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क्लीन चिट पाने के लिए अभियंताओं ने शुरू की कवायद
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Wed, 12 Apr 2017 09:18 PM IST
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श्ाारदा डैम में काम चल रहा है।
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शारदा डैम में पिचिंग लगाने के नाम पर हुए खेले को लेकर शुरू हुई जांच से बचने के लिए अभियंताओं ने नया फंडा अपनाया है। द्वितीय सब डिवीजन के अभियंताओं ने जहां जांच होनी है, वहां गड्ढों की खुदाई कर उसमें पूरा मैटेरियल डलवाना शुरू कर दिया है। साथ ही पत्थर के दाम अधिक होने के चलते उखड़े पत्थर को उठवा कर ही पिचिंग में लगवाया जा रहा है।
प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत बने शारदा डैम में जर्जर पिचिंग मरम्मत को छह करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर किया गया था, लेकिन आला अफसरों ने टेंडर प्रक्रिया में खेल कर अपने हितैषी ठेकेदारो को यह काम दे दिया। सरकार ने दो करोड़ रुपया रिलीज कर दिया था। डैम की द्वितीय सबडिवीजन के अभियंताओं ने पिचिंग लगाने के नाम पर ठेकेदारों के साथ मिलकर गोलमाल किया। ग्रामीणों व तत्कालीन विधायक पीतमराम ने गोलमाल की शिकायत शासन से की थी। इस पर शासन से एक नामित अधिकारी भी जांच करने आया था। इसमें डैम की द्वितीय सबडिवीजन में पिचिंग के नाम पर हुई घपलेबाजी पकड़ ली, लेकिन अभियंताओं के खुशामद के बाद जांच अधिकारी ने एक सप्ताह में काम को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए थे।
इधर प्रदेश में सरकार बदलने के बाद चल रही जांच में अब पुन: तेजी आई है। डर की वजह से द्वितीय सबडिवीजन के अभियंताओं ने जांच में कहीं गर्दन फंस न जाए, को लेकर नया फंडा अपनाया है। कुछ चुनिंदा स्थानों पर जहां होनी है वहां पांच से दस फिट चौड़ाई वाले क्षेत्र में गड्ढे खुदवाकर उसमें पूरा मैटेरियल (निर्माण सामग्री) डलवा रहे हैं, ताकि इस स्थान पर जांच कराकर पूरे क्षेत्र में लगाई गई पिचिंग को क्लीन चिट दिलाई जा सके। यही नहीं अनुबंध की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद अभियंता पैतरा खेलने से बाज नहीं आ रहे हैं। पत्थर के दाम अधिक होने के कारण अब अभियंताओं ने डैम की उखड़ी हुई पिचिंग के पत्थरों को ही दोबारा पिचिंगमें लगवाना शुरू कर दिया है। इन दिनों डैम के 16वें किमी का उखड़ा पत्थर इकट्ठा कर 14वें किमी पर डलवाया जा रहा है। इधर फिल्टर डालने के नाम पर जहां गड्ढे कराए जा रहे हैं वहां के बारे में अभियंताओं का कहना हैं कि ठेकेदारों को फिल्टर कितना डालना है, खुदाई कराकर जगह बताई जा रही है। बहरहाल शासन ने डैम की पिचिंग मामले में जांच के आदेश दिए हैं और इसमें अभियंताओं पर कभी भी गाज गिर सकती हैं।
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प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत बने शारदा डैम में जर्जर पिचिंग मरम्मत को छह करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर किया गया था, लेकिन आला अफसरों ने टेंडर प्रक्रिया में खेल कर अपने हितैषी ठेकेदारो को यह काम दे दिया। सरकार ने दो करोड़ रुपया रिलीज कर दिया था। डैम की द्वितीय सबडिवीजन के अभियंताओं ने पिचिंग लगाने के नाम पर ठेकेदारों के साथ मिलकर गोलमाल किया। ग्रामीणों व तत्कालीन विधायक पीतमराम ने गोलमाल की शिकायत शासन से की थी। इस पर शासन से एक नामित अधिकारी भी जांच करने आया था। इसमें डैम की द्वितीय सबडिवीजन में पिचिंग के नाम पर हुई घपलेबाजी पकड़ ली, लेकिन अभियंताओं के खुशामद के बाद जांच अधिकारी ने एक सप्ताह में काम को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए थे।
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इधर प्रदेश में सरकार बदलने के बाद चल रही जांच में अब पुन: तेजी आई है। डर की वजह से द्वितीय सबडिवीजन के अभियंताओं ने जांच में कहीं गर्दन फंस न जाए, को लेकर नया फंडा अपनाया है। कुछ चुनिंदा स्थानों पर जहां होनी है वहां पांच से दस फिट चौड़ाई वाले क्षेत्र में गड्ढे खुदवाकर उसमें पूरा मैटेरियल (निर्माण सामग्री) डलवा रहे हैं, ताकि इस स्थान पर जांच कराकर पूरे क्षेत्र में लगाई गई पिचिंग को क्लीन चिट दिलाई जा सके। यही नहीं अनुबंध की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद अभियंता पैतरा खेलने से बाज नहीं आ रहे हैं। पत्थर के दाम अधिक होने के कारण अब अभियंताओं ने डैम की उखड़ी हुई पिचिंग के पत्थरों को ही दोबारा पिचिंगमें लगवाना शुरू कर दिया है। इन दिनों डैम के 16वें किमी का उखड़ा पत्थर इकट्ठा कर 14वें किमी पर डलवाया जा रहा है। इधर फिल्टर डालने के नाम पर जहां गड्ढे कराए जा रहे हैं वहां के बारे में अभियंताओं का कहना हैं कि ठेकेदारों को फिल्टर कितना डालना है, खुदाई कराकर जगह बताई जा रही है। बहरहाल शासन ने डैम की पिचिंग मामले में जांच के आदेश दिए हैं और इसमें अभियंताओं पर कभी भी गाज गिर सकती हैं।
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