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पृथ्वीपुर गोशाला का हाल देखा बीडीओ ने तो सामने आ गई असलियत
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पीलीभीत/बरखेड़ा। पृथ्वीपुर गोशाला के निर्माण में खामियां उजागर होने के बाद प्रशासन उस पर संजीदा हो गया है। डीएम के निर्देश मिलने के बाद खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने मौके पर जाकर गोशाला की बदहाली देखी और निर्माण कार्यों की पड़ताल की। वहां अन्य जरूरतों की लिस्ट तैयार करके डीएम को रिपोर्ट भेज दी है। साथ ही बजट ठिकाने लगाने के मामले में तीन सदस्यीय टीम गठित करके रिपोर्ट मांगी है।
बरखेड़ा ब्लॉक के पृथ्वीपुर गांव में 11.20 लाख से गोशाला का निर्माण कराया गया है। 30 पशुओं की क्षमता वाली इस गोशाला में इतने बजट से मात्र एक टिनशेड और भूसा-चारा रखने की कोठरी ही बनी है। जरा से निर्माण में पूरा बजट खपाकर गोलमाल किया गया। जब मामला खुला तो अनियमितताओं पर परदा डालने के लिए मनरेगा के बजट से तार फेंसिंग कराई गई, वह भी आधी-अधूरी। गोवंशीय पशुओं की सुरक्षा पर भी ध्यान नहीं दिया गया था। अमर उजाला ने 14 अगस्त के अंक में यहां के हालात के बारे में बताया था। पृथ्वीपुर समेत अन्य जगह बनी गोशालाओं की बदहाली की तस्वीर सामने आने के बाद डीएम पुलकित खरे ने पिछले दिनों जांच के आदेश किए थे। दो दिन पहले इसी मुद्दे पर बैठक भी की थी।
डीएम की सख्ती दिखाए जाने के बाद बरखेड़ा के बीडीओ सुनील कुमार जायसवाल ने मंगलवार को गोशाला पहुंचकर निरीक्षण किया। बीडीओ को गोशाला में कराया गया काम संतोषजनक नहीं मिला। उन्होंने तीन सदस्यीय टीम बनाते हुए उसे मौके जाकर निरीक्षण करने को कहा और तीन दिन में विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इस टीम में मनरेगा के तकनीकी सहायक राधेश्याम शर्मा, जेई आरईएस वेद प्रकाश त्रिपाठी और एडीओ जमालुद्दीन हैं। टीम बुधवार को गोशाला पहुंची और निर्माण कार्यों के बारे में जानकारी जुटाई। निर्माण पर किए गए खर्च की सत्यता जानने के लिए उसकी पत्रावली भी तलब की गई।
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बीडीओ ने बताया कि कई काम अब भी गोशाला में होने बाकी हैं। गोशाला जाने का रास्ता खराब है। उस पर खड़ंजा बिछाया जाना है। गोशाला का मुख्य गेट काफी नीचे लगा है। गोशाला परिसर समतल भी नहीं किया गया। गोशाला के तीनों तरफ पानी के निकास के लिए नाली का निर्माण नहीं किया गया है। टिनशेड के चारों तरफ खड़ंजा नहीं बिछाया गया। बिजली या फिर सोलर पैनल की भी व्यवस्था नहीं है। पशुओं के पानी पीने के लिए हौदी नई बनवानी होगी। चारा काटने की मशीन और इलाज से जुड़े कुछ निर्माण अभी बाकी हैं। इसके लिए डीएम को पत्र लिखा गया है।
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बरखेड़ा ब्लॉक के पृथ्वीपुर गांव में 11.20 लाख से गोशाला का निर्माण कराया गया है। 30 पशुओं की क्षमता वाली इस गोशाला में इतने बजट से मात्र एक टिनशेड और भूसा-चारा रखने की कोठरी ही बनी है। जरा से निर्माण में पूरा बजट खपाकर गोलमाल किया गया। जब मामला खुला तो अनियमितताओं पर परदा डालने के लिए मनरेगा के बजट से तार फेंसिंग कराई गई, वह भी आधी-अधूरी। गोवंशीय पशुओं की सुरक्षा पर भी ध्यान नहीं दिया गया था। अमर उजाला ने 14 अगस्त के अंक में यहां के हालात के बारे में बताया था। पृथ्वीपुर समेत अन्य जगह बनी गोशालाओं की बदहाली की तस्वीर सामने आने के बाद डीएम पुलकित खरे ने पिछले दिनों जांच के आदेश किए थे। दो दिन पहले इसी मुद्दे पर बैठक भी की थी।
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डीएम की सख्ती दिखाए जाने के बाद बरखेड़ा के बीडीओ सुनील कुमार जायसवाल ने मंगलवार को गोशाला पहुंचकर निरीक्षण किया। बीडीओ को गोशाला में कराया गया काम संतोषजनक नहीं मिला। उन्होंने तीन सदस्यीय टीम बनाते हुए उसे मौके जाकर निरीक्षण करने को कहा और तीन दिन में विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इस टीम में मनरेगा के तकनीकी सहायक राधेश्याम शर्मा, जेई आरईएस वेद प्रकाश त्रिपाठी और एडीओ जमालुद्दीन हैं। टीम बुधवार को गोशाला पहुंची और निर्माण कार्यों के बारे में जानकारी जुटाई। निर्माण पर किए गए खर्च की सत्यता जानने के लिए उसकी पत्रावली भी तलब की गई।
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बीडीओ ने बताया कि कई काम अब भी गोशाला में होने बाकी हैं। गोशाला जाने का रास्ता खराब है। उस पर खड़ंजा बिछाया जाना है। गोशाला का मुख्य गेट काफी नीचे लगा है। गोशाला परिसर समतल भी नहीं किया गया। गोशाला के तीनों तरफ पानी के निकास के लिए नाली का निर्माण नहीं किया गया है। टिनशेड के चारों तरफ खड़ंजा नहीं बिछाया गया। बिजली या फिर सोलर पैनल की भी व्यवस्था नहीं है। पशुओं के पानी पीने के लिए हौदी नई बनवानी होगी। चारा काटने की मशीन और इलाज से जुड़े कुछ निर्माण अभी बाकी हैं। इसके लिए डीएम को पत्र लिखा गया है।