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अफसर-किसान आंदोलन में व्यस्त, केंद्र प्रभारी और बिचौलिये मौज में

Fri, 25 Dec 2020 01:55 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 25 Dec 2020 01:55 AM IST
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farmers problem in dhan khareed
चार दिनों से धान लेकर खड़े राममूर्ति अपना धान दिखाकर बोले कि इसको क्यो नहीं तोला जा रहा। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। धान खरीद को तीन माह पूरे होने वाले हैं। अब भी क्रय केंद्रों पर खरीद पूरी तरह से पटरी पर नहीं लाई जा सकी है। अफसरों के किसान आंदोलन में व्यस्त होते ही क्रय केंद्र प्रभारी और बिचौलियों का खेल तेजी पकड़ने लगा है। आलम यह है कि कई दिनों तक ठंड में खुले आसमान के नीचे रात बिताने के बाद भी बिना सुविधा शुल्क दिए धान की तौल नहीं हो पा रही है। किसानों के अनुसार, शिकायत करने पर उनका धान कमी बताकर निरस्त कर दिया जाता है।
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एक अक्तूबर से जनपद में धान खरीद शुरू हुई थी। जिले का धान खरीद का लक्ष्य साढ़े 32 लाख क्विंटल था, जबकि अब तक 28 लाख क्विंटल खरीद हो चुकी है। शुरुआत में 165 क्रय केंद्रों पर खरीद हो रही थी, अब घटकर 95 रह गए हैं। इन दिनों कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन की सुगबुगाहट जनपद में भी है। आए दिन किसान सड़कों पर दिल्ली कूच करने के लिए निकल रहे हैं। ऐसे में पूरा प्रशासनिक अमला किसान आंदोलन में व्यस्त है, जिसका फायदा उठाकर अब बिचौलिये और क्रय केंद्र प्रभारियों की मनमानी दोबारा मुसीबत बन गई है। बिचौलिये जल्द तौल कराने के लिए सुविधा शुल्क खुलेआम मांगते नजर आ रहे हैं। प्रति क्विंटल 200 रुपये दे दिए तो ठीक, वरना टालमटोल की जा रही है। अधिकांश केंद्रों पर तौल के इंतजार में खड़े किसानों का यही दुखड़ा है, जो किसान रुपये देने में इनकार करता है या फिर शिकायत करता है तो उसका धान निरस्त कर दिया जाता है।
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इस तरह खेल रहे सुविधा शुल्क का खेल
एक जिम्मेदार ने बताया कि किसानों की धान भरी ट्रॉलियों को खड़ा करने के बाद किसान अपने धान संबंधी अभिलेख केंद्र प्रभारी के पास जमा कर देता है। फिर बिचौलिया धान लेकर आए किसान से बात शुरू करता है। धान में कमी बताकर रिजेक्ट होने का डर दिखाता है। फिर तौल कराने के लिए सुविधा शुल्क की डिमांड रख दी जाती है। यह रकम नकद ली जाती है। फिर न तो टोकन नंबर का सिस्टम लागू होता है, न ही क्वालिटी।
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दो सौ रुपये क्विंटल मांगा जा रहा सुविधा शुल्क
चार दिनों से धान भरी ट्रॉली लिए मंडी में हूं। टोकन नंबर 229 है। कल 227 नंबर चल रहा था। मगर मेरा नंबर नहीं आ सका है। 200 रुपये क्विंटल की मांग की जा रही है। अभिलेख भी नहीं लौटा रहे हैं। इससे दूसरी जगह भी धान नहीं तुलवा सकते। कोई सुनने वाला नहीं है। - राममूर्ति, किसान
रुपये कम करने को कहा तो दे दी धान निरस्त करने की धमकी
एक व्यापारी की ट्रॉली तीन बार धान लाकर तुलवा चुकी है। केंद्र पर कुछ लोग सुविधा शुल्क की मांग कर रहे हैं। सुविधा शुल्क की रकम कम करने को कहा था, मगर तैयार नहीं हुए। सुविधा शुल्क नहीं देने पर धान को रिजेक्ट करने की धमकी दी है। - ब्रह्मऔतार, किसान
बिचौलिया बार-बार आकर तय कर रहा सौदा
कई दिनों से मंडी में रुके हुए हैं। रोजाना धान तौल की बात हो रही है मगर तौला नहीं जा रहा। कड़ाके की ठंड में भूखे प्यासे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बिचौलिया आकर बार-बार सुविधा शुल्क की बात करता है। शिकायत करने पर धान रिजेक्ट करने की धमकी मिल रही है। - बाबूराम, किसान

धान खरीद पारदर्शिता से कराई जा रही है। उठान की वजह से कुछ स्थानों पर खरीद की गति धीमी थी। उसे भी सुधारा जा रहा है। बिचौलियों पर लगातार कार्रवाई की गई है। अगर कोई ऐसा करता है तो सीधे अफसरों को बताएं, सख्त एक्शन लिया जाएगा। - डॉ. अविनाश झा, डिप्टी आरएमओ
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