब बच्चे खुद को माता- पिता व अन्य परिजन होने के बाद भी अकेला महसूस करते हैं तो वह अपनी एक अलग दुनिया बनाना चाहते है। यही कारण है मोबाइल अब बच्चों के लिए लत बनते जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में रोजाना दो से तीन बच्चों के परिजन बच्चों में मोबाइल की बढ़ रही लत की समस्या लेकर आ रहे हैं। डॉ. प्रियंका भटनागर का कहना है कि मोबाइल गेमिंग एप में बच्चों के स्कोर बनाना, डिजिटल अवॉर्ड, स्पेशल सिग्नेचर आदि मिलते हैं, जो उनको वर्चुअल लोकप्रियता दिलाते है। वहीं, जब गेम में असफलता या आर्थिक नुकसान होता है, तो बच्चे खुद को अकेला व असहाय महसूस करने लगते हैं।

इन उपायों पर अमल करें बच्चे और अभिभावक
- माता-पिता बच्चों के साथ एक घंटा अवश्य खेले।
- ऑनलाइन क्लॉस के बाद बच्चे से मोबाइल ले लें।
- बच्चों को उनके छोटे-मोटे कार्य पर उनका उत्साहवर्धन करें।
- बच्चों को अकेला न छोड़े, पार्क सहित अन्य जगह घुमाएं।
- बच्चों को घर की छोटी-मोटी जिम्मेदारी वाले कार्य दें।
- बच्चों की गलतियों पर उनको स्नेह पूर्व समझाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed