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आजादी के मतवाले: कोई बनाता था बम, तो कोई कड़े पहरे के बीच बांटता था डाक
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पीलीभीत। बीसलपुर तहसील का खांडेपुर बरेली मंडल का एकमात्र पहला ऐसा गांव है, जहां के 23 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने आजादी की लड़ाई में शामिल होकर अंग्रेजी हुकूमत के छक्के छुड़ा दिए थे। गांव में वह चबूतरा भी है, जहां बड़े-बड़े क्रांतिकारी सभा कर चुके हैं। देश को आजादी दिलाने के लिए इस गांव के क्रांतिकारियों ने बम बनाने से लेकर डाक बांटने तक का काम किया। अंग्रेजी हुकूमत द्वारा पकड़े जाने पर तमाम यातनाओं को झेला। उनके नाखूनों में कीलें भी ठोंकीं, मगर अंग्रेजों का जुल्म आजादी के मतवालों को अपने रास्ते से डिगा नहीं सका।
देवहा नदी की तलहटी में बसे करीब छह हजार की आबादी वाले बीसलपुर क्षेत्र के गांव खांडेपुर को बरेली मंडल में सर्वाधिक 23 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जन्म देने का गौरव प्राप्त है। भारत माता के यह वीर क्रांतिकारी इस गांव की मिट्टी में खेलकूद कर बड़े हुए। तब देश को आजाद कराने का आंदोलन चरम पर चल रहा था। उस आंदोलन में गांव के 23 क्रांतिकारी संकल्प लेकर जंग ए आजादी में कूद पड़े थे। कोई क्रांतिकारी बम बनाता था तो कोई देशवासियों को संदेश देने के लिए डाक बांटता था। ये सभी 23 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देश की आजादी का सपना पूरा कर इस दुनिया से विदा हो गए। मगर इन वीर सपूतों का एक अदद स्मारक भी इस गांव में नहीं बन सका। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाशय रामस्वरूप के पौत्र शरदपाल ने बताया कि उनके दादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संघ के मंडल कमांडर थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। खांडेपुर आजादी के दीवानों का गढ़ रहा है। उन दिनों इस गांव के लोगों ने अंग्रेजी फौज से निपटने के लिए अलीगढ़ और गोरखपुर के जानकारों से बम बनाना सीखा था। बेहद सख्त पहरे के बावजूद डाक बांटना यहां के लोगों के लिए आसान सा काम था। हालांकि पकड़े जाने पर उन्हें अंग्रेज सरकार की अमानवीय यातनाओं भी गुजरना पड़ा, मगर क्रांतिकारी अंग्रेजों से कभी डरे नहीं।
गांधी चबूतरे पर बनती थी रणनीति
गांव के बुजुर्गों के मुताबिक आजादी की लड़ाई के दौरान गांव में बने गांधी चबूतरे पर बैठकर पूरे मंडल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अंग्रेज सरकार के खिलाफ लड़ाई की रणनीति बनाते थे। उसके बाद उसी पर काम किया जाता था। जंग ए आजादी को लेकर वर्ष 1942 में यहां एक बैठक हुई थी। इसमें महात्मा गांधी, भगत सिंह, विजय लक्ष्मी पंडित, ठाकुर रोशन सिंह, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल सरीखे कई बड़े क्रांतिकारी इसमें शामिल हुए थे। क्रांतिकारियों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई थी। बैठक में शामिल होने के बाद क्रांतिकारी तो चले गए, मगर भनक लगते ही अंग्रेज सैनिकों ने यहां आकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर जमकर लाठियां बरसाईं और मौके पर मिले गांव वालों को गिरफ्तार सबको अलग-अलग जेलों में ठूंस दिया गया।
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अब तक नहीं बन सका स्मारक
वर्ष 1997 में भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गांव खांडेपुर में आए थे। उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर गांव स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का स्मारक बनवाने की घोषणा की। यह घोषणा आज तक पूरी नहीं हो पाई।
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देवहा नदी की तलहटी में बसे करीब छह हजार की आबादी वाले बीसलपुर क्षेत्र के गांव खांडेपुर को बरेली मंडल में सर्वाधिक 23 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जन्म देने का गौरव प्राप्त है। भारत माता के यह वीर क्रांतिकारी इस गांव की मिट्टी में खेलकूद कर बड़े हुए। तब देश को आजाद कराने का आंदोलन चरम पर चल रहा था। उस आंदोलन में गांव के 23 क्रांतिकारी संकल्प लेकर जंग ए आजादी में कूद पड़े थे। कोई क्रांतिकारी बम बनाता था तो कोई देशवासियों को संदेश देने के लिए डाक बांटता था। ये सभी 23 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देश की आजादी का सपना पूरा कर इस दुनिया से विदा हो गए। मगर इन वीर सपूतों का एक अदद स्मारक भी इस गांव में नहीं बन सका। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाशय रामस्वरूप के पौत्र शरदपाल ने बताया कि उनके दादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संघ के मंडल कमांडर थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। खांडेपुर आजादी के दीवानों का गढ़ रहा है। उन दिनों इस गांव के लोगों ने अंग्रेजी फौज से निपटने के लिए अलीगढ़ और गोरखपुर के जानकारों से बम बनाना सीखा था। बेहद सख्त पहरे के बावजूद डाक बांटना यहां के लोगों के लिए आसान सा काम था। हालांकि पकड़े जाने पर उन्हें अंग्रेज सरकार की अमानवीय यातनाओं भी गुजरना पड़ा, मगर क्रांतिकारी अंग्रेजों से कभी डरे नहीं।
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गांधी चबूतरे पर बनती थी रणनीति
गांव के बुजुर्गों के मुताबिक आजादी की लड़ाई के दौरान गांव में बने गांधी चबूतरे पर बैठकर पूरे मंडल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अंग्रेज सरकार के खिलाफ लड़ाई की रणनीति बनाते थे। उसके बाद उसी पर काम किया जाता था। जंग ए आजादी को लेकर वर्ष 1942 में यहां एक बैठक हुई थी। इसमें महात्मा गांधी, भगत सिंह, विजय लक्ष्मी पंडित, ठाकुर रोशन सिंह, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल सरीखे कई बड़े क्रांतिकारी इसमें शामिल हुए थे। क्रांतिकारियों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई थी। बैठक में शामिल होने के बाद क्रांतिकारी तो चले गए, मगर भनक लगते ही अंग्रेज सैनिकों ने यहां आकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर जमकर लाठियां बरसाईं और मौके पर मिले गांव वालों को गिरफ्तार सबको अलग-अलग जेलों में ठूंस दिया गया।
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अब तक नहीं बन सका स्मारक
वर्ष 1997 में भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गांव खांडेपुर में आए थे। उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर गांव स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का स्मारक बनवाने की घोषणा की। यह घोषणा आज तक पूरी नहीं हो पाई।