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दो साल से चल रहा है नहर मरम्मत के नाम पर खेल
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Thu, 23 Mar 2017 11:06 PM IST
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दो साल से चल रहा है नहर मरम्मत के नाम पर खेल
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ब्रिटिश काल में बनी नहरों पर सिंचाई विभाग के अफसर मरम्मत के नाम पर दो साल से करोड़ों रुपये का खेल कर नहरों को मजबूती देने के बजाय और कमजोर करने में जुटे रहे। पहले सिल्ट सफाई व किनारों को मजबूत करने के नाम पर खूंटा बल्ली लगाने का खेल खेला गया। बाद में हरदोई नहर पर डौला बनाने के नाम पर निकाली गई सिल्ट से ही डौले बना दिए गए जबकि ब्रिटिशकाल में सिंचाई की किल्लत के चलते पानी का रोस्टर बनाया था। अब अभियंता मोबाइल फोन से नहरों में पानी कम या ज्यादा करने का निर्देश देने के साथ फर्जी रोस्टर भरवाने में जुटे हैं। सिंचाई विभाग की शारदा मुख्य नहर जिसे ब्रिटिशकाल में शारदा बैराज से निकाला था और उसकी टेल को जनपद के बाइफरकेशन में डालकर यहां से हरदोई ब्रांच, लखीमपुर खीरी ब्रांच व शारदा सागर डैम को भरने के लिए नहरों को निकाला था। वर्तमान में इन नहरों से ही लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली तक लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई की जा रही है। पूर्व में नहरों के हेड पर सिंचाई कर्मी इस बात के लिए तैनात रहते थे कि किसी भी नहर में पानी रोस्टर से अधिक या कम पास न हो सके। इसके लिए नहरों पर लगे गेज से आकलन किया जाता था।
बाईपास चैनल की मरम्मत के नाम पर होती रही बंदरबांट
पिछले वर्षों में सिंचाई विभाग के अफसरों का यह हाल रहा कि बाईपास चैनल की खुदाई करने को उन्होंने 25 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर धन स्वीकृत कराया। यह प्रोजेक्ट साढ़े चार हजार क्यूसेक पानी देने को बनाया गया। जब शारदा मुख्य नहर फटी थी तो बाइपास चैनल से ही साढ़े छह हजार क्यूसेक पानी पीलीभीत की नहरों को दिया गया। बताते हैं कि 25 करोड़ का प्रोजेक्ट मात्र बजट को ठिकाने लगाने के लिए ही स्वीकृत कराया गया था। इधर एक बार पुन: बाईपास चैनल को मजबूती देने को फिर छह करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर कराया गया हैं।
नहरों को मजबूती देने के नाम पर भी खेल
यही हाल हरदोई ब्रांच नहर व सबसीडरी हरदोई ब्रांच का हैं। पहले नहर की सिल्ट निकालने के नाम पर दस करोड़ से अधिक रकम ठिकाने लगाई गई। नहर के दोनों किनारों को मजबूत करने के नाम पर कई करोड़ रुपये खूंटा बल्ली लगाने के नाम पर खर्च कर दिए गए। वही नहर का डौला बनाने व सबसीडरी हरदोई ब्रांच का सर्विस मार्ग बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये स्वीकृत कराकर रेत से डौले बना दिए गए। जब एक सहायक अभियंता ने ठेकेदार के भुगतान में रोड़ा अटकाने की कोशिश की तो सत्ता की हनक के चलते दूसरे सहायक अभियंता को मुजफ्फरनगर नगर में स्थाई चार्ज के बावजूद बाइफरकेशन में अतिरिक्त चार्ज के आदेश करा दिए। उन्हें डर था कि यदि सत्ता बदली तो भुगतान न अटक जाए।
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इस तरह से ब्रिटिशकाल की बनी मजबूत नहरों को करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत कराकर उसके ठिकाने लगाने के बावजूद अभियंता कमजोर करने में जुटे हैं। हालांकि प्रदेश में अब सत्ता परिवर्तन के बाद यहां सिंचाई महकमे में खलबली मची हुई है। इधर इस मामले में बाइफरकेशन में अतिरिक्त चार्ज लिए सहायक अभियंता बलवीर सिंह यादव से बात करने पर उन्होंने बताया कि अब उनके पास बाइफरकेशन का चार्ज नहीं है। चार्ज का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए नहर में डौले बनाने व मरम्मत के बारे में वे कुछ नहीं कह सकते, लेकिन काम दुरुस्त न होने तक ठेकेदार का भुगतान करने को साफ मना कर दिया गया।
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बाईपास चैनल की मरम्मत के नाम पर होती रही बंदरबांट
पिछले वर्षों में सिंचाई विभाग के अफसरों का यह हाल रहा कि बाईपास चैनल की खुदाई करने को उन्होंने 25 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर धन स्वीकृत कराया। यह प्रोजेक्ट साढ़े चार हजार क्यूसेक पानी देने को बनाया गया। जब शारदा मुख्य नहर फटी थी तो बाइपास चैनल से ही साढ़े छह हजार क्यूसेक पानी पीलीभीत की नहरों को दिया गया। बताते हैं कि 25 करोड़ का प्रोजेक्ट मात्र बजट को ठिकाने लगाने के लिए ही स्वीकृत कराया गया था। इधर एक बार पुन: बाईपास चैनल को मजबूती देने को फिर छह करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर कराया गया हैं।
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नहरों को मजबूती देने के नाम पर भी खेल
यही हाल हरदोई ब्रांच नहर व सबसीडरी हरदोई ब्रांच का हैं। पहले नहर की सिल्ट निकालने के नाम पर दस करोड़ से अधिक रकम ठिकाने लगाई गई। नहर के दोनों किनारों को मजबूत करने के नाम पर कई करोड़ रुपये खूंटा बल्ली लगाने के नाम पर खर्च कर दिए गए। वही नहर का डौला बनाने व सबसीडरी हरदोई ब्रांच का सर्विस मार्ग बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये स्वीकृत कराकर रेत से डौले बना दिए गए। जब एक सहायक अभियंता ने ठेकेदार के भुगतान में रोड़ा अटकाने की कोशिश की तो सत्ता की हनक के चलते दूसरे सहायक अभियंता को मुजफ्फरनगर नगर में स्थाई चार्ज के बावजूद बाइफरकेशन में अतिरिक्त चार्ज के आदेश करा दिए। उन्हें डर था कि यदि सत्ता बदली तो भुगतान न अटक जाए।
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इस तरह से ब्रिटिशकाल की बनी मजबूत नहरों को करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत कराकर उसके ठिकाने लगाने के बावजूद अभियंता कमजोर करने में जुटे हैं। हालांकि प्रदेश में अब सत्ता परिवर्तन के बाद यहां सिंचाई महकमे में खलबली मची हुई है। इधर इस मामले में बाइफरकेशन में अतिरिक्त चार्ज लिए सहायक अभियंता बलवीर सिंह यादव से बात करने पर उन्होंने बताया कि अब उनके पास बाइफरकेशन का चार्ज नहीं है। चार्ज का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए नहर में डौले बनाने व मरम्मत के बारे में वे कुछ नहीं कह सकते, लेकिन काम दुरुस्त न होने तक ठेकेदार का भुगतान करने को साफ मना कर दिया गया।