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एक्सईएन पीडब्ल्यूडी ने शुरू की नूरपुर गोशाला में निर्माण की गुणवत्ता की जांच
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पीलीभीत। गोशालाओं के निर्माण कार्य में भारी गड़बड़ी सामने आने के बाद डीएम वैभव श्रीवास्तव ने इस पर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। डीएम की ओर से इस मामले में पीडब्ल्यूडी एक्सईएन को जांच के आदेश दिए गए। यह आदेश मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन (प्रांतीय खंड) हरस्वरूप सिंह ने नूरपुर गोशाला पहुंचकर मौके की स्थिति देखी। उन्होंने प्रधान से भी गोशाला निर्माण की गुणवत्ता के बारे में जानकारी जुटाई। एक्सईएन ने गोशाला निर्माण के काम की गुणवत्ता पता लगाने के लिए ललौरीखेड़ा ब्लॉक के अधिकारियों से एस्टीमेट की मेजरमेंट बुक मांगी है।
गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के लिए जनपद में करोड़ों रुपये खर्च कर 29 से ज्यादा गोशालाओं का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। तमाम गोशालाएं बनकर तैयार भी हो चुकी हैं। छिटपुट काम कराने के बाद इन्हें शुरू कर दिया जाएगा। मगर, इनके निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे तो डीएम ने जांच पीडब्ल्यूडी को सौंप दी। ललौरीखेड़ा ब्लॉक के नूरपुर गांव में भी गोशाला का निर्माण 1.20 करोड़ रुपये से कराया गया है। मगर यहां पर खर्च के मुताबिक काम आधा भी नहीं हो पाया। अन्य गोशालाओं के निर्माण का हाल भी बदतर हालत में है।
अमर उजाला ने गोशालाओं के निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री और गोवंशीय पशुओं की देखरेख और लगातार होने वाली मौतों को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए। इनका संज्ञान लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और सांसद वरुण गांधी ने डीएम से बात की थी। इसके अलावा सांसद वरुण गांधी की टीम ने भी डीएम से मुलाकात कर जांच की मांग की थी। डीएम ने गोशालाओं से जुड़े मामले में पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन हरस्वरुप सिंह को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। बृहस्पतिवार को एक्सईएन ने जांच की शुरूआत कर दी। एक्सईएन ने बताया कि वह नूरपुर में गोशाला देखने गए थे। पहले दिन सिर्फ गोशाला की जगह की लंबाई-चौड़ाई देखी गई। ब्लॉक के अधिकारियों से गोशाला निर्माण के एस्टीमेट की मेजरमेंट बुक मांगी गई है। मेजरमेंट बुक मिलने के बाद ही जांच में गति आएगी क्योंकि इसमें ही भवन निर्माण संबंधी खर्च और कराए गए कार्यों का पूरा ब्योरा होता है।
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गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के लिए जनपद में करोड़ों रुपये खर्च कर 29 से ज्यादा गोशालाओं का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। तमाम गोशालाएं बनकर तैयार भी हो चुकी हैं। छिटपुट काम कराने के बाद इन्हें शुरू कर दिया जाएगा। मगर, इनके निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे तो डीएम ने जांच पीडब्ल्यूडी को सौंप दी। ललौरीखेड़ा ब्लॉक के नूरपुर गांव में भी गोशाला का निर्माण 1.20 करोड़ रुपये से कराया गया है। मगर यहां पर खर्च के मुताबिक काम आधा भी नहीं हो पाया। अन्य गोशालाओं के निर्माण का हाल भी बदतर हालत में है।
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अमर उजाला ने गोशालाओं के निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री और गोवंशीय पशुओं की देखरेख और लगातार होने वाली मौतों को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए। इनका संज्ञान लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और सांसद वरुण गांधी ने डीएम से बात की थी। इसके अलावा सांसद वरुण गांधी की टीम ने भी डीएम से मुलाकात कर जांच की मांग की थी। डीएम ने गोशालाओं से जुड़े मामले में पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन हरस्वरुप सिंह को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। बृहस्पतिवार को एक्सईएन ने जांच की शुरूआत कर दी। एक्सईएन ने बताया कि वह नूरपुर में गोशाला देखने गए थे। पहले दिन सिर्फ गोशाला की जगह की लंबाई-चौड़ाई देखी गई। ब्लॉक के अधिकारियों से गोशाला निर्माण के एस्टीमेट की मेजरमेंट बुक मांगी गई है। मेजरमेंट बुक मिलने के बाद ही जांच में गति आएगी क्योंकि इसमें ही भवन निर्माण संबंधी खर्च और कराए गए कार्यों का पूरा ब्योरा होता है।
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