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मलयेशिया में नौकरी लगवाने का झांसा देकर ठगे दो लाख रुपये
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पीलीभीत। बेटे की मलयेशिया में नौकरी लगवाने के बहाने एक महिला से जालसाजों ने दो लाख रुपये ठग लिए। झांसा देने के लिए बाद में तीन माह का टूरिस्ट बीजा बनवाकर बेटे को मलयेशिया भेज दिया, नौकरी का तो दूर-दूर तक पता नहीं था। वहां पहुंचने के बाद उसे ठगे जाने का अहसास हुआ। पुलिस ने जब कार्रवाई नहीं की तो पीड़िता ने कोर्ट की शरण ली। तब जाकर एक साल बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की गई है।
बरखेड़ा थाना क्षेत्र के अधकटा गांव निवासी रामदेवी पत्नी हेमराज ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि दौलतपुर गांव निवासी प्रेमपाल से उनकी पहचान थी। डेढ़ साल पहले प्रेमपाल ने अपने रिश्तेदार बंडा (शाहजहांपुर) के गांव चांदोपुर निवासी रिश्तेदार हरनारायन से मिलवाया। उसने बेटे धर्मेंद्र की मलयेशिया में नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। कहा कि हरनरायन के बीजा आदि का बंदोबस्त कर देगा। उसकी अच्छी नौकरी लगवा देगा। इसके लिए डेढ़ लाख रुपये का खर्च आना बताया गया। तीन बार में पीड़िता की ओर से उसे पूरी रकम दे दी गई। इसके अलावा उसने 50 हजार रुपये अलग से भी औपचारिकताएं पूरी करने में खर्च कराए। 29 मई 2019 को बेटे धर्मेंद्र को जालसाज दिल्ली ले गए और फिर वहां से उसे मलयेशिया भेज दिया। वहां पहुंचने पर बेटे को पता लगा कि उसे तीन माह का टूरिस्ट बीजा दे दिया गया है। कई दिन बाद पीड़िता ने रुपये उधार लेकर बेटे को भिजवाए तो वह वापस भारत लौट सका। आरोपियों से जब उसने सवाल-जवाब किया तो उसने स्टांप पर जल्द रुपये लौटाने की बात लिखकर दे दी। इसके बाद कई महीने तक टरकाता रहा और फिर आखिर में रुपये लौटाने से इनकार कर दिया। थाना पुलिस, एसपी से लेकर डीआईजी तक शिकायत की गई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। फिर पीड़िता ने न्याय के लिए कोर्ट की शरण ली। इंस्पेक्टर कमल सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर प्रेमपाल और हरनारायन पर धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और धमकाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। मामला काफी पुराना है, इसलिए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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बरखेड़ा थाना क्षेत्र के अधकटा गांव निवासी रामदेवी पत्नी हेमराज ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि दौलतपुर गांव निवासी प्रेमपाल से उनकी पहचान थी। डेढ़ साल पहले प्रेमपाल ने अपने रिश्तेदार बंडा (शाहजहांपुर) के गांव चांदोपुर निवासी रिश्तेदार हरनारायन से मिलवाया। उसने बेटे धर्मेंद्र की मलयेशिया में नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। कहा कि हरनरायन के बीजा आदि का बंदोबस्त कर देगा। उसकी अच्छी नौकरी लगवा देगा। इसके लिए डेढ़ लाख रुपये का खर्च आना बताया गया। तीन बार में पीड़िता की ओर से उसे पूरी रकम दे दी गई। इसके अलावा उसने 50 हजार रुपये अलग से भी औपचारिकताएं पूरी करने में खर्च कराए। 29 मई 2019 को बेटे धर्मेंद्र को जालसाज दिल्ली ले गए और फिर वहां से उसे मलयेशिया भेज दिया। वहां पहुंचने पर बेटे को पता लगा कि उसे तीन माह का टूरिस्ट बीजा दे दिया गया है। कई दिन बाद पीड़िता ने रुपये उधार लेकर बेटे को भिजवाए तो वह वापस भारत लौट सका। आरोपियों से जब उसने सवाल-जवाब किया तो उसने स्टांप पर जल्द रुपये लौटाने की बात लिखकर दे दी। इसके बाद कई महीने तक टरकाता रहा और फिर आखिर में रुपये लौटाने से इनकार कर दिया। थाना पुलिस, एसपी से लेकर डीआईजी तक शिकायत की गई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। फिर पीड़िता ने न्याय के लिए कोर्ट की शरण ली। इंस्पेक्टर कमल सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर प्रेमपाल और हरनारायन पर धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और धमकाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। मामला काफी पुराना है, इसलिए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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