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Pilibhit News: स्वास्थ्य विभाग का भ्रष्टाचार फाइलों में दफन

Tue, 28 Nov 2023 12:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 28 Nov 2023 12:45 AM IST
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Health department's corruption buried in files
पीलीभीत। स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतों को जांच के नाम पर दबाया जा रहा है। साक्ष्यों के साथ की गईं शिकायतों का भी यही हाल है। बगैर कार्रवाई के मामले निपटा दिए जाते हैं। हद तो यह है कि डीएम से लेकर एडी हेल्थ तक को मामलाें की जानकारी है, फिर भी किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है।
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पिछले दिनों महिला अस्पताल में गर्भवती महिला के ऑपरेशन के लिए अवैध वसूली का मामला सामने आया था। महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड को लेकर कमीशनखोरी की शिकायत डीएम तक पहुंची। इससे पहले मेडिकल कॉलेज के एक डाक्टर ने एंबुलेंस में फर्जी मरीज के खेल पकड़ा था। सभी में जांच की बात कही गई, लेकिन कार्रवाई किसी में नहीं। शिकायतकर्ताओं ने बाकायदा शिकायतों के साथ साक्ष्य भी पेश किए, लेकिन जांच के नाम पर मामला लटकाया जाता है। बाद में बिना कार्रवाई के रफादफा कर दिया जाता है।
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केस- 1
डॉक्टर ने नहीं दिया नोटिस का जवाब

जिला महिला अस्पताल की डॉ. वैशाली गुप्ता की शिकायत 24 नवंबर को डीएम से की गई। मरीज मीना व स्वाति नेे बताया कि डाॅ. वैशाली एक खास अल्ट्रासाउंड सेंटर की ही रिपोर्ट मानती हैं। दूसरे सेंटर से अल्ट्रासाउंड कराया तो रिपोर्ट देखने से इन्कार कर भगा दिया। डाॅ. वैशाली का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह खास अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ही जाने की बात मरीज से कहती सुनाई दे रही हैं। मामला एडी हेल्थ तक भी गया। सीएमओ ने नोटिस भी दिया, लेकिन तय समय सीमा में जवाब नहीं मिला और अभी तक कार्रवाई नहीं हुई।
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केस- 2
डाक्टर ने ही पकड़ा एंबुलेंस का फर्जीवाड़ा था
मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने 4 जुलाई को एंबुलेंस में फर्जी मरीज के खेल का फर्जीवाड़ा पकड़ा था। पांच एंबुलेंसकर्मियों ने फर्जी नाम, मोबाइल नंबर और पता दर्ज कर मरीजों को एंबुलेंस से अस्पताल लाना दिखाया था। संबंधित डॉक्टर ने इसकी शिकायत सीएमओ से की थी। सीएमओ ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन अभी तक इस मामले में भी कुछ नहीं हुआ। महज जांच करने की बात कही गई और जांच के नाम पर मामला दबा दिया गया।
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केस- 3
ऑपरेशन के लिए डाक्टर ने लिए थे पांच हजार रुपये

मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. केके भट्ट पर मथनाजप्ती के राकेश कुमार ने आरोप लगाते हुए शिकायत की थी कि 23 अक्तूबर को उनकी गर्भवती पत्नी के ऑपरेशन के नाम पर उनसे पांच हजार रुपये लिए गए। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई तो जांच शुरू हुई। एडी हेल्थ डॉ. पुष्पा पंत ने भी मामले में संज्ञान लिया और कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई। मामले की जांच सीएमओ स्तर पर लंबित है।
केस-4



शिकायत के बाद कार्रवाई का पता नहीं
पूरनपुर के मोहल्ला खानकाह निवासी रूबीना बी पत्नी याकूब ने कस्बे के ही एक माइसा चाइल्ड केयर सेंटर के डॉक्टर पर आरोप लगाया था कि 29 अक्तूबर को वह बच्चे की आंख दिखाने गई थीं। डॉक्टर ने उसके डेढ़ साल के बच्चे की आंख में आई ड्राॅप डाली, जिसके बाद उसे दिखना ही बंद हो गया। पीड़िता ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर मामले की शिकायत की, लेकिन जांच के नाम पर यह मामला भी दबा दिया गया।


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वर्जन

डॉ. वैशाली और डॉ. भट्ट के मामले में नोटिस जारी किया जा चुका है। मेडिकल कालेज के प्राचार्य अवकाश पर थे, जिसकी वजह से जवाब नहीं मिल सके। जवाब मिलते ही मामले में कार्रवाई की जाएगी। एंबुलेंस सहित अन्य मामलों की जांच चल रही है। -डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ
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