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गलत ऑपरेशन पर नेत्र सर्जन पर 2.70 लाख का जुर्माना
पीलीभीत, ब्यूरो
Updated Fri, 02 Sep 2016 11:49 PM IST
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आंख का गलत ऑपरेशन करने पर नेत्र सर्जन पर 2.70 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। जिला उपभोक्ता फोरम ने फैसला सुनाकर एक माह के भीतर पीड़ित महिला को रकम देने का आदेश दिया है।
शहर के बस्तीराम कंपाउंड निवासी प्रेम सिंह की पत्नी मायादेवी ने 26 अप्रैल, 2016 को जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें महिला ने बताया था कि उसने 10 दिसंबर, 2013 को नेत्र सर्जन डॉ. डीएन सिंह से बायीं आंख का मोतियाबिंद का आपरेशन कराया था। दूसरे दिन पट्टी खुलने पर आंख से कुछ दिखाई नहीं दिया। डॉक्टर से परामर्श कर बरेली, अलीगढ़ आदि कई जगहों पर पीड़ित ने अन्य चिकित्सकों को दिखाया, लेकिन नेत्र ज्योति वापस नहीं आई। पता चला कि गलत आपरेशन के चलते आंख की रोशनी चली गई। इसकी क्षतिपूर्ति की मांग की गई। आरोपी चिकित्सक ने रेटीना पर पहले से खून जमा होने की बात कहकर अपना बचाव शुरू कर दिया। उपभोक्ता फोरम में शिकायत पर सुनवाई की गई। अध्यक्ष रघुवर दयाल और सदस्य संगीता शुक्ला ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। इसमें नेत्र सर्जन डॉ. डीएन सिंह को आदेश दिया गया कि एक माह के भीतर पीड़ित महिला को 2.70 लाख रुपये बतौर क्षतिपूर्ति अदा करें। एक माह में धनराशि न देने पर नौ प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। पीड़ित महिला ने जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को न्याय की जीत बताया है।
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शहर के बस्तीराम कंपाउंड निवासी प्रेम सिंह की पत्नी मायादेवी ने 26 अप्रैल, 2016 को जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें महिला ने बताया था कि उसने 10 दिसंबर, 2013 को नेत्र सर्जन डॉ. डीएन सिंह से बायीं आंख का मोतियाबिंद का आपरेशन कराया था। दूसरे दिन पट्टी खुलने पर आंख से कुछ दिखाई नहीं दिया। डॉक्टर से परामर्श कर बरेली, अलीगढ़ आदि कई जगहों पर पीड़ित ने अन्य चिकित्सकों को दिखाया, लेकिन नेत्र ज्योति वापस नहीं आई। पता चला कि गलत आपरेशन के चलते आंख की रोशनी चली गई। इसकी क्षतिपूर्ति की मांग की गई। आरोपी चिकित्सक ने रेटीना पर पहले से खून जमा होने की बात कहकर अपना बचाव शुरू कर दिया। उपभोक्ता फोरम में शिकायत पर सुनवाई की गई। अध्यक्ष रघुवर दयाल और सदस्य संगीता शुक्ला ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। इसमें नेत्र सर्जन डॉ. डीएन सिंह को आदेश दिया गया कि एक माह के भीतर पीड़ित महिला को 2.70 लाख रुपये बतौर क्षतिपूर्ति अदा करें। एक माह में धनराशि न देने पर नौ प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। पीड़ित महिला ने जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को न्याय की जीत बताया है।
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