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सिर पर खतरा उठाए काम कर रहे मुलाजिम
पीलीभीत, ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jul 2016 11:38 PM IST
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शहर में जर्जर और कंडम भवनों में चल रहे सरकारी विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों में डर का माहौल है। जिला स्तरीय कई विभाग आज भी ऐसे हैं, जिनके अपने कार्यालय भवन नहीं हैं। मजबूरन पुराने जर्जर और कंडम भवनों में इन्हें संचालित किया जा रहा है। इन कार्यालयों में जहां बरसात में दिक्कत होती है, वहीं हर समय हादसे की संभावना बनी रहती है। करीब एक वर्ष पूर्व जिले के भ्रमण के दौरान नोडल अधिकारी परिवहन आयुक्त ने भी जर्जर भवनों में चल रहे कार्यालयों को अपने भवन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन प्रशासन अब तक इन कार्यालयों को सुरक्षित भवन उपलब्ध नहीं कर सका है। ऐसा लगता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है।
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गिरताऊ हालत में होमगार्ड कार्यालय
12 पीबीटीपी 1,2
जिला कमांडेंट होमगार्ड कार्यालय टनकपुर रोड पर जिला पंचायत के कंडम भवन में चल रहा है। अंग्रेजों के समय में बना यह भवन पूरी तरह जर्जर है और बरसात के समय बाहर जैसा पानी अंदर भी बरसता है। दो दिन पहले हुई बारिश से भीगे अभिलेख को कर्मचारी सुखाते हुए मिले। जिला कमांडेंट रमाकांत पाठक खुद इससे काफी दुखी दिखे। बोले-पूरी स्थिति से जिला पंचायत अध्यक्ष व प्रशासन को अवगत करा चुका हूं। भवन की हालत ऐसी है कि सिर्फ बरसात ही नहीं आम दिनों में भी भवन में बैठ कर काम करना काफी जोखिम भरा रहता है।
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दुकानों में चल रहा सूचना विभाग
12 पीबीटीपी 3
गांधी स्टेडियम रोड पर दुकानों में चल रहे सूचना विभाग की हालत भी खस्ता है। हाल ही में हुई बरसात में इस दफ्तर के अभिलेख भी भीग गए। जिन्हें बाहर सुखाया जा रहा था। दफ्तर के बाबुओं ने बताया कि बरसात के दिनों में कार्यालय परिसर तालाब में बदल जाता है। इस बार बरसात में पानी भरने पर सूचना अधिकारी ने अधिकारियों से यहां से हटाने तक की मांग की थी, लेकिन अभी तक उन्हें दूसरा भवन नहीं मिला है।
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कंडम भवन में चकबंदी कार्यालय
12 पीबीटीपी4
जिले का चकबंदी कार्यालय पुराने तहसील भवन में चल रहा है। अंग्रेजों के समय में बना यह तहसील भवन कई वर्ष पूर्व कंडम हो जाने पर तहसील को नये भवन में शिफ्ट कर दिया गया। ऐसे में यदि इस गिरताऊ भवन में कोई घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? इसका जवाब प्रशासन के पास नहीं है।
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छत के बावजूद भीगते हैं एआरटीओ के बाबू
12 पीबीटीपी5
बल्लभनगर में किराए के परिवहन विभाग जिस भवन में चल रहा है, उसकी हालत भी काफी नाजुक है। एआरटीओ कक्ष तो कुछ हद तक ठीक है, लेकिन बाबुओं के बैठने का हाल और रिकार्ड रूम की स्थिति यहां भी काफी खराब है। लिंटर में दरारें पड़ी हैं। जिससे हर समय काम करने वालों को यहां खतरा बना रहता है। हालांकि एआरटीओ कार्यालय बनाने को जमीन मिल चुकी है लेकिन अभी इसके लिए बजट न मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया है।
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विभागों के भवन के लिए उनके मुख्यालय से बजट का आवंटन होता है। जिला स्तर से जमीन उपलब्ध कराई जाती है। एआरटीओ व होमगार्ड भवन के लिए जमीन मिल चुकी है। सूचना विभाग के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है। यदि किसी विभाग को दिक्कत है तो वह इसकी जानकारी दे सकता है। समस्या का समाधान कराया जाएगा।
मासूम अली सरवर, डीएम
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गिरताऊ हालत में होमगार्ड कार्यालय
12 पीबीटीपी 1,2
जिला कमांडेंट होमगार्ड कार्यालय टनकपुर रोड पर जिला पंचायत के कंडम भवन में चल रहा है। अंग्रेजों के समय में बना यह भवन पूरी तरह जर्जर है और बरसात के समय बाहर जैसा पानी अंदर भी बरसता है। दो दिन पहले हुई बारिश से भीगे अभिलेख को कर्मचारी सुखाते हुए मिले। जिला कमांडेंट रमाकांत पाठक खुद इससे काफी दुखी दिखे। बोले-पूरी स्थिति से जिला पंचायत अध्यक्ष व प्रशासन को अवगत करा चुका हूं। भवन की हालत ऐसी है कि सिर्फ बरसात ही नहीं आम दिनों में भी भवन में बैठ कर काम करना काफी जोखिम भरा रहता है।
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दुकानों में चल रहा सूचना विभाग
12 पीबीटीपी 3
गांधी स्टेडियम रोड पर दुकानों में चल रहे सूचना विभाग की हालत भी खस्ता है। हाल ही में हुई बरसात में इस दफ्तर के अभिलेख भी भीग गए। जिन्हें बाहर सुखाया जा रहा था। दफ्तर के बाबुओं ने बताया कि बरसात के दिनों में कार्यालय परिसर तालाब में बदल जाता है। इस बार बरसात में पानी भरने पर सूचना अधिकारी ने अधिकारियों से यहां से हटाने तक की मांग की थी, लेकिन अभी तक उन्हें दूसरा भवन नहीं मिला है।
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कंडम भवन में चकबंदी कार्यालय
12 पीबीटीपी4
जिले का चकबंदी कार्यालय पुराने तहसील भवन में चल रहा है। अंग्रेजों के समय में बना यह तहसील भवन कई वर्ष पूर्व कंडम हो जाने पर तहसील को नये भवन में शिफ्ट कर दिया गया। ऐसे में यदि इस गिरताऊ भवन में कोई घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? इसका जवाब प्रशासन के पास नहीं है।
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छत के बावजूद भीगते हैं एआरटीओ के बाबू
12 पीबीटीपी5
बल्लभनगर में किराए के परिवहन विभाग जिस भवन में चल रहा है, उसकी हालत भी काफी नाजुक है। एआरटीओ कक्ष तो कुछ हद तक ठीक है, लेकिन बाबुओं के बैठने का हाल और रिकार्ड रूम की स्थिति यहां भी काफी खराब है। लिंटर में दरारें पड़ी हैं। जिससे हर समय काम करने वालों को यहां खतरा बना रहता है। हालांकि एआरटीओ कार्यालय बनाने को जमीन मिल चुकी है लेकिन अभी इसके लिए बजट न मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया है।
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विभागों के भवन के लिए उनके मुख्यालय से बजट का आवंटन होता है। जिला स्तर से जमीन उपलब्ध कराई जाती है। एआरटीओ व होमगार्ड भवन के लिए जमीन मिल चुकी है। सूचना विभाग के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है। यदि किसी विभाग को दिक्कत है तो वह इसकी जानकारी दे सकता है। समस्या का समाधान कराया जाएगा।
मासूम अली सरवर, डीएम