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फिर शुरू हो गया हरदोई नहर पर काम
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Sat, 08 Oct 2016 11:32 PM IST
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फिर शुरू हो गया हरदोई नहर पर काम
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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हरदोई ब्रांच नहर पर एक बार फिर सिंचाई विभाग मेहरबान हुआ है। अब साढ़े चार करोड़ से नहर के दोनों किनारों की पटरी को ऊंचा करने के साथ नया रूप दिया जा रहा है। आरोप है कि शुरुआती दौर में ही इसमें घपलेबाजी शुरू हो चुकी है। मिट्टी को बाहर से लाने की जगह नहर के बाहरी हिस्से से ही निकाल कर डाला जा रहा है। मालूम हो कि सिंचाई विभाग इस नहर पर पांच माह में करीब 20 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है।
बाइफरकेशन से निकलने वाली हरदोई ब्रांच नहर से प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। इस नहर पर हाल ही में सिंचाई विभाग की हेडवर्कस खंड ने लगभग दस करोड़ से सिल्ट निकलवाई थी। उस दौरान नहर के दोनों किनारे बनी वर्म (किनारे) को कई स्थानों पर काटकर मशीनों से मिट्टी व रेत को बाहर निकाला गया था। रेत के ढेरों को पानी की धार के किनारे ही लगा दिया गया। यदि पानी छूटा तो रेत के ढेर पुन: पानी में बह गए। इसके तुरंत बाद विभागीय अभियंताओं ने नहर के 13.4 मील के आगे जनपद की सीमा तक छह करोड़ रुपये से काम शुरू कराया। इसमें नहर के दोनों किनारों को मजबूत करने को बांस के खूंटे लगाने के साथ कुछ पुलों के दायें व बायें किनारे पर पत्थर की पिचिंग लगाई। इसमें भी गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया।
इधर यह कहा गया कि 16 करोड़ से नहर के दोनों किनारों को मजबूत कर दिया गया है। अब साढ़े चार करोड़ से नहर के दोनों किनारों की पटरियों को नया रूप दिया जाएगा। इसमें भी कार्य के नाम पर गड़बड़झाला शुरू हो चुका है। जो रेत नहर से निकालकर बाहर डाली गई है, उसको सर्विस मार्ग व पटरियों पर डालने के साथ उसके ऊपरी हिस्से में दिखावे के लिए मशीन से मिट्टी डाली जा रही है। खास बात यह है कि यह काम भी किसी बाहरी ठेकेदार को बिना टेंडर किए दिया गया है। चूंकि यहां बाइफरकेशन के सहायक अभियंता केपी तिवारी को इन्हीं निर्माण कार्यों में कुछ विवाद के चलते लखनऊ अटैच कर दिया गया था। इसलिए अब बनबसा के सहायक अभियंता बलवीर सिंह को शारदा मुख्य नहर समेत बाइफरकेशन की सिंचाई परियोजना व हरदोई ब्रांच का कार्य दिया गया है।
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बाइफरकेशन से निकलने वाली हरदोई ब्रांच नहर से प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। इस नहर पर हाल ही में सिंचाई विभाग की हेडवर्कस खंड ने लगभग दस करोड़ से सिल्ट निकलवाई थी। उस दौरान नहर के दोनों किनारे बनी वर्म (किनारे) को कई स्थानों पर काटकर मशीनों से मिट्टी व रेत को बाहर निकाला गया था। रेत के ढेरों को पानी की धार के किनारे ही लगा दिया गया। यदि पानी छूटा तो रेत के ढेर पुन: पानी में बह गए। इसके तुरंत बाद विभागीय अभियंताओं ने नहर के 13.4 मील के आगे जनपद की सीमा तक छह करोड़ रुपये से काम शुरू कराया। इसमें नहर के दोनों किनारों को मजबूत करने को बांस के खूंटे लगाने के साथ कुछ पुलों के दायें व बायें किनारे पर पत्थर की पिचिंग लगाई। इसमें भी गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया।
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इधर यह कहा गया कि 16 करोड़ से नहर के दोनों किनारों को मजबूत कर दिया गया है। अब साढ़े चार करोड़ से नहर के दोनों किनारों की पटरियों को नया रूप दिया जाएगा। इसमें भी कार्य के नाम पर गड़बड़झाला शुरू हो चुका है। जो रेत नहर से निकालकर बाहर डाली गई है, उसको सर्विस मार्ग व पटरियों पर डालने के साथ उसके ऊपरी हिस्से में दिखावे के लिए मशीन से मिट्टी डाली जा रही है। खास बात यह है कि यह काम भी किसी बाहरी ठेकेदार को बिना टेंडर किए दिया गया है। चूंकि यहां बाइफरकेशन के सहायक अभियंता केपी तिवारी को इन्हीं निर्माण कार्यों में कुछ विवाद के चलते लखनऊ अटैच कर दिया गया था। इसलिए अब बनबसा के सहायक अभियंता बलवीर सिंह को शारदा मुख्य नहर समेत बाइफरकेशन की सिंचाई परियोजना व हरदोई ब्रांच का कार्य दिया गया है।
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