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कोरोना संक्रमण के बीच संकट पीलीभीत में मिला ब्लैक फंगस का पहला केस
Wed, 12 May 2021 11:56 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 12 May 2021 11:56 AM IST
सार
मेरठ, कानपुर और वाराणसी के बाद अब पीलीभीत में भी ब्लैक फंगस का पहला मामला सामने आया है। निजी अस्पताल में पहला केस पहुंचा है।
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश में कोरोना संकट काल के बीच ब्लैक फंगस भी फैलने लगा है। मेरठ, गाजियाबाद, कानपुर और वाराणसी के बाद अब पीलीभीत में भी ब्लैक फंगस का पहला मामला सामने आया है। निजी अस्पताल में पहला केस पहुंचा है। मेरठ में तीन, कानपुर में 50 और वाराणसी में दो मरीज मिले हैं।
इस बीमारी में नाक से खून और आंखों मे सूजन आती है। आंखों की रोशनी भी प्रभावित होती है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग में अलर्ट किया गया है। डॉक्टर्स की मानें तो बीमारी के शिकार शुगर के मरीज और कोरोना से ठीक हो चुके लोगों पर अधिक हमलावर होगा। ऐसे में एहतियात बरतनी होगी।
कोरोना महामारी के बीच देश में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले मरीजों के मौत की बड़ी वजह बनकर सामने आ रहे हैं। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा बताते हैं कि ब्लैक फंगस (म्यूकॉरमाइकोसिस) नाक से फैलता है।
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इस फंगस को गले में ही शरीर की एक बड़ी धमनी कैरोटिड आर्टरी मिल जाती है। आर्टरी का एक हिस्सा आंख में रक्त पहुंचाती है। फंगस रक्त में मिलकर आंख तक पहुंचता है। इसी कारण ब्लैक फंगस या ब्लड फंगस से संक्रमित मरीजों की आंख निकालने के मामले सामने आ रहे हैं। अब हर दिन बढ़ रहे हैं मामले गंभीर मामलों में मस्तिष्क भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकता है।
प्रो. मिश्रा बताते हैं कि 26 साल के डॉक्टरी पेशे में ब्लैक फंगस के सिर्फ 15 से 16 मामले देखे थे। अब ये मामले हर दिन बढ़ रहे हैं, जो चिंताजनक हालात को बयां करते हैं। संक्रमण के बीच बरती गई लापरवाही भारी पड़ रही है।
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इस बीमारी में नाक से खून और आंखों मे सूजन आती है। आंखों की रोशनी भी प्रभावित होती है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग में अलर्ट किया गया है। डॉक्टर्स की मानें तो बीमारी के शिकार शुगर के मरीज और कोरोना से ठीक हो चुके लोगों पर अधिक हमलावर होगा। ऐसे में एहतियात बरतनी होगी।
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कोरोना महामारी के बीच देश में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले मरीजों के मौत की बड़ी वजह बनकर सामने आ रहे हैं। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा बताते हैं कि ब्लैक फंगस (म्यूकॉरमाइकोसिस) नाक से फैलता है।
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इस फंगस को गले में ही शरीर की एक बड़ी धमनी कैरोटिड आर्टरी मिल जाती है। आर्टरी का एक हिस्सा आंख में रक्त पहुंचाती है। फंगस रक्त में मिलकर आंख तक पहुंचता है। इसी कारण ब्लैक फंगस या ब्लड फंगस से संक्रमित मरीजों की आंख निकालने के मामले सामने आ रहे हैं। अब हर दिन बढ़ रहे हैं मामले गंभीर मामलों में मस्तिष्क भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकता है।
प्रो. मिश्रा बताते हैं कि 26 साल के डॉक्टरी पेशे में ब्लैक फंगस के सिर्फ 15 से 16 मामले देखे थे। अब ये मामले हर दिन बढ़ रहे हैं, जो चिंताजनक हालात को बयां करते हैं। संक्रमण के बीच बरती गई लापरवाही भारी पड़ रही है।
आंख की लालिमा या सूजन को नजरअंदाज न करें
डॉ. विजय बताते हैं कि म्यूकॉरमाइकोसिस एक अलग तरह का फंगस है। ये रक्त वाहिकाओं में छेद करने की क्षमता रखता है। शरीर में प्रवेश के साथ ही ये रक्त वाहिकाओं में पहुंचने के लिए उसे नुकसान पहुंचाता है। कामयाबी मिलने के बाद रक्त के जरिए ये पूरे शरीर में फैल जाता है और रक्त प्रवाह को रोकता है।
इस कारण रक्त वाहिका सूख जाती है, जो गैंगरीन की तरह दिखता है। गैंगरीन काले रंग का होता है। इसी कारणवश इसे ब्लैक फंगस या ब्लड फंगस भी कहते हैं।
- ब्लैक फंगस की चपेट में आने पर सबसे पहले आंख अचानक लाल होगी। आंख में सूजन आ जाएगी।
- नजर कमजोर पड़ने लगेगी। गंभीर मामलों में रोशनी भी जा सकती है।
- कोरोना रोगी आंख की लालिमा या सूजन को नजरअंदाज न करें।
- फंगस धमनियों के जरिए जब मस्तिष्क तक पहुंचेगा, तो रोगी को अचानक लकवा, मिर्गी का दौरा, बेहोशी, सिर में असहनीय दर्द जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं।
- कुछ गंभीर मामलों में रोगी की अचानक मौत हो सकती है।
डॉ. विजय बताते हैं कि म्यूकॉरमाइकोसिस एक अलग तरह का फंगस है। ये रक्त वाहिकाओं में छेद करने की क्षमता रखता है। शरीर में प्रवेश के साथ ही ये रक्त वाहिकाओं में पहुंचने के लिए उसे नुकसान पहुंचाता है। कामयाबी मिलने के बाद रक्त के जरिए ये पूरे शरीर में फैल जाता है और रक्त प्रवाह को रोकता है।
इस कारण रक्त वाहिका सूख जाती है, जो गैंगरीन की तरह दिखता है। गैंगरीन काले रंग का होता है। इसी कारणवश इसे ब्लैक फंगस या ब्लड फंगस भी कहते हैं।