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Pilibhit News: कोहरा, गन्ना और बाघ...तराई में वन विभाग की कठिन परीक्षा

Tue, 16 Dec 2025 11:51 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Tue, 16 Dec 2025 11:51 PM IST
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Fog, sugarcane and tigers... the Forest Department faces a tough test in the Terai region.
माधोटांडा क्षेत्र में खेतों में गन्ने की कटाई करते मजदूर। संवाद
फखरूल इस्लाम
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पीलीभीत। तराई में ठंड के साथ कोहरा वन विभाग के लिए चुनौती बन गया है। माधोटांडा, पूरनपुर और गजरौला क्षेत्र में जंगल से बाहर निकलकर बाघों की बढ़ती सक्रियता ने इंसान और वन्यजीव को आमने-सामने ला खड़ा किया है। दूसरी ओर खेतों में गन्ने की कटाई भी चल रही है। धुंध में काम करते किसान, ऊंचे गन्ने के खेत और आसपास घूमते बाघ, यह तीनों मिलकर एक ऐसी स्थिति बना रहे हैं, जहां जरा-सी चूक बड़ी घटना में बदल सकती है। विभाग ने रोकथाम के लिए रणनीति तैयार की है।
73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले पीलीभीत के जंगलों को वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। नियमों में बदलाव और वन्यजीव संरक्षण पर सकारात्मक प्रयास होने से बाघोंं की संख्या 24 से बढ़कर 72 पहुंच गई, लेकिन चुनौतियां भी साथ रहीं। मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रहीं। इधर, ठंड शुरू होते ही बाघों की भी जंगल से बाहर सक्रियता बढ़ गई है। जिले के माधोटांडा, पूरनपुर, गजरौला आदि क्षेत्रों में बाघों की आबादी क्षेत्र के निकट खेतों में चहलकदमी देखी जा रही है। वहीं इस समय गन्ने की कटाई के कार्य को देखते हुए विभागीय अफसर भी गंभीर हैं। टीमों को लगाकर निगरानी और जागरूकता के प्रयास तेज किए गए हैं, लेकिन कोहरे के बढ़ते प्रकोप के चलते परिस्थितियां चुनौती पूर्ण बनने लगी हैं।
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दृश्यता घटने से बाघों की मूवमेंट का अनुमान लगाना मुश्किल

विभागीय जानकारों की मानें तो असल चुनौती यह होती है कि कोहरे में निगरानी सीमित हो जाती है। दृश्यता घटने से बाघों की मूवमेंट का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है, वहीं खेतों में दिन-रात काम कर रहे मजदूरों को रोकना भी संभव नहीं। गन्ने के घने खेत बाघों के लिए प्राकृतिक आवरण बन चुके हैं, इससे वे बिना दिखे आबादी के करीब तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में वन विभाग को न सिर्फ बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, बल्कि ग्रामीणों की जान की हिफाजत भी करनी है। दोनों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है।
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स्थिति से निपटने के लिए गठित की आठ टीमें, निगरानी और जागरूकता पर जोर
जंगल से बाहर निकल रहे बाघों पर नजर रखने के लिए विभाग ने रणनीति तैयार की है। विभाग ने बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है। डीएफओ भरत कुमार डीके के अनुसार संवेदनशील इलाकों में आठ विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं, जो पैदल, वाहन और जरूरत पड़ने पर हाथियों की मदद से लगातार गश्त कर रही हैं। बाघों की गतिविधियों की सूचना तुरंत साझा करने के लिए स्थानीय स्तर पर नेटवर्क सक्रिय किया गया है। किसी भी मूवमेंट की खबर मिलते ही आसपास के गांवों को सतर्क किया जा रहा है। सिर्फ निगरानी ही नहीं, बल्कि जागरूकता को भी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया गया है। ग्रामीणों को समझाया जा रहा है कि कोहरे में अकेले खेत न जाएं, समूह में काम करें और सुबह-शाम अतिरिक्त सावधानी बरतें। अफवाहों से बचने और विभाग से समन्वय बनाए रखने की अपील की जा रही है।




बाघ एक्सप्रेस को किया सक्रिय

पीटीआर की ओर से संचालित बाघ एक्सप्रेस वाहन को एक बार फिर सक्रिय किया गया है। इस वाहनों को उन संवेदनशील इलाकों में भेजा जा रहा है, जहां बाघ या अन्य वन्यजीवों की सक्रियता अधिक रहती है। बाघ एक्सप्रेस टीम के जरिए टीम ग्रामीणों को वन्यजीवों से संबंधित जानकारी देकर जागरूक करने पर जोर दे रही है। नुक्कड़ नाटक भी दिखाए जा रहे हैं। यह क्रम मंगलवार को भी कई गांवों में जारी रहा।
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