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फ्यूजेरियम फफूंद निगल रहा शीशम की हरियाली
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Tue, 31 Jan 2017 10:32 PM IST
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फ्यूजेरियम फफूंद निगल रहा शीशम की हरियाली
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टाइगर रिजर्व के लग्गा भग्गा सहित पूरे क्षेत्र में तेजी से शीशम के पेड़ों के सूखने के कारणों का वन अनुसंधान केंद्र (एफआरआई) देहरादून ने पता लगा लिया है। अनुसंधान केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक शीशम में फ्यूजेरियम सोलेनाई नामक फफूंद लगा है। इसका असर पीलीभीत के साथ प्रदेश के कई हिस्से में भी तेजी से फैल रहा है।
जिले के 72 हजार हेक्टेअर में फैले विशाल जंगल में साल और सागौन के अलावा बड़ी संख्या में शीशम के पेड़ हैं। साथ ही जंगल के बाहर निजी जमीन पर भी शीशम के पेड़ खड़े हैं। मगर पिछले करीब डेढ़ साल से शीशम के ये पेड़ तेजी से सूख रहे हैं। इनमें बराही रेंज के लग्गा भग्गा, गोरख डिब्बी, ढकिया महाराजपुर, रमनगरा एवं गुन्हान क्षेत्र में भी काफी पेड़ सूख रहे हैं। प्रारंभ में इसे किसी साजिश के तहत सुखाना माना जा रहा था। इस पर विभाग ने जांच कराने के लिए एफआरआई को लिखा था। पिछले दिनों देहरादून की टीम ने टाइगर रिजर्व सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में शीशम के सूख रहे पेड़ों की जांच शुरू की। पेड़ों की जांच के बाद एफआरआई ने इसकी रिपोर्ट वन विभाग को भेजी है। इसके अनुसार शीशम के पेड़ फ्यूजेरियम सोलेनाई नामक फफूंद के कारण सूख रहे हैं।
जड़ों पर हो रहा फफूंद का असर
एफआरआई की रिपोर्ट के अनुसार फ्यूजेरियम सोलेनाई फफूंद शीशम की जड़ों के बैस्कुलर बंडल को प्रभावित करता है। इससे पेड़ों में जल संचयन प्रक्रिया प्रभावित होती है। साथ ही क्लोरोफिल बनाने में सहायक पोषक तत्व मैग्नीशियम भी नष्ट हो जाता है। क्लोरोफिल न बनने से पेड़ों का भोजन अवरुद्ध हो जाता है, जिसके परिणाम स्वरूप पेड़ सूखने लगते हैं।
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संभव नहीं है कोई बचाव
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस ढाका के अनुसार फ्यूजेरियम सोलेनाई फफूंद का असर होने पर बचाव मुश्किल है। फिर भी कार्बांडजिम का घोल बनाकर जड़ों में डालने से लाभ हो सकता है, लेकिन जंगल में ऐसा कर पाना संभव नहीं है।
शीशम के वृक्ष फंफूद के कारण सूखने की समस्या टाइगर रिजर्व के जंगलों की ही नहीं है, बल्कि प्रदेश के तराई क्षेत्र एवं देश की सीमा से सटे नेपाल व पाकिस्तान में भी इसका असर पाया गया है।
डीपी सिंह, एसडीओ, टाइगर रिजर्व
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जिले के 72 हजार हेक्टेअर में फैले विशाल जंगल में साल और सागौन के अलावा बड़ी संख्या में शीशम के पेड़ हैं। साथ ही जंगल के बाहर निजी जमीन पर भी शीशम के पेड़ खड़े हैं। मगर पिछले करीब डेढ़ साल से शीशम के ये पेड़ तेजी से सूख रहे हैं। इनमें बराही रेंज के लग्गा भग्गा, गोरख डिब्बी, ढकिया महाराजपुर, रमनगरा एवं गुन्हान क्षेत्र में भी काफी पेड़ सूख रहे हैं। प्रारंभ में इसे किसी साजिश के तहत सुखाना माना जा रहा था। इस पर विभाग ने जांच कराने के लिए एफआरआई को लिखा था। पिछले दिनों देहरादून की टीम ने टाइगर रिजर्व सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में शीशम के सूख रहे पेड़ों की जांच शुरू की। पेड़ों की जांच के बाद एफआरआई ने इसकी रिपोर्ट वन विभाग को भेजी है। इसके अनुसार शीशम के पेड़ फ्यूजेरियम सोलेनाई नामक फफूंद के कारण सूख रहे हैं।
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जड़ों पर हो रहा फफूंद का असर
एफआरआई की रिपोर्ट के अनुसार फ्यूजेरियम सोलेनाई फफूंद शीशम की जड़ों के बैस्कुलर बंडल को प्रभावित करता है। इससे पेड़ों में जल संचयन प्रक्रिया प्रभावित होती है। साथ ही क्लोरोफिल बनाने में सहायक पोषक तत्व मैग्नीशियम भी नष्ट हो जाता है। क्लोरोफिल न बनने से पेड़ों का भोजन अवरुद्ध हो जाता है, जिसके परिणाम स्वरूप पेड़ सूखने लगते हैं।
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संभव नहीं है कोई बचाव
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस ढाका के अनुसार फ्यूजेरियम सोलेनाई फफूंद का असर होने पर बचाव मुश्किल है। फिर भी कार्बांडजिम का घोल बनाकर जड़ों में डालने से लाभ हो सकता है, लेकिन जंगल में ऐसा कर पाना संभव नहीं है।
शीशम के वृक्ष फंफूद के कारण सूखने की समस्या टाइगर रिजर्व के जंगलों की ही नहीं है, बल्कि प्रदेश के तराई क्षेत्र एवं देश की सीमा से सटे नेपाल व पाकिस्तान में भी इसका असर पाया गया है।
डीपी सिंह, एसडीओ, टाइगर रिजर्व