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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Getting data in paddy procurement

आंकड़ों में हो रही है धान की खरीद

Mon, 07 Nov 2016 11:36 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Mon, 07 Nov 2016 11:36 PM IST
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किसानों के पास से धान लगभग समाप्त हो चुका है और मंडी में आवक भी काफी कम हो गई है, सरकारी क्रय केंद्र भी सूने पड़े हैं इसके विपरीत सरकारी खरीद के आंकड़े जादुई तरीके से बढ़ रहे हैं। धान खरीद के पहले माह यानि अक्तूबर में मात्र 15 हजार मीट्रिक टन धान खरीदा जा सका था वहीं नवंबर माह के छह दिनों में आंकड़ा एकाएक बढ़कर 39 हजार पहुंच गया।
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धान की खेती से इसे करने वालों से ज्यादा इसकी फसल खरीदने वालों के लिए फायदेमंद होती जा रही है। किसानों को लागत लगाने और मेहनत करने के बाद भी जितनी बचत नहीं होती उतना मुनाफा इससे जुड़े लोग कागजों में आंकड़ों को इधर से उधर कर कमा लेते हैं। यही कारण है कि धान खरीद का सीजन इससे जुड़े अधिकारी, कर्मचारी एवं व्यापारियों के लिए वरदान से कम नहीं होता। जब तक किसानों के पास धान की फसल थी तब तक तमाम बहाने बनाकर धान की सरकारी खरीद नहीं हुई। मजबूरी में किसानों को अपना धान आढ़तियों एवं बिचौलियों के माध्यम से व्यापारियों को कम दामों पर बेचना पड़ा। खरीदे गए धान के स्टाक राइस मिलों में लगे हुए हैं। अब जब किसान के पास धान लगभग समाप्त हो गया और कुछ बड़े किसानों पर ही धान शेष हैं तो सरकारी खरीद दर्शायी जा रही है। 
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मिल के स्टाक से चढ़ रही क्रय केंद्रों पर खरीद
दरअसल क्रय केंद्र निर्धारित होने के बाद धान सप्लाई को मिलों से एग्रीमेंट किया जाता है। मिलों का निर्धारण होने के बाद ही असली खेल शुरू होता है। मिलर्स के स्टाक में पहले से खरीदे गए धान को संबंधित क्रय केंद्र से खरीदना दर्शाया जाता है और अपने चेहते एवं फर्जी जोतवाही एवं छदम किसानों के नाम से खुले बैंक खातों में धनराशि भेज दी जाती है।
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शाम को होती है खरीद की फीडिंग
धान खरीद ऑनलाइन करने के आदेश शासन ने दिए थे लेकिन कंप्यूटर, लैपटॉप और कनेक्टिविटी न होने का बहाना बनाकर शाम को एक साथ पूरे दिन की फीडिंग की जा रही है। खरीद की आंकड़े बाजी में शाम की फीडिंग भी मददगार साबित हो रही है।

 
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