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शारदा नदी पर तटबंध बनेंगे
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Mon, 27 Mar 2017 10:47 PM IST
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नई सरकार बनने के बाद अब शारदा नदी से होने वाली तबाही रोकने के लिए तटबंध बनने की उम्मीद फिर जगी है। इसके पहले जब भाजपा सरकार आई थी तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने तटबंध की न केवल घोषणा की थी, बल्कि कार्यकाल के अंतिम समय में सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने तटबंध बनाने को बनबसा से लेकर लखीमपुर तक सर्वे भी कराया था। उस दौरान सर्वे में ढिलाई बरतने पर शारदा सागर खंड के एक अधिशासी अभियंता को भी निलंबित होना पड़ा था।
लखीमपुर तक होती है तबाही
शारदा नदी लगभग हर साल बरसात के कार्यकाल में कहीं दांए तो कहीं बांए किनारे पर तबाही मचाती रही है। यह तबाही पीलीभीत से लखीमपुर तक अधिक होती है। इससे न केवल लोग बेघर होते हैं, बल्कि सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि भी रेत के ढेर में तब्दील हो जाती है। इस तबाही को रोकने के लिए दोनों जनपदों के किसान लंबे अरसे से शारदा नदी पर तटबंध बनाने की मांग करते आ रहे हैं।
नहीं टिक सके अस्थाई कार्य
सपा के कार्यकाल में बाढ़ खंड डिवीजन ने तबाही रोकने के लिए नौजल्हा नंबर दो, रामनगर, नगरियाखुर्द कलां व नहरोसा क्षेत्र में अस्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए गए थे। इस वर्ष भी टाटरगंज सहित कई इलाकों में करोड़ों रुपये के बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए गए। इन कार्यों से इन इलाकों में बाढ़ से काफी हद तक राहत मिली, साथ ही नदी का कटान भी रुका, लेकिन यह सब अस्थाई कार्य थे, सो समय के साथ क्षतिग्रस्त भी हो गए।
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पूर्व में भी हो चुका है सर्वे
पूर्व में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने अपने कार्यकाल में तटबंध बनाने की घोषणा की थी। जिस पर सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने तटबंध बनाने के शारदा सागर के अधिशासी अभियंता के नेतृत्व में अभियंताओं की टीम गठित कर तटबंध बनाने को सर्वे के आदेश दिए थे। यह सर्वे बनबसा से लेकर पीलीभीत व लखीमपुर तक किया जाना था। सर्वे कार्य युद्धस्तर पर शुरू भी किया गया, लेकिन सर्वे का क्षेत्र काफी लंबा था। ऐसे में देरी होने पर सिंचाई मंत्री ने शारदा सागर के अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया। हालांकि उस समय विपक्ष ने इस सर्वे व कार्रवाई को मात्र चुनावी स्टंट माना था।
नई सरकार पर टिकी आस
अब केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद शारदा नदी पर तटबंध बनने की आस फिर से जागी है। यदि सरकार ने बजट स्वीकृत कर तटबंध बना दिया तो यहां हजारों एकड़ रेतीली भूमि पुन: कृषि योग्य हो सकती है। साथ ही बाढ़ नियंत्रण के नाम पर हर साल सरकार जो करोड़ों रुपया अस्थाई कार्यों में खर्च करती आ रही है, वह भी बच जाएगा। लोगों की निगाहें सरकार के तटबंध बनाने की पुरानी घोषणा पर टिकी हैं।
शारदा नदी पर बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जा रहे हैं। दो सालों से भूकटान भी रुका है। जो प्रोजेक्ट लंबित हैं, उन पर बजट लाने का प्रयास किया जा रहा हैं। ताकि बरसात से पूर्व कार्य कराए जा सकें।
- मिन्हाज अहमद अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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लखीमपुर तक होती है तबाही
शारदा नदी लगभग हर साल बरसात के कार्यकाल में कहीं दांए तो कहीं बांए किनारे पर तबाही मचाती रही है। यह तबाही पीलीभीत से लखीमपुर तक अधिक होती है। इससे न केवल लोग बेघर होते हैं, बल्कि सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि भी रेत के ढेर में तब्दील हो जाती है। इस तबाही को रोकने के लिए दोनों जनपदों के किसान लंबे अरसे से शारदा नदी पर तटबंध बनाने की मांग करते आ रहे हैं।
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नहीं टिक सके अस्थाई कार्य
सपा के कार्यकाल में बाढ़ खंड डिवीजन ने तबाही रोकने के लिए नौजल्हा नंबर दो, रामनगर, नगरियाखुर्द कलां व नहरोसा क्षेत्र में अस्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए गए थे। इस वर्ष भी टाटरगंज सहित कई इलाकों में करोड़ों रुपये के बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए गए। इन कार्यों से इन इलाकों में बाढ़ से काफी हद तक राहत मिली, साथ ही नदी का कटान भी रुका, लेकिन यह सब अस्थाई कार्य थे, सो समय के साथ क्षतिग्रस्त भी हो गए।
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पूर्व में भी हो चुका है सर्वे
पूर्व में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने अपने कार्यकाल में तटबंध बनाने की घोषणा की थी। जिस पर सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने तटबंध बनाने के शारदा सागर के अधिशासी अभियंता के नेतृत्व में अभियंताओं की टीम गठित कर तटबंध बनाने को सर्वे के आदेश दिए थे। यह सर्वे बनबसा से लेकर पीलीभीत व लखीमपुर तक किया जाना था। सर्वे कार्य युद्धस्तर पर शुरू भी किया गया, लेकिन सर्वे का क्षेत्र काफी लंबा था। ऐसे में देरी होने पर सिंचाई मंत्री ने शारदा सागर के अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया। हालांकि उस समय विपक्ष ने इस सर्वे व कार्रवाई को मात्र चुनावी स्टंट माना था।
नई सरकार पर टिकी आस
अब केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद शारदा नदी पर तटबंध बनने की आस फिर से जागी है। यदि सरकार ने बजट स्वीकृत कर तटबंध बना दिया तो यहां हजारों एकड़ रेतीली भूमि पुन: कृषि योग्य हो सकती है। साथ ही बाढ़ नियंत्रण के नाम पर हर साल सरकार जो करोड़ों रुपया अस्थाई कार्यों में खर्च करती आ रही है, वह भी बच जाएगा। लोगों की निगाहें सरकार के तटबंध बनाने की पुरानी घोषणा पर टिकी हैं।
शारदा नदी पर बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जा रहे हैं। दो सालों से भूकटान भी रुका है। जो प्रोजेक्ट लंबित हैं, उन पर बजट लाने का प्रयास किया जा रहा हैं। ताकि बरसात से पूर्व कार्य कराए जा सकें।
- मिन्हाज अहमद अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड