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Pilibhit News: पीलीभीत टाइगर रिजर्व में संरक्षण से लेकर बजट तक की होगी परख
Sat, 24 Oct 2026 12:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 24 Oct 2026 12:06 AM IST
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पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण और वन प्रबंधन की हकीकत परखने के लिए शनिवार से मैनेजमेंट इफेक्टिवनेस असेसमेंट (एमईई) की प्रक्रिया शुरू होगी। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्देश पर होने वाले इस मूल्यांकन में जंगल की सुरक्षा, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के विकास और उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। मूल्यांकन 26 अक्तूबर तक चलेगा।
एनटीसीए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के सहयोग से यह प्रक्रिया पूरी कराएगा। इसमें टाइगर रिजर्व में अब तक किए गए प्रबंधन कार्यों की धरातलीय स्थिति का आकलन होगा। वनकर्मियों की संख्या, बजट, वाहनों और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता के साथ उनका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। जंगल की सुरक्षा के इंतजाम भी मूल्यांकन के प्रमुख बिंदुओं में शामिल होंगे। टीम जंगल में पैदल गश्त, एम-स्ट्राइप ऐप के जरिये निगरानी और अग्नि से बचाव के उपायों की स्थिति परखेगी। इसके अलावा मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के प्रयासों, घास के मैदानों के विकास, वाटर होल्स के रखरखाव और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े कार्यों का भी आकलन किया जाएगा। इको-टूरिज्म गतिविधियों और नई प्रजातियों की खोज से संबंधित प्रयासों की जानकारी भी जुटाई जाएगी।
एमईई के तहत टाइगर रिजर्व को मिलने वाले बजट और उससे कराए गए कार्यों का ब्योरा भी तैयार किया जाएगा। निर्धारित मानकों के आधार पर सर्वे रिपोर्ट तैयार कर अक्तूबर के अंत तक एनटीसीए को भेजी जाएगी। डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि एमईई प्रक्रिया के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। मूल्यांकन 24 से 26 अक्तूबर तक पूरा किया जाएगा। निर्धारित प्रारूप पर सर्वे रिपोर्ट अक्तूबर के अंत तक एनटीसीए को भेज दी जाएगी। यह बाघों के प्राकृतिक आवासों में प्रबंधन और व्यवस्थाओं का विस्तृत सर्वे है।
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एनटीसीए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के सहयोग से यह प्रक्रिया पूरी कराएगा। इसमें टाइगर रिजर्व में अब तक किए गए प्रबंधन कार्यों की धरातलीय स्थिति का आकलन होगा। वनकर्मियों की संख्या, बजट, वाहनों और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता के साथ उनका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। जंगल की सुरक्षा के इंतजाम भी मूल्यांकन के प्रमुख बिंदुओं में शामिल होंगे। टीम जंगल में पैदल गश्त, एम-स्ट्राइप ऐप के जरिये निगरानी और अग्नि से बचाव के उपायों की स्थिति परखेगी। इसके अलावा मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के प्रयासों, घास के मैदानों के विकास, वाटर होल्स के रखरखाव और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े कार्यों का भी आकलन किया जाएगा। इको-टूरिज्म गतिविधियों और नई प्रजातियों की खोज से संबंधित प्रयासों की जानकारी भी जुटाई जाएगी।
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एमईई के तहत टाइगर रिजर्व को मिलने वाले बजट और उससे कराए गए कार्यों का ब्योरा भी तैयार किया जाएगा। निर्धारित मानकों के आधार पर सर्वे रिपोर्ट तैयार कर अक्तूबर के अंत तक एनटीसीए को भेजी जाएगी। डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि एमईई प्रक्रिया के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। मूल्यांकन 24 से 26 अक्तूबर तक पूरा किया जाएगा। निर्धारित प्रारूप पर सर्वे रिपोर्ट अक्तूबर के अंत तक एनटीसीए को भेज दी जाएगी। यह बाघों के प्राकृतिक आवासों में प्रबंधन और व्यवस्थाओं का विस्तृत सर्वे है।
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