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नदियों के साथ-साथ इंसानों की सेहत से भी खिलवाड़
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Updated Sun, 17 Sep 2017 11:07 PM IST
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नदी
- फोटो : अमर उजाला
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रोजाना 1.35 लाख लीटर दूषित पानी बहा रहे हैं खकरा के लोग
देवहा व खकरा के संगम स्थल के समीप ही गिरता है गंदे पानी का नाला
नाले, नदियों की ही नहीं बल्कि इंसानों की सेहत से भी खिलवाड़ हो रहा है। नदियों में नालों के माध्यम से दूषित पानी के गिरने से जहां जलीय जीव जंतु के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है, वहीं इसका विषैला जल भी भूगर्भ जल के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश कर रहा है। ऐसा भी नहीं है कि जिम्मेदार लोगों को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति न होने के कारण यह विकट समस्या उनकी आंखों की कभी किरकिरी नहीं बनी। अमर उजाला ने रविवार को खकरा नदी में गिरने में एक नाले की पड़ताल की तो स्थिति और भी खतरनाक पाई गई। पेश है इससे जुड़ी एक रिपोर्ट-
खकरा देवहा के संगम के पास ही गिरता है गंदे पानी का नाला
पर्वतीय क्षेत्र से निकलकर मैदानी क्षेत्र में बहने के साथ जिले में करीब 25 किमी का सफर तय करके खकरा नदी देवाहुति गंगा कही जाने वाली देवहा नदी मेें विलीन हो जाती है। खास बात यह है कि जिस स्थान पर खकरा व देवहा का संगम होता हैै, उससे महज चंद मीटर की दूरी पर ही एक नाले के माध्यम से करीब 850 की आबादी वाले मोहल्ला खकरा का सारा दूषित पानी नदी में जा रहा है। यह नाला शहर की जामा मस्जिद से शुरू होकर मोहल्ला खकरा होते हुए खकरा नदी में गिरता है। नगर पालिका का के एक अवर अभियंता के मुताबिक इस नाले से खकरा नदी में रोजाना करीब 1.35 लाख लीटर दूषित पानी गिर रहा है। इससे नदी में रहने वाले जलीय जीव जंतु के अस्तित्व पर तो खतरा मंडरा ही रहा है, साथ ही नदी का पानी भी विषैला होता जा रहा है। दूषित जल देवहा नदी की धार्मिक आस्था पर भी चोट कर रहा है।
डेयरियों का गोबर व मलबा भी जा रहा है नदी में
शहर में करीब 125 से अधिक डेयरी है। मोहल्ला खकरा में भी दर्जन भर से अधिक डेयरियां हैं। अधिकांश डेयरी संचालक गोबर व अन्य मलबे को किसी स्थान पर एकत्र न कर उसे नाले में बहाते हैं। पालिका प्रशासन द्वारा इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के कारण डेयरी संचालक बेधड़क गोबर नाले में बहा रहे हैं।
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दूषित हो रहा है भूगर्भ जल, बढ़ रही हैं जलजनित बीमारियां
उपाधि महाविद्यालय में जंतु विज्ञान के प्रवक्ता डॉ. मनोज गुप्ता बताते हैं कि नदी क्षेत्र में रहने वाले लोग दूषित जल का ज्यादा शिकार होते हैं। वजह यह हैं कि इससे भूगर्भ जल में भी हानिकारक तत्वों का समावेश हो जाता है। रोग पैदा करने वाले जीवों के अतिरिक्त कई विषैले तत्व भी भूगर्भ जल के माध्यम से शरीर में पहुंचकर स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इन विषैले तत्वों में केडमियम, लेड, आर्सेनिक व सिल्वर आदि शामिल हैं, जो मानव शरीर के लिए घातक हैं।
इस समस्या के लिए सरकार ही जिम्मेदार
शहर की खकरा व देवहा कोई आज से अपवित्र नहीं की जा रही है। पानी निकास की व्यवस्था प्रशासन व नगर पालिका करती है। इन जिम्मेदारों को पहले ही सोचना चाहिए था।
अनीता शर्मा
नदियों को प्रदूषण मुक्त करना जरूरी
नदियों को प्रदूषण मुक्त करना आवश्यक है। इससे प्रदूषण की समस्या तो बढ़ ही रही है साथ ही यह दूषित पानी नलों के जरिए हमारे घरों तक पहुंचने लगा है। शासन-प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
बबिता सक्सेना
नदियों को दूषित होने से बचाने को आगे आएं लोग
नदियां हिंदू धर्म की आस्था से जुड़ा मुख्य मामला है। हमारी पवित्र नदियों में नाले नालियों का गंदा पानी व अवशिष्ट बहाया जा रहा है। इससे धार्मिक आस्था पर गहरी चोट लग रही है। इसके लिए अब लोगों को आगे आने की जरूरत है।
अशोक कुमार
नदियों में स्नान करने से भी कतराने लगे हैं लोग
नदियों के जल को आदि काल से पवित्र माना गया है। पूर्व में लोग इन नदियों में स्नान कर अपने आप को पूर्णतया पवित्र महसूस करते थे। जल दूषित होने के कारण आजकल लोग इसमें स्नान करने से कतराने लगे हैं।
सुनील कश्यप
बयान
सावधानी ही बेहतर बचाव
दूषित जल के सेवन से पेट व लीवर, सांस संबंधी, त्वचा, आंख व फेफड़ों से संबंधित बीमारियां पैदा होती है। इससे बचनेे के लिए सावधानी ही बेहतर बचाव है। मोटे तौर पर घरेलू उपयोग में पानी का प्रयोग करने से पहले यह आश्वस्त हो जाना चाहिए कि वह शुद्ध है या नहीं। यदि संदेह हो तो पीने के पानी को स्वच्छ कपड़े से छान लेना चाहिए या फिल्टर का प्रयोग करना चाहिए।
डॉ. पीके मिश्रा, फिजीशियन, जिला अस्पताल
गोबर बहाने वालों पर की जाएगी कार्रवाई
शहर के नाले नालियों में गोबर बहाने वाले डेयरी संचालकों को पूर्व में नोटिस देकर चेतावनी दी गई थी। इस पर सख्ती से रोक भी लगाई गई थी, यदि अब पुन: डेयरी संचालकों नालियों मेें गोबर डाल रहे हैं तो इसकी पता लगाकर उनके खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
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देवहा व खकरा के संगम स्थल के समीप ही गिरता है गंदे पानी का नाला
नाले, नदियों की ही नहीं बल्कि इंसानों की सेहत से भी खिलवाड़ हो रहा है। नदियों में नालों के माध्यम से दूषित पानी के गिरने से जहां जलीय जीव जंतु के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है, वहीं इसका विषैला जल भी भूगर्भ जल के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश कर रहा है। ऐसा भी नहीं है कि जिम्मेदार लोगों को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति न होने के कारण यह विकट समस्या उनकी आंखों की कभी किरकिरी नहीं बनी। अमर उजाला ने रविवार को खकरा नदी में गिरने में एक नाले की पड़ताल की तो स्थिति और भी खतरनाक पाई गई। पेश है इससे जुड़ी एक रिपोर्ट-
खकरा देवहा के संगम के पास ही गिरता है गंदे पानी का नाला
पर्वतीय क्षेत्र से निकलकर मैदानी क्षेत्र में बहने के साथ जिले में करीब 25 किमी का सफर तय करके खकरा नदी देवाहुति गंगा कही जाने वाली देवहा नदी मेें विलीन हो जाती है। खास बात यह है कि जिस स्थान पर खकरा व देवहा का संगम होता हैै, उससे महज चंद मीटर की दूरी पर ही एक नाले के माध्यम से करीब 850 की आबादी वाले मोहल्ला खकरा का सारा दूषित पानी नदी में जा रहा है। यह नाला शहर की जामा मस्जिद से शुरू होकर मोहल्ला खकरा होते हुए खकरा नदी में गिरता है। नगर पालिका का के एक अवर अभियंता के मुताबिक इस नाले से खकरा नदी में रोजाना करीब 1.35 लाख लीटर दूषित पानी गिर रहा है। इससे नदी में रहने वाले जलीय जीव जंतु के अस्तित्व पर तो खतरा मंडरा ही रहा है, साथ ही नदी का पानी भी विषैला होता जा रहा है। दूषित जल देवहा नदी की धार्मिक आस्था पर भी चोट कर रहा है।
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डेयरियों का गोबर व मलबा भी जा रहा है नदी में
शहर में करीब 125 से अधिक डेयरी है। मोहल्ला खकरा में भी दर्जन भर से अधिक डेयरियां हैं। अधिकांश डेयरी संचालक गोबर व अन्य मलबे को किसी स्थान पर एकत्र न कर उसे नाले में बहाते हैं। पालिका प्रशासन द्वारा इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के कारण डेयरी संचालक बेधड़क गोबर नाले में बहा रहे हैं।
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दूषित हो रहा है भूगर्भ जल, बढ़ रही हैं जलजनित बीमारियां
उपाधि महाविद्यालय में जंतु विज्ञान के प्रवक्ता डॉ. मनोज गुप्ता बताते हैं कि नदी क्षेत्र में रहने वाले लोग दूषित जल का ज्यादा शिकार होते हैं। वजह यह हैं कि इससे भूगर्भ जल में भी हानिकारक तत्वों का समावेश हो जाता है। रोग पैदा करने वाले जीवों के अतिरिक्त कई विषैले तत्व भी भूगर्भ जल के माध्यम से शरीर में पहुंचकर स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इन विषैले तत्वों में केडमियम, लेड, आर्सेनिक व सिल्वर आदि शामिल हैं, जो मानव शरीर के लिए घातक हैं।
इस समस्या के लिए सरकार ही जिम्मेदार
शहर की खकरा व देवहा कोई आज से अपवित्र नहीं की जा रही है। पानी निकास की व्यवस्था प्रशासन व नगर पालिका करती है। इन जिम्मेदारों को पहले ही सोचना चाहिए था।
अनीता शर्मा
नदियों को प्रदूषण मुक्त करना जरूरी
नदियों को प्रदूषण मुक्त करना आवश्यक है। इससे प्रदूषण की समस्या तो बढ़ ही रही है साथ ही यह दूषित पानी नलों के जरिए हमारे घरों तक पहुंचने लगा है। शासन-प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
बबिता सक्सेना
नदियों को दूषित होने से बचाने को आगे आएं लोग
नदियां हिंदू धर्म की आस्था से जुड़ा मुख्य मामला है। हमारी पवित्र नदियों में नाले नालियों का गंदा पानी व अवशिष्ट बहाया जा रहा है। इससे धार्मिक आस्था पर गहरी चोट लग रही है। इसके लिए अब लोगों को आगे आने की जरूरत है।
अशोक कुमार
नदियों में स्नान करने से भी कतराने लगे हैं लोग
नदियों के जल को आदि काल से पवित्र माना गया है। पूर्व में लोग इन नदियों में स्नान कर अपने आप को पूर्णतया पवित्र महसूस करते थे। जल दूषित होने के कारण आजकल लोग इसमें स्नान करने से कतराने लगे हैं।
सुनील कश्यप
बयान
सावधानी ही बेहतर बचाव
दूषित जल के सेवन से पेट व लीवर, सांस संबंधी, त्वचा, आंख व फेफड़ों से संबंधित बीमारियां पैदा होती है। इससे बचनेे के लिए सावधानी ही बेहतर बचाव है। मोटे तौर पर घरेलू उपयोग में पानी का प्रयोग करने से पहले यह आश्वस्त हो जाना चाहिए कि वह शुद्ध है या नहीं। यदि संदेह हो तो पीने के पानी को स्वच्छ कपड़े से छान लेना चाहिए या फिल्टर का प्रयोग करना चाहिए।
डॉ. पीके मिश्रा, फिजीशियन, जिला अस्पताल
गोबर बहाने वालों पर की जाएगी कार्रवाई
शहर के नाले नालियों में गोबर बहाने वाले डेयरी संचालकों को पूर्व में नोटिस देकर चेतावनी दी गई थी। इस पर सख्ती से रोक भी लगाई गई थी, यदि अब पुन: डेयरी संचालकों नालियों मेें गोबर डाल रहे हैं तो इसकी पता लगाकर उनके खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका