{"_id":"5ef2484e8ebc3e42dc3a3ec5","slug":"flood-terror-pilibhit-news-bly4103152133","type":"story","status":"publish","title_hn":"शारदा नदी के मुहाने पर राहुलनगर, जलस्तर बढ़ता देख सैकड़ों लोगों की धड़कनें बढ़ीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शारदा नदी के मुहाने पर राहुलनगर, जलस्तर बढ़ता देख सैकड़ों लोगों की धड़कनें बढ़ीं
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पीलीभीत। सरकार भले ही कटान रोकने के लिए भले ही समय से बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू कराने का दावा कर रही है, मगर बाढ़ से बचाव के दावे खोखले ही हैं। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। पिछले वर्ष बाढ़ से तबाह हुए राहुलनगर में धेले भर का भी काम शुरू नहीं कराया जा सका। बाढ़ खंड के नौ करोड़ के प्रोजेक्ट पर वन विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है। मानसूनी बारिश में इस बार राहुलनगर शारदा नदी के मुहाने पर है। अगर नदी में बाढ़ आती है तो राहुलनगर का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
पूरनपुर तहसील क्षेत्र के गांव राहुलनगर में पिछले साल बाढ़ के दौरान चार-पांच घर कट गए थे। इसके साथ ही सैकड़ों एकड़ कृषि जमीन भी नदी की भेंट चढ़ गई थी। आलम यह था कि लोगों को खुद ही अपने हाथों से बनाए हुए आशियाने तोड़ने पड़े थे। इससे प्रशासन में भी हड़कंप मच गया था। तत्कालीन एसडीएम चंद्रभानु सिंह, तहसीलदार आशुतोष कुमार और बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शैलेष कुमार ने पिछले साल राहुलनगर में ही कैंप कर अस्थायी बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू कराए थे। दिन और रात में जनरेटर की रोशनी में आनन फानन में बचाव कार्य कर कुछ हद तक कटान रोकने की कोशिश की गई थी। उस दौरान कहा गया कि बरसात खत्म होते ही यहां स्थायी बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जाएंगे। मगर, फिर सब कुछ वैसा ही हो गया, जैसा कि बरसात से पहले होता आया है।
बाढ़ खंड के नौ करोड़ के प्रोजेक्ट पर लगा अड़ंगा
राहुलनगर में बाढ़ से बचाव को भेजे गए नौ करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को शासन ने इसी वर्ष की शुरूआत में मंजूरी दे दी थी। यहां बाढ़ खंड को इस धनराशि से शारदा नदी की बदली धारा की खुदाई कर उसे पुराने स्वरूप में (चेनेलाइजेशन) में लाना था। अपने पुराने ढर्रे के मुताबिक बाढ़ खंड ने ऐन वक्त पर राहुलनगर में बचाव कार्य करवाने की कवायद शुरू की। मगर तब वन विभाग ने उसे वन भूमि बताते हुए बाढ़ राहत कार्य करने की अनुमति नहीं दी। यह मामला जनपद दौरे पर आए जल शक्ति राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख के समक्ष सोमवार को रखा गया तो उन्होंने भी मामले का कोई निदान न बताते हुए बाढ़ खंड इंजीनियर को एक भी घर न कटने हिदायत दे डाली। अब राहुलनगर में बाढ़ नियंत्रण कार्य कैसे होंगे, बाढ़ खंड के इंजीनियर इस पर मंथन में जुटे हैं।
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900 लोगों की आबादी खतरे में
राहुलनगर में नदी किनारे 250 लोगों के आसपास घर बने हुए हैं। इनमें करीब 900 लोगों है। ग्रामीणों का मानना है कि पिछले वर्ष नदी ने तबाही मचाई थी। इस बार भी गांव नदी के मुहाने पर है। बचाव कार्य नहीं हुए तो गांव का अस्तित्व बचाना मुश्किल होगा।
शासन ने राहुलनगर में चेनेलाइजेशन को लेकर नौ करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, मगर वन विभाग की आपत्ति के चलते वहां अभी बचाव कार्य शुरू नहीं कराए गए हैं। इससे उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। - शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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पूरनपुर तहसील क्षेत्र के गांव राहुलनगर में पिछले साल बाढ़ के दौरान चार-पांच घर कट गए थे। इसके साथ ही सैकड़ों एकड़ कृषि जमीन भी नदी की भेंट चढ़ गई थी। आलम यह था कि लोगों को खुद ही अपने हाथों से बनाए हुए आशियाने तोड़ने पड़े थे। इससे प्रशासन में भी हड़कंप मच गया था। तत्कालीन एसडीएम चंद्रभानु सिंह, तहसीलदार आशुतोष कुमार और बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शैलेष कुमार ने पिछले साल राहुलनगर में ही कैंप कर अस्थायी बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू कराए थे। दिन और रात में जनरेटर की रोशनी में आनन फानन में बचाव कार्य कर कुछ हद तक कटान रोकने की कोशिश की गई थी। उस दौरान कहा गया कि बरसात खत्म होते ही यहां स्थायी बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जाएंगे। मगर, फिर सब कुछ वैसा ही हो गया, जैसा कि बरसात से पहले होता आया है।
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बाढ़ खंड के नौ करोड़ के प्रोजेक्ट पर लगा अड़ंगा
राहुलनगर में बाढ़ से बचाव को भेजे गए नौ करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को शासन ने इसी वर्ष की शुरूआत में मंजूरी दे दी थी। यहां बाढ़ खंड को इस धनराशि से शारदा नदी की बदली धारा की खुदाई कर उसे पुराने स्वरूप में (चेनेलाइजेशन) में लाना था। अपने पुराने ढर्रे के मुताबिक बाढ़ खंड ने ऐन वक्त पर राहुलनगर में बचाव कार्य करवाने की कवायद शुरू की। मगर तब वन विभाग ने उसे वन भूमि बताते हुए बाढ़ राहत कार्य करने की अनुमति नहीं दी। यह मामला जनपद दौरे पर आए जल शक्ति राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख के समक्ष सोमवार को रखा गया तो उन्होंने भी मामले का कोई निदान न बताते हुए बाढ़ खंड इंजीनियर को एक भी घर न कटने हिदायत दे डाली। अब राहुलनगर में बाढ़ नियंत्रण कार्य कैसे होंगे, बाढ़ खंड के इंजीनियर इस पर मंथन में जुटे हैं।
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900 लोगों की आबादी खतरे में
राहुलनगर में नदी किनारे 250 लोगों के आसपास घर बने हुए हैं। इनमें करीब 900 लोगों है। ग्रामीणों का मानना है कि पिछले वर्ष नदी ने तबाही मचाई थी। इस बार भी गांव नदी के मुहाने पर है। बचाव कार्य नहीं हुए तो गांव का अस्तित्व बचाना मुश्किल होगा।
शासन ने राहुलनगर में चेनेलाइजेशन को लेकर नौ करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, मगर वन विभाग की आपत्ति के चलते वहां अभी बचाव कार्य शुरू नहीं कराए गए हैं। इससे उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। - शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड