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अभिलेख से गायब कर दिया गया गोमती का पानी
पूरनपुर( पीलीभीत)
Updated Sat, 21 Nov 2015 10:54 PM IST
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गोमती नदी जिले के 33 गांव से होती हुई शाहजहांपुर की ओर निकलती है। लेकिन सरकारी अभिलेख में करीब आधा दर्जन गांव में नदी का कोई वजूद नहीं है। पांच साल पहले ऐसी सूचना सरकार को भेजी गई थी। अब फिर से पुराने रिकार्ड के आधार पर नदी की भूमि चिह्नित की जाएगी।
गोमती नदी की भूमि पर कब्जे को लेकर सरकारी रिकार्ड में खूब छेड़छाड़ की गई है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के आदेश पर गोमती नदी को स्वच्छ करने के लिए दीर्घकालीन योजना बनाई गई थी। राज्य परिषद के पूर्व अध्यक्ष सतीश मिश्र ने इसके लिए आठ जिलों के जिलाधिकारियों को भी आदेश किया था। आदेश के क्रम में तत्कालीन डीएम नवदीप रिनवा ने भी गोमती उद्गम स्थल कर निरीक्षण कर अफसरों को यह बताने को कहा था कि गोमती नदी किन-किन गांवों से निकली है और उसकी स्थिति क्या है? जांच के बाद तहसील क्षेत्र के फुलहर से शुरू हुई गोमती के माधोटांडा, नवदिया धनेष, ककरौआ, लौकाई, उदयकरनपुर, नवदिया सुल्तानपुर, साले नगर, गजरौला जप्ती, घाटमपुर, गरीबपुर बिल्हा, गोपालपुर, शेरपुर मकरंदपुर, चंदुइया, हरीपुर ता. अजीतपुर, इटौरिया ता. अजीतपुर बिल्हा, खरौसा, मनहरिया खुर्द कलां, पिपरिया मझरा, बानगंज, टांडा, सुंदरपुर, रघुनाथपुर ज. सिकराना, पूरनपुर कुर्रैया, नवदिया टोडर, पचपेड़ा खुर्द, बिहारीपुर मु. रंपुरा फकीरे, नवदिया मकसूदापुर, पचपेड़ा प्रहलादपुर, खांडेपुर और मंडनपुर खुर्द समेत 33 गांवों से होते हुए जिले से शाहजहांपुर की सीमा में प्रवेश करना पाया गया था। लेकिन गांव नवदिया टोडर, पचपेड़ा खुर्द, बिहारीपुर, रंपुरा फकीरे, नवदिया मकसूदपुर, पचपेड़ा प्रहलादपुर और खांडेपुर में नदी के मौके पर बहने के बाद भी अभिलेखों में वह दर्ज नहीं पाई गई थी। अफसरों का कहना था कि भूमि किसानों के नाम है। गोमती की भूमि किसानों के नाम कैसे आई? तब इसकी जांच की बात भी कही गई थी। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। एक बार फिर इसकी अविरल धारा को लखनऊ तक पहुंचाने की कवायद राज्य सरकार ने शुरू की है। कबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव दो दिन पहले यहां पहुंच कर विधिवत इसकी घोषणा भी कर चुके हैं, लेकिन पूर्व में आई समस्याओं के निराकरण की दिशा में अभी तक कोई प्रसाय शुरू नहीं किए गए। जिससे इस प्रयास के भी समय रहते पूरा होने के आसार क्षीण ही नजर आ रहे हैं।
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