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बौनी गांव में जानलेवा बना बुखार, दो और ने गंवाई जान
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बीसलपुर। पंचायत चुनाव के बाद ग्रामीण इलाकों में बुखार, खांसी, जुकाम के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। इसी बीच तहसील क्षेत्र के बौनी गांव में बुखार जानलेवा साबित हो रहा है। बीते 12 घंटे के भीतर दो और ग्रामीणों की बुखार से जान चली गई। दस दिन के भीतर नौ लोगों की मौत हो चुकी है। मगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी औपचारिकता निभा रहे हैं। कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। मौतों के बाद ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है।
गांव बौनी के पूर्व प्रधान अशोक कुमार ने बताया कि गांव में अप्रैल के अंतिम सप्ताह से बुखार फैलना शुरू हुआ। जब बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ी तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों - कर्मचारियों को सूचित किया था, मगर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बुखार से पीड़ित लोग झोलाछाप से इलाज कराने लगे। अभी अभी लगातार मौतें हो रही हैं। कई दिन से आ रहे बुखार के बाद रविवार शाम को गांव के ही सकटे लाल की पत्नी 70 वर्षीय हीराकली कश्यप की मौत हो गई।
सोमवार सुबह कालीचरन की पत्नी 75 वर्षीय नन्हीं देवी की भी मौत हो गई। दोनों को बुखार आ रहा था। इससे पहले 30 अप्रैल को राजेश वाल्मीकि, एक मई को साधूराम मौर्य, दो मई को सुशीला देवी, तीन मई को गोकरन लाल, हरसुमरन लाल, रामकुमारी, और नौ मई की सुबह हरीराम कश्यप की मौत हो गई थी। दस दिन में नौ लोग जान गंवा चुके हैं। चार मई को स्वास्थ्य विभाग ने दो एएनएम गांव में भेजकर औपचारिकता निभाई थी। यह भी रिपोर्ट अधिकारियों को दे दी गई थी कि गांव में कोई बुखार का मरीज नहीं है। मगर अभी भी लोग बुखार से मर रहे हैं। बीमार पड़े हुए हैं। दूसरे दिन भी एक टीम गांव गई थी। मगर वह भी ग्रामीणों से यह कहकर चली आई थी कि दिक्कत होने पर सीएचसी आ जाएं। इसके बाद 20 ग्रामीणों ने सीएचसी जाकर जांच कराई थी। इसी के साथ स्वास्थ्य विभाग निश्चिंत हो गया और कोई ठोस कदम नहीं उठाया। नतीजतन फिर मौत हो गई हैं।
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सीएचसी अधीक्षक बोलेे- खतरे की बात नहीं
बौनी गांव के कुछ लोगों ने सीएचसी आकर जांच भी कराई थी। इसमें तीन लोग मामूली रूप से कोरोना के लक्षण मिले थे। दवा देकर होम आइसोलेट कर दिया था। अब इस गांव में कोई खतरे की बात नहीं है। बीते 12 घंटे में दो लोगों के मरने की जानकारी नहीं है। मंगलवार को एक बार फिर टीम गांव भेजकर जानकारी कराई जाएगी। - डॉ. ठाकुरदास, सीएचसी अधीक्षक
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गांव बौनी के पूर्व प्रधान अशोक कुमार ने बताया कि गांव में अप्रैल के अंतिम सप्ताह से बुखार फैलना शुरू हुआ। जब बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ी तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों - कर्मचारियों को सूचित किया था, मगर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बुखार से पीड़ित लोग झोलाछाप से इलाज कराने लगे। अभी अभी लगातार मौतें हो रही हैं। कई दिन से आ रहे बुखार के बाद रविवार शाम को गांव के ही सकटे लाल की पत्नी 70 वर्षीय हीराकली कश्यप की मौत हो गई।
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सोमवार सुबह कालीचरन की पत्नी 75 वर्षीय नन्हीं देवी की भी मौत हो गई। दोनों को बुखार आ रहा था। इससे पहले 30 अप्रैल को राजेश वाल्मीकि, एक मई को साधूराम मौर्य, दो मई को सुशीला देवी, तीन मई को गोकरन लाल, हरसुमरन लाल, रामकुमारी, और नौ मई की सुबह हरीराम कश्यप की मौत हो गई थी। दस दिन में नौ लोग जान गंवा चुके हैं। चार मई को स्वास्थ्य विभाग ने दो एएनएम गांव में भेजकर औपचारिकता निभाई थी। यह भी रिपोर्ट अधिकारियों को दे दी गई थी कि गांव में कोई बुखार का मरीज नहीं है। मगर अभी भी लोग बुखार से मर रहे हैं। बीमार पड़े हुए हैं। दूसरे दिन भी एक टीम गांव गई थी। मगर वह भी ग्रामीणों से यह कहकर चली आई थी कि दिक्कत होने पर सीएचसी आ जाएं। इसके बाद 20 ग्रामीणों ने सीएचसी जाकर जांच कराई थी। इसी के साथ स्वास्थ्य विभाग निश्चिंत हो गया और कोई ठोस कदम नहीं उठाया। नतीजतन फिर मौत हो गई हैं।
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सीएचसी अधीक्षक बोलेे- खतरे की बात नहीं
बौनी गांव के कुछ लोगों ने सीएचसी आकर जांच भी कराई थी। इसमें तीन लोग मामूली रूप से कोरोना के लक्षण मिले थे। दवा देकर होम आइसोलेट कर दिया था। अब इस गांव में कोई खतरे की बात नहीं है। बीते 12 घंटे में दो लोगों के मरने की जानकारी नहीं है। मंगलवार को एक बार फिर टीम गांव भेजकर जानकारी कराई जाएगी। - डॉ. ठाकुरदास, सीएचसी अधीक्षक