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लक्ष्य से अधिक खप गई यूरिया ...अब किसान खाद के लिए परेशान

Fri, 14 Aug 2020 12:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2020 12:52 AM IST
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farmers in trouble
पीलीभीत। जनपद में यूरिया खाद की लक्ष्य के सापेक्ष साढ़े दस फीसदी अधिक खपत हो चुकी है। इसके बाद साधन सहकारी समितियों और खाद केंद्रों के बाहर खाद लेने वाले किसानों की प्रतिदिन लाइनें लग रही हैं। कृषि अधिकारियों का कहना है कि सस्ती खाद होने के चलते किसान धान और गन्ना की फसलों में यूरिया का मानक से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। यह फसलों के लिए ही नहीं बल्कि जमीन के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
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जनपद में खरीफ सीजन का रकवा 1,43,431 हेक्टेयर है। इसमें 1,41,555 हेक्टेयर रकवे पर धान की फसल खड़ी है। जबकि गन्ने का रकवा भी ठीकठाक है। पिछले कुछ वर्षों में खरीफ फसलों का रकवा तो बढ़ा ही है, मगर इन फसलों में उवर्रकों का प्रयोग भी अंधाधुंध तरीके से होने लगा है। पहले जहां किसान धान की फसल में दो बार यूरिया का प्रयोग करते थे, वहीं अब वह धान में चार-चार बार यूरिया खाद डालने लगे हैं। किसानों की सोच यह है कि यूरिया के अधिक इस्तेमाल से उनकी फसलों का उत्पादन बेहतर होगा।
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लक्ष्य से अधिक खप चुकी यूरिया
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक खरीफ सीजन में यूरिया खाद वितरण का लक्ष्य 64816 मीट्रिक टन था। जनपद में अब तक 80116 मीट्रिक टन यूरिया आ चुकी है। इसमें 71630 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण भी किसानों को किया जा चुका है। यानी लक्ष्य के सापेक्ष साढ़े दस फीसदी अधिक यूरिया खप चुकी है। अभी 8400 मीट्रिक टन यूरिया का स्टाक भी है। इसके बावजूद किसानों के सामने यूरिया का संकट बरकरार है। सुबह होते ही किसान यूरिया खाद लेने के लिए साधन सहकारी समितियों और अन्य खाद केंद्रों के बाहर लाइन में खड़े नजर आ जाते हैं। बृहस्पतिवार को पूरनपुर के खाद केंद्रों के बाहर सुबह से ही किसानों की लंबी लाइन लगी देखी गई।
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यूरिया केे अधिक इस्तेमाल से घट रही जमीन की उर्वरा शक्ति
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस ढाका बताते हैं कि फसलों की पैदावार बढ़ाने के चक्कर में किसान खेतों में यूरिया और फसलों को बीमारी से बचाने के लिए कीटनाशकों का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। यूरिया में 45 फीसदी से अधिक नाइट्रोजन रहता है, जबकि फास्फोरस और पोटाश युक्त खाद का कम इस्तेमाल होने से धरती की उर्वरा शक्ति घटने लगती है। इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ता है। किसान मानक के अनुसार ही यूरिया खाद का प्रयोग करें। अधिक इस्तेमाल से कीट लगने और जमीन की उर्वरा शक्ति की संभावना अधिक बढ़ जाती है।
धान की फसल के लिए खाद की जरूरत है, मगर साधन सहकारी समितियों पर खाद मिल ही नहीं रही है। इससे पहले घंटों में लाइन में लगकर बमुश्किल खाद मिल सकी थी। -ब्रजेश मिश्रा, किसान, बेहटा
हर सीजन में खाद की किल्लत होती है। सरकारी आंकड़ों में खाद की सप्लाई खूब दिखाई जाती है। मगर, जब जरूरत होती है तो खाद के लिए कई दिन चक्कर लगाने पड़ते हैं। -मिजाजुद्दीन, किसान, माधोटांडा

जनपद में यूरिया की किसी तरह की किल्लत नहीं है। मानक से अधिक यूरिया वितरित की जा चुकी है। परेशानी यह है कि किसान निर्धारित मानक से अधिक अपनी फसलों में खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं। धान में दो बार यूरिया डालनी चाहिए। मगर, इसके बजाय किसान धान की फसल में चार बार खाद डालते हैं। इसी के चलते यह परेशानी खड़ी हो गई है। - डॉ. विनोद यादव, जिला कृषि अधिकारी
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