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पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र- किसानों की नाराजगी से बढ़ी भाजपा की चुनौती, विपक्षियों को मिला मौका
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पीलीभीत। तीन बार पूरनपुर सीट पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा के सामने इस बार कड़ी चुनौती है। वजह बन रही है किसानों की नाराजगी और अपनों की बगावत। वहीं विपक्षी इसमें अपना मौका तलाश रहे हैं। दो बार सीट पर काबिज रहने वाली सपा ने आरती महेंद्र को उतारकर चुनावी रण में मजबूती से ताल ठोंकी है। कांग्रेस भले ही यहां 37 साल से जीत न सकी हो लेकिन मजबूत दावेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता। भाजपा से टिकट मांगने वाले अशोक राजा बसपा से मैदान में उतरे हैं। इसलिए यहां की लड़ाई और दिलचस्प बन गई है।
पूरनपुर सीट पर हमेशा ही कांटे का मुकाबला रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की, लेकिन उससे पहले सीट सपा की झोली में थी। भाजपा यहां तीन बार तो सपा दो बार जीत दर्ज कर चुकी है। हालांकि 2007 में बसपा के अरशद खां ने जीते थे। 2002 में डॉ. विनोद तिवारी भाजपा के टिकट पर जीते थे। हालांकि 1980 और 19 85 में कांग्रेस की झोली में यह सीट रही। अबकी बार क्या होगा? इसी पर सभी गुणा भाग कर रहे हैं।
बसपा के उम्मीदवार अशोक राजा पहले बीजेपी से टिकट मांग रहे थे। भाजपा के सामने इस बगावत से भी निपटना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। सपा ने इस बार पीतमराम की पुत्रवधु आरती महेंद्र को उतारा है। पीतमराम दिवंगत हो चुके हैं, आरती को जनता की सहानुभूति मिल सकती है। कांग्रेस ने यहां ईश्वर दयाल पासवान को टिकट दिया है। पूरनपुर सीट आरक्षित है। जातीय सकीकरण भी काफी प्रभाव डाल सकते हैं। मुस्लिमों का झुुकाव सपा की तरफ है। अगर किसानों का साथ सपा को मिलता है जैसा कि दावे किए जा रहे हैं तो भाजपा के लिए चुनौती और बढ़ेगी।
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किसानों के मुद्दों का है असर
पूरनपुर क्षेत्र की ज्यादातर आबादी गांवों में रहती है। खेतीबाड़ी या मजदूरी उनके जीवनयापन का साधन है। सिखों की संख्या भी ठीक-ठाक हैं। दिल्ली में हुए किसान आंदोलन में क्षेत्र के किसान काफी सक्रिय रहे थे, मौजूदा सरकार को लेकर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले थे। क्षेत्र में भाकियू की भी मजबूत पकड़ है। पूरनपुर तहसील लखीमपुर सीमा से सटी है। पिछले दिनों हुईं हिंसा में कुछ किसानों की जान चली गई थी। उसका मुद्दा भी पड़ोसी जनपद की वजह से यहां काफी गरम रहा था। घटना का आरोपी गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेेटे आशीष मिश्र को जमानत मिल चुकी है। अब ये सारे फैक्टर इन दिनों पूरनपुर की सियासत को और गरम कर रहे हैं। वहीं क्षेता्र के किसानों कर लगभग हर साल खाद के लिए जूझना पड़ता है। गेहूं की बुआई के वक्त भी किसानों को डीएपी नहीं मिल सकी। जिनको मिली उनको डेढ़ गुनी कीमत चुकानी पड़ी। गन्ना भुगतान और फसलों का पूरा दाम न मिल पाने से भी किसानों में रोष है। चुुनाव में यह भी बड़ा मुद्दा बन रहा है जिसे विपक्षी दल पूरी ताकत से भुनाने में जुटे हैं।
किसान बोले- आधे दामों में फसल बेचो, डेढ़ गुने दामों में खाद खरीदो
पूरनपुर क्षेत्र के केसरपुर गांव के किसान सगीर अहमद कहते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इस बार भी धान बारह सौ में बेचना पड़ा। गेहूं की बुआई के लिए डीएपी नहीं मिल सकी। कोई सुनने वाला नहीं। जादौपुर खुर्द गांव के राम स्वरूप कहते हैं कि धान की फसल आधे दामों में बेची, कर्जा नहीं उतर सका। बैंक में लोन के लिए आवेदन करो तो दस फीसदी कमीशन मांगते हैं। कजरी के किसान विक्की सिंह कहते हैं कि धान सरकारी केंद्र पर दिया था, तीन महीने बाद पैसे मिले। क्षेत्र में खाद की किल्लत हर बार बनी रहती है। यह समस्याएं लगभग पूरनपुर के हर गांव में किसानों के मुंह सुनने को मिल जाएंगी।
मुख्यमंत्री के आने से गरमाएगी क्षेत्र की राजनीति
19 फरवरी को पूरनपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दौरा भी प्रस्तावित है। उनके यहां आने से कार्यकर्ताओं के साथ मतदाताओं में भी जोश भरेगा। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के आने से भाजपा को मजबूती मिलेेगी और सियासी पारा चढ़ेगा।
पूरनपुर सीट पर कब किसका कब्जा रहा
2017- बाबू राम पासवान- भाजपा
2012- पीतम राम - सपा
2007- अरशद खां-बसपा
2002-डॉ. विनोद तिवारी -भाजपा
1996-गोपाल कृष्ण- सपा
1993- विरेंद्र मोहन सिंह- जनता दल
1991-प्रमोद कुमार-भाजपा
1985-विनोद कुमार- कांग्रेस
1980- विनोद कुमार- कांग्रेस
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इस बार यह हैं प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवार
भाजपा- बाबू राम पासवान
सपा- आरती महेंद्र
बसपा- अशोक राजा
कांग्रेस-ईश्वर दयाल पासवान
-------------------------
पिछले विधानसभा में प्रमुख पार्टियों का प्रदर्शन
स्थान- पार्टी- प्रत्याशी- वोट मिले
जीत- भाजपा-बाबू राम पासवान -128386
द्वितीय- सपा- पीतम राम- 89076
तृतीय- बसपा-कमल किशोर अरविंद- 20139
----------
इस बार कुल वोट
पुरुष - महिला - थर्ड जेंडर - कुल
203749 - 179447 - 23 - 383219
पिछले विधान सभा चुनाव में मतदान फीसद: 66.79
-----------------
जातिगत समीकरण-
ब्राह्मण-42000 , क्षत्रिय 18000 , बनिया 8000, लोध किसान 43000 , पासी 35000 , जाटव 27000 , धोवी 7000 , मौर्य 9000 , यादव 8500, कोरी 2000, बाल्मीकि 6000 , कुम्हार 2000, बंजारा 8000, बढ़ई 5000 , मुस्लिम 67000 , सिख 2200 , बंगाली 28000 , धीमर 35000, जायसवाल 3500, राठौर 1500 हजार, अन्य 10,000
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पूरनपुर सीट पर हमेशा ही कांटे का मुकाबला रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की, लेकिन उससे पहले सीट सपा की झोली में थी। भाजपा यहां तीन बार तो सपा दो बार जीत दर्ज कर चुकी है। हालांकि 2007 में बसपा के अरशद खां ने जीते थे। 2002 में डॉ. विनोद तिवारी भाजपा के टिकट पर जीते थे। हालांकि 1980 और 19 85 में कांग्रेस की झोली में यह सीट रही। अबकी बार क्या होगा? इसी पर सभी गुणा भाग कर रहे हैं।
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बसपा के उम्मीदवार अशोक राजा पहले बीजेपी से टिकट मांग रहे थे। भाजपा के सामने इस बगावत से भी निपटना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। सपा ने इस बार पीतमराम की पुत्रवधु आरती महेंद्र को उतारा है। पीतमराम दिवंगत हो चुके हैं, आरती को जनता की सहानुभूति मिल सकती है। कांग्रेस ने यहां ईश्वर दयाल पासवान को टिकट दिया है। पूरनपुर सीट आरक्षित है। जातीय सकीकरण भी काफी प्रभाव डाल सकते हैं। मुस्लिमों का झुुकाव सपा की तरफ है। अगर किसानों का साथ सपा को मिलता है जैसा कि दावे किए जा रहे हैं तो भाजपा के लिए चुनौती और बढ़ेगी।
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किसानों के मुद्दों का है असर
पूरनपुर क्षेत्र की ज्यादातर आबादी गांवों में रहती है। खेतीबाड़ी या मजदूरी उनके जीवनयापन का साधन है। सिखों की संख्या भी ठीक-ठाक हैं। दिल्ली में हुए किसान आंदोलन में क्षेत्र के किसान काफी सक्रिय रहे थे, मौजूदा सरकार को लेकर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले थे। क्षेत्र में भाकियू की भी मजबूत पकड़ है। पूरनपुर तहसील लखीमपुर सीमा से सटी है। पिछले दिनों हुईं हिंसा में कुछ किसानों की जान चली गई थी। उसका मुद्दा भी पड़ोसी जनपद की वजह से यहां काफी गरम रहा था। घटना का आरोपी गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेेटे आशीष मिश्र को जमानत मिल चुकी है। अब ये सारे फैक्टर इन दिनों पूरनपुर की सियासत को और गरम कर रहे हैं। वहीं क्षेता्र के किसानों कर लगभग हर साल खाद के लिए जूझना पड़ता है। गेहूं की बुआई के वक्त भी किसानों को डीएपी नहीं मिल सकी। जिनको मिली उनको डेढ़ गुनी कीमत चुकानी पड़ी। गन्ना भुगतान और फसलों का पूरा दाम न मिल पाने से भी किसानों में रोष है। चुुनाव में यह भी बड़ा मुद्दा बन रहा है जिसे विपक्षी दल पूरी ताकत से भुनाने में जुटे हैं।
किसान बोले- आधे दामों में फसल बेचो, डेढ़ गुने दामों में खाद खरीदो
पूरनपुर क्षेत्र के केसरपुर गांव के किसान सगीर अहमद कहते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इस बार भी धान बारह सौ में बेचना पड़ा। गेहूं की बुआई के लिए डीएपी नहीं मिल सकी। कोई सुनने वाला नहीं। जादौपुर खुर्द गांव के राम स्वरूप कहते हैं कि धान की फसल आधे दामों में बेची, कर्जा नहीं उतर सका। बैंक में लोन के लिए आवेदन करो तो दस फीसदी कमीशन मांगते हैं। कजरी के किसान विक्की सिंह कहते हैं कि धान सरकारी केंद्र पर दिया था, तीन महीने बाद पैसे मिले। क्षेत्र में खाद की किल्लत हर बार बनी रहती है। यह समस्याएं लगभग पूरनपुर के हर गांव में किसानों के मुंह सुनने को मिल जाएंगी।
मुख्यमंत्री के आने से गरमाएगी क्षेत्र की राजनीति
19 फरवरी को पूरनपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दौरा भी प्रस्तावित है। उनके यहां आने से कार्यकर्ताओं के साथ मतदाताओं में भी जोश भरेगा। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के आने से भाजपा को मजबूती मिलेेगी और सियासी पारा चढ़ेगा।
पूरनपुर सीट पर कब किसका कब्जा रहा
2017- बाबू राम पासवान- भाजपा
2012- पीतम राम - सपा
2007- अरशद खां-बसपा
2002-डॉ. विनोद तिवारी -भाजपा
1996-गोपाल कृष्ण- सपा
1993- विरेंद्र मोहन सिंह- जनता दल
1991-प्रमोद कुमार-भाजपा
1985-विनोद कुमार- कांग्रेस
1980- विनोद कुमार- कांग्रेस
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इस बार यह हैं प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवार
भाजपा- बाबू राम पासवान
सपा- आरती महेंद्र
बसपा- अशोक राजा
कांग्रेस-ईश्वर दयाल पासवान
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पिछले विधानसभा में प्रमुख पार्टियों का प्रदर्शन
स्थान- पार्टी- प्रत्याशी- वोट मिले
जीत- भाजपा-बाबू राम पासवान -128386
द्वितीय- सपा- पीतम राम- 89076
तृतीय- बसपा-कमल किशोर अरविंद- 20139
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इस बार कुल वोट
पुरुष - महिला - थर्ड जेंडर - कुल
203749 - 179447 - 23 - 383219
पिछले विधान सभा चुनाव में मतदान फीसद: 66.79
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जातिगत समीकरण-
ब्राह्मण-42000 , क्षत्रिय 18000 , बनिया 8000, लोध किसान 43000 , पासी 35000 , जाटव 27000 , धोवी 7000 , मौर्य 9000 , यादव 8500, कोरी 2000, बाल्मीकि 6000 , कुम्हार 2000, बंजारा 8000, बढ़ई 5000 , मुस्लिम 67000 , सिख 2200 , बंगाली 28000 , धीमर 35000, जायसवाल 3500, राठौर 1500 हजार, अन्य 10,000