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Pilibhit News: अधिवक्ता को हवालात में बंद करने पर इंस्पेक्टर पर एफआईआर के आदेश
Mon, 02 Nov 2026 12:50 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Mon, 02 Nov 2026 12:50 AM IST
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पीलीभीत। हाईकोर्ट के अधिवक्ता को पूछताछ के नाम पर थाने बुलाकर एक घंटा 17 मिनट तक हवालात में बंद रखने के मामले में जहानाबाद पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंगल देव सिंह ने तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। अदालत ने सात दिन के भीतर एफआईआर की प्रति भी न्यायालय में दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता रामानुज सैनी ने बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 27 अगस्त 2026 को एक आरक्षी ने पूछताछ के नाम पर उन्हें थाना जहानाबाद बुलाया। आरोप है कि वहां तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने उनके साथ अभद्रता की। एक मुख्य आरक्षी ने उनके जूते, चप्पल, बटुआ और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उन्हें बिना किसी अपराध के एक घंटा 17 मिनट तक हवालात में बंद रखा गया।
अधिवक्ता का आरोप है कि उनके साथी अधिवक्ता के थाने पहुंचने पर दबाव बनाकर उनसे माफीनामा लिखवाया गया। इसके बाद उन्हें छोड़ा गया। साथ ही भविष्य में झूठे मुकदमे में फंसाकर उनका करियर बर्बाद करने की धमकी भी दी गई।
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वहीं, पुलिस की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत आख्या में बताया गया कि अधिवक्ता दो मोबाइल नंबरों की सीडीआर और सीएएफ आईडी उपलब्ध कराने का दबाव बना रहे थे। बिना अभियोग पंजीकृत हुए यह जानकारी देना संभव नहीं था। पुलिस के अनुसार समझाने पर अधिवक्ता ने स्वयं माफीनामा लिख दिया था।
दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया अधिवक्ता की स्वतंत्रता के उल्लंघन का मामला माना। न्यायालय ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना कराए जाने व नियमानुसार विवेचना कराने और आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। संवाद
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हाईकोर्ट के अधिवक्ता रामानुज सैनी ने बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 27 अगस्त 2026 को एक आरक्षी ने पूछताछ के नाम पर उन्हें थाना जहानाबाद बुलाया। आरोप है कि वहां तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने उनके साथ अभद्रता की। एक मुख्य आरक्षी ने उनके जूते, चप्पल, बटुआ और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उन्हें बिना किसी अपराध के एक घंटा 17 मिनट तक हवालात में बंद रखा गया।
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अधिवक्ता का आरोप है कि उनके साथी अधिवक्ता के थाने पहुंचने पर दबाव बनाकर उनसे माफीनामा लिखवाया गया। इसके बाद उन्हें छोड़ा गया। साथ ही भविष्य में झूठे मुकदमे में फंसाकर उनका करियर बर्बाद करने की धमकी भी दी गई।
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वहीं, पुलिस की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत आख्या में बताया गया कि अधिवक्ता दो मोबाइल नंबरों की सीडीआर और सीएएफ आईडी उपलब्ध कराने का दबाव बना रहे थे। बिना अभियोग पंजीकृत हुए यह जानकारी देना संभव नहीं था। पुलिस के अनुसार समझाने पर अधिवक्ता ने स्वयं माफीनामा लिख दिया था।
दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया अधिवक्ता की स्वतंत्रता के उल्लंघन का मामला माना। न्यायालय ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना कराए जाने व नियमानुसार विवेचना कराने और आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। संवाद