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...जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े
पीलीभीत, ब्यूरो
Updated Sun, 02 Oct 2016 12:07 AM IST
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रामलीला में श्रीराम वनवास लीला का मंचन किया गया। पिता का आज्ञा पाकर प्रभु श्रीराम भाई लक्ष्मण और सीता के साथ 14 वर्ष के वनवास पर जाते हैं। उनके वियोग में राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। देरशाम घन्नई ताल में केवट के प्रभु राम को नाव से नदी पार कराने की लीला का मंचन किया गया।
परमठ मंदिर में चल रही लीला में शनिवार को अयोध्या नगरी में श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी होती है। इस बीच रानी कैकेई मंथरा के बहकावे में आकर राजा दशरथ से तीन वरदान मांग लेती हैं। वरदान के अनुसार श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास होता है। पिता की आज्ञा मिलने पर प्रभु राम वनवास जाने की तैयारी करते हैं लेकिन भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता भी उनके साथ चल देती हैं। परमठ मंदिर के बाद वनवास की लीला घन्नई ताल (एकता सरोवर) पर हुई। यहां श्रीराम केवट से नाव में बैठाकर पार उतारने को कहते हैं लेकिन केवट पहले उनके पैर धोने की जिद करता है। काफी अनुनय विनय के बाद श्रीराम पैर धुलवाने को तैयार हो जाते हैं। इसके बाद केवट श्रीराम, लक्ष्मण और सीता को नदी पार कराते हैं। इसके बाद तीनों चित्रकूट पहुंचते हैं। परमठ मंदिर से घन्नाई ताल पहुंचने के लिए श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के स्वरूप शहर के विभिन्न मार्गों से पैदल गुजरे। उनके स्वागत के लिए परंपरानुसार लोगों ने घर के बाहर दीप जलाए। लीला में महंत ओमकार नाथ, नरेश शुक्ल, सुनील मिश्र, स्वतंत्र देवल, संजय सक्सेना, अमिताभ त्रिपाठी, धीरेंद्र मिश्र, रमाकांत पांडेय, संजीव मिश्र, आकाश राय, सुमित, आकश कश्यप, प्रदीप, अमोध मिश्र आदि मौजूद रहे।
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परमठ मंदिर में चल रही लीला में शनिवार को अयोध्या नगरी में श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी होती है। इस बीच रानी कैकेई मंथरा के बहकावे में आकर राजा दशरथ से तीन वरदान मांग लेती हैं। वरदान के अनुसार श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास होता है। पिता की आज्ञा मिलने पर प्रभु राम वनवास जाने की तैयारी करते हैं लेकिन भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता भी उनके साथ चल देती हैं। परमठ मंदिर के बाद वनवास की लीला घन्नई ताल (एकता सरोवर) पर हुई। यहां श्रीराम केवट से नाव में बैठाकर पार उतारने को कहते हैं लेकिन केवट पहले उनके पैर धोने की जिद करता है। काफी अनुनय विनय के बाद श्रीराम पैर धुलवाने को तैयार हो जाते हैं। इसके बाद केवट श्रीराम, लक्ष्मण और सीता को नदी पार कराते हैं। इसके बाद तीनों चित्रकूट पहुंचते हैं। परमठ मंदिर से घन्नाई ताल पहुंचने के लिए श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के स्वरूप शहर के विभिन्न मार्गों से पैदल गुजरे। उनके स्वागत के लिए परंपरानुसार लोगों ने घर के बाहर दीप जलाए। लीला में महंत ओमकार नाथ, नरेश शुक्ल, सुनील मिश्र, स्वतंत्र देवल, संजय सक्सेना, अमिताभ त्रिपाठी, धीरेंद्र मिश्र, रमाकांत पांडेय, संजीव मिश्र, आकाश राय, सुमित, आकश कश्यप, प्रदीप, अमोध मिश्र आदि मौजूद रहे।
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