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Pilibhit: 57.89 लाख की साइबर ठगी का पर्दाफाश, डिजिटल अरेस्ट करने वाले गिरोह के पांच सदस्य गिरफ्तार

Fri, 05 Sep 2025 09:30 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 05 Sep 2025 09:30 PM IST
सार

इस मामले में एसपी ने तीन टीमों को खुलासे के लिए लगाया था। टीमें लगातार कार्य कर रहीं थीं। गठित तीन टीमों ने शुक्रवार को पूरनपुर रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास से पांच आरोपियों को दबोच लिया।

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Five members of the digital arrest gang arrested
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जेल लाइन निवासी क्लर्क से 57.89 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा कर दिया। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 3.50 लाख रुपये, नौ मोबाइल फोन, 10 फर्जी आधार कार्ड और दो चेकबुक बरामद की हैं। गिरफ्तार आरोपी दिल्ली और नोएडा के निवासी हैं। एसपी अभिषेक यादव ने पुलिस लाइन में घटना का खुलासा किया।

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जेल लाइन निवासी क्लर्क जगमोहन सैनी ने वर्ष 2024 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि अज्ञात लोगों ने खुद को सीबीसीआईडी, मुंबई क्राइम ब्रांच और सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताते हुए फोन किया। आरोपियों ने आधार कार्ड से फर्जी सिम जारी होने और गैरकानूनी गतिविधियों का हवाला देकर उन्हें 09 से 22 अगस्त 2024 तक वीडियो व ऑडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट रखा और 57,89,776 रुपये ठग लिए।

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इस मामले में एसपी ने तीन टीमों को खुलासे के लिए लगाया था। टीमें लगातार कार्य कर रहीं थीं। गठित तीन टीमों ने शुक्रवार को पूरनपुर रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास से पांच आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों में मनीष कुमार निवासी सूरजपुर ग्रेटर नोएडा, विकास वर्मा निवासी तिमारपुर दिल्ली, राजेंद्र शर्मा उर्फ राजन निवासी नोएडा एक्सटेंशन, संजय बोबी देशवाल निवासी बख्तावरपुर नोएडा और प्रशांत चौहान निवासी फर्रुखाबाद, हाल निवासी द्वारका, दिल्ली शामिल हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे एक संगठित गिरोह के रूप में कार्य करते हैं। यह गिरोह गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों से उनके बैंक खाते, पासबुक व चेकबुक लेकर म्यूल अकाउंट तैयार करता है। ठगी की रकम इन खातों में डालकर तुरंत ट्रांसफर कर दी जाती है और कुछ हिस्सा विदेशों (कंबोडिया, लाओस) में बैठे सरगना को भेज दिया जाता है।

गिरोह पकड़े जाने से बचने के लिए समय-समय पर नए खाते और नए मोबाइल नंबर का प्रयोग करता है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक खुर्शीद अहमद, एसओजी प्रभारी उमेश त्यागी व प्रभारी साइबर सेल शामिल रहे। आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। एसपी ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। टीमें लगातार काम कर रहीं हैं।

डिजिटल अरेस्ट नहीं है कोई कानूनी प्रक्रिया
एसपी अभिषेक यादव ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक धोखाधड़ी की तकनीक है। इसमें अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी या एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर व्यक्ति को डराते हैं कि वह किसी अपराध में फंस गया है और उसे डिजिटल रूप से गिरफ्तार किया जा रहा है। अगर किसी स्थिति में ठगी होती है तो तुरंत 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं।
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