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Pilibhit News: दुखी मां का बच्चों को ढांढस, पिता शेर था न...तू भी मेरा शेर है, चुप हो जा
Thu, 05 Jun 2025 01:03 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Thu, 05 Jun 2025 01:03 AM IST
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फखरूल इस्लाम
पीलीभीत। लखविंदर को कुछ दिन पहले ही हंसी-खुशी से घर से विदा किया था, आज उसका हमेशा के लिए शांत चेहरा देखकर सभी रो पड़े। हर आंख नम थी। मासूम की चीखें भी गूंज रहीं थी। गम के पहाड़ को दबाकर मासूम बेटे को रुपिंदर ने ढांढस बंधाया तो आमजन, अधिकारी और नेता अपने आंसुओं को रोक नहीं सके। रुपिंदर ने पुत्र से कहा कि डैड (पिता) शेर था न। तू भी मेरा शेर है, चुप हो जा रोना नहीं मां है। कुछ समय बाद ही बेटा भी मां को बिलखता देख समझाता दिखा।
सिक्किम भूस्खलन में बलिदान हवलदार लखविंदर सिंह की पत्नी रुपिंदर कौर की आंखों का पानी दो दिन से नहीं थमा। बच्चों को संभालने की चुनौती भी साथ थी। दो दिन के इंतजार के बाद बुधवार सुबह 9:50 बजे पार्थिव देह घर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। इस बीच रुपिंदर कौर भी खुद को संभाल न सकीं। रोते-रोत बेसुध हो गई। ढाई माह की बच्ची भी गोद में थी। वहीं, सात साल का पुत्र एकमजोत सिंह भी पिता के शांत चेहरे को देख रोता रहा। मां और बच्चों के लिपटकर रोने का दृश्य देख मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। संवाद
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सैन्य दल ने परिजनों को ढांढस बंधाया, बेटे ने फौजी बनने का किया प्रोमिस
अंतिम संस्कार के बाद रवाना होने से पूर्व सैन्य दल के जवान बलिदान सैनिक के परिवार से मिलने पहुंचे। इस दौरान दल का नेतृत्व करने वाले सैन्य अधिकारी अभिनव त्रिपाठी ने बलिदान हवलदार की पत्नी रुपिंदर कौर समेत परिजनों को ढांढस बंधाया। इस बीच अभिनव त्रिपाठी ने बलिदान सैनिक के सात साल के पुत्र एकमजोत सिंह से कहा, आपको फौजी बनना है। मेरी तरह वर्दी पहननी है। इस पर एकमजोत ने सिर हिलाया। सैन्य अधिकारी ने प्रोमिस करते हुए उसकी ओर हाथ बढ़ाया तो मासूम ने प्रोमिस बोलकर सैन्य अधिकारी से हाथ मिलाया। मासूम के जज्बे को देख सैन्य अधिकारी ने दुलार किया।
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मझारा रास्ता खुले और बलिदान सैनिकों के नाम बने स्टेडियम
बलिदान सैनिक लखविंदर सिंह के परिजनों के अलावा ग्रामीणों का कहना है कि गांव के तीन सैनिक बलिदान हो चुके हैं, लेकिन गांव के रास्तों का हाल बदतर है। लोगों का कहना था कि बलिदान सैनिकों के गांव को जाने वाले मार्ग को बनाया जाए। साथ ही उनकी याद में स्टेडियम का निर्माण किया जाए। इससे क्षेत्र के लोग उनको याद रख सकें। लोगों का कहना है कि इसके लिए डीएम-एसपी के अलावा प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख और केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद को भी पत्राचार भेजकर मांग की जाएगी।
आंसू पोंछकर बोला- एकमजोत..मां अब रोना नहीं
सात साल के मासूम एकमजोत ने अपनी मां रुपिंदर कौर के आंसू पोंछकर कहा कि मां अब रोना नहीं। मासूम कई बार अपनी मां को समझाता दिखा। कभी मां बेटे को चुप करा रही थीं, तो कभी बेटा मां को। यह दृश्य जिसने भी देखा रो पड़ा। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने रुपिंदर से कहा कि बेटा और बेटी की ओर देखिए यही आपका सहारा बनेंगे।
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पीलीभीत। लखविंदर को कुछ दिन पहले ही हंसी-खुशी से घर से विदा किया था, आज उसका हमेशा के लिए शांत चेहरा देखकर सभी रो पड़े। हर आंख नम थी। मासूम की चीखें भी गूंज रहीं थी। गम के पहाड़ को दबाकर मासूम बेटे को रुपिंदर ने ढांढस बंधाया तो आमजन, अधिकारी और नेता अपने आंसुओं को रोक नहीं सके। रुपिंदर ने पुत्र से कहा कि डैड (पिता) शेर था न। तू भी मेरा शेर है, चुप हो जा रोना नहीं मां है। कुछ समय बाद ही बेटा भी मां को बिलखता देख समझाता दिखा।
सिक्किम भूस्खलन में बलिदान हवलदार लखविंदर सिंह की पत्नी रुपिंदर कौर की आंखों का पानी दो दिन से नहीं थमा। बच्चों को संभालने की चुनौती भी साथ थी। दो दिन के इंतजार के बाद बुधवार सुबह 9:50 बजे पार्थिव देह घर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। इस बीच रुपिंदर कौर भी खुद को संभाल न सकीं। रोते-रोत बेसुध हो गई। ढाई माह की बच्ची भी गोद में थी। वहीं, सात साल का पुत्र एकमजोत सिंह भी पिता के शांत चेहरे को देख रोता रहा। मां और बच्चों के लिपटकर रोने का दृश्य देख मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। संवाद
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सैन्य दल ने परिजनों को ढांढस बंधाया, बेटे ने फौजी बनने का किया प्रोमिस
अंतिम संस्कार के बाद रवाना होने से पूर्व सैन्य दल के जवान बलिदान सैनिक के परिवार से मिलने पहुंचे। इस दौरान दल का नेतृत्व करने वाले सैन्य अधिकारी अभिनव त्रिपाठी ने बलिदान हवलदार की पत्नी रुपिंदर कौर समेत परिजनों को ढांढस बंधाया। इस बीच अभिनव त्रिपाठी ने बलिदान सैनिक के सात साल के पुत्र एकमजोत सिंह से कहा, आपको फौजी बनना है। मेरी तरह वर्दी पहननी है। इस पर एकमजोत ने सिर हिलाया। सैन्य अधिकारी ने प्रोमिस करते हुए उसकी ओर हाथ बढ़ाया तो मासूम ने प्रोमिस बोलकर सैन्य अधिकारी से हाथ मिलाया। मासूम के जज्बे को देख सैन्य अधिकारी ने दुलार किया।
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मझारा रास्ता खुले और बलिदान सैनिकों के नाम बने स्टेडियम
बलिदान सैनिक लखविंदर सिंह के परिजनों के अलावा ग्रामीणों का कहना है कि गांव के तीन सैनिक बलिदान हो चुके हैं, लेकिन गांव के रास्तों का हाल बदतर है। लोगों का कहना था कि बलिदान सैनिकों के गांव को जाने वाले मार्ग को बनाया जाए। साथ ही उनकी याद में स्टेडियम का निर्माण किया जाए। इससे क्षेत्र के लोग उनको याद रख सकें। लोगों का कहना है कि इसके लिए डीएम-एसपी के अलावा प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख और केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद को भी पत्राचार भेजकर मांग की जाएगी।
आंसू पोंछकर बोला- एकमजोत..मां अब रोना नहीं
सात साल के मासूम एकमजोत ने अपनी मां रुपिंदर कौर के आंसू पोंछकर कहा कि मां अब रोना नहीं। मासूम कई बार अपनी मां को समझाता दिखा। कभी मां बेटे को चुप करा रही थीं, तो कभी बेटा मां को। यह दृश्य जिसने भी देखा रो पड़ा। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने रुपिंदर से कहा कि बेटा और बेटी की ओर देखिए यही आपका सहारा बनेंगे।