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Pilibhit News: खेतों में उगे ‘बांसुरी’, तब सधेंगे कारीगरों के सुर

Wed, 30 Aug 2023 11:15 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Wed, 30 Aug 2023 11:15 PM IST
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'Flute' grows in the fields, then the artisans will listen
बनी बांसुरी को चेक करती हिना । संवाद
पीलीभीत। जिले की पहचान बांसुरी उद्योग कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के बाद से अब तक उबर नहीं पाया है। इस धंधे में लगे शहर के करीब ढाई सौ परिवारों के सामने दूसरा व्यवसाय शुरू करना भी बड़ी चुनौती है। कच्चा माल मंगवाने के बाद बाहर से बांसुरी का अपेक्षित ऑर्डर न मिलने से कारीगर खाली हैं। यदि शासन स्तर से इस उद्योग को बढ़ावा देने के प्रयास हों तो यहां की बांसुरी फिर से देश-विदेश में धूम मचा सकती है। सबसे बड़ी जरूरत तो कच्चा माल यहीं तैयार करने की है। अगर ये जिले में ही बांसुरी का बांस तैयार करने का सपना साकार हो जाए तो यहां खेतों में बांसुरी की धुन सुनाई दे सकती है।
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प्रदेश सरकार ने पीलीभीत के बांसुरी उद्योग को एक जिला-एक उत्पाद की श्रेणी में शामिल किया है। यहां 250 से ज्यादा परिवार बांसुरी बनाने का काम करते हैं। यह उद्योग पीढ़ी दर पीढ़ी लगातार 200 साल से चला आ रहा है। मौजूदा समय में जिले में इस उद्योग से जुड़े लोग अब दूसरा धंधा शुरू करने की योजना बना रहे हैं। कारण है कि सरकार की ओर से एक जिला-एक उत्पाद में शामिल इस उद्योग को आशातीत लाभ नहीं मिल पा रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के बाद बाहर से कच्चा माल मंगाने पर हो रहा खर्च निकालना दूभर हो रहा है। इधर, बांसुरी के ऑर्डर भी नहीं मिल पा रहे हैं। कच्चा माल खराब हो रहा है।
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पति की मौत के बाद हिना संभाल रही हैं काम
नवाब की पत्नी हिना बताती हैं कि पति की तीन साल पहले मौत होने के बाद अब वही पूरा काम देख रही हैं। यह उनकी चौथी पीढ़ी है जो बांसुरी बनाती है। कच्चा माल असम से मंगवाते हैं। इसमें ट्रेन सुविधा न होने के कारण काफी खर्चा होता है। मंडल में ही बांसुरी के लिए बांस की पैदावार के लिए बरेली के सीबीगंज में दो साल पहले पौध लगवाई गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। असम से एक ट्रक माल मंगवाने में करीब 80 हजार का खर्च आता है। मौजूदा समय में बांसुरी को लेकर अभी कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बन सकी है। मांग भी काफी कम हो गई है। शहर में करीब तीन दशक पहले दो हजार परिवार इस काम में लगे थे। अब मात्र दो-तीन सौ परिवार ही रह गए हैं।
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जन्माष्टमी के लिए मथुरा से अब तक नहीं आई डिमांड
जन्माष्टमी पर्व को लेकर हर साल मथुरा से बांसुरी का बड़ा ऑर्डर मिलता था, लेकिन इस बार वहां बाढ़ के कारण अब तक ऑर्डर नहीं मिला है। मथुरा में आने वाले विदेशी पर्यटक बांसुरी को प्रसाद के तौर पर खरीद कर ले जाते हैं। लोकल में भी बिक्री ठीक नहीं हो रही है। स्थानीय स्तर से भी मांग नहीं आ गई है।

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प्रधानमंत्री को 56 इंज की बांसुरी देंगी हिना
बांसुरी उद्योग से जुडीं शहर के मोहल्ला बसीर खां की रहने वाली हिना ने बताया कि उनको कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्होंने लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री को 55 इंच की बांसुरी दी थी। अब वह प्रधानमंत्री को 56 इंच की बांसुरी भेंट करना चाहती हैं। जल्द ही वह उन्हें बांसुरी देंगी।

बनी बांसुरी को चेक करती हिना । संवाद

बनी बांसुरी को चेक करती हिना । संवाद

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