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Pilibhit News: तराई में हाथियों को मिलेगा अपना कॉरिडोर, तराई एलीफैंट रिजर्व को राज्य सरकार की मिली मंजूरी
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हाथियों के झुंड का फाइल फोटो।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। तराई के जंगलों में अब बाघों के साथ हाथियों का भी प्राकृतिक संरक्षण हो सकेगा। केंद्र सरकार के बाद बृहस्पतिवार को प्रदेश सरकार ने भी तराई एलीफैंट रिजर्व को स्थापना की मंजूरी दे दी है। इसमें दुधवा, कतर्नियाघाट के अलावा पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का भी 73024.98 हेक्टेयर जंगल शामिल किया गया है। तराई एलीफैंट रिजर्व प्रदेश का दूसरा और देश का 33वां एलीफैंट रिजर्व होगा।
पीटीआर की बराही रेंज की सीमा नेपाल की शुक्लाफांटा सेंचुरी से मिली हुई है। इसके चलते पीलीभीत का जंगल बाघ समेत अन्य वन्यजीवों के अलावा हाथियों के लिए भी शुरू से मुफीद रहा। बराही रेंज के लग्गा-भग्गा से लेकर दुधवा टाइगर रिजर्व तक का जंगल हाथियों का कॉरिडोर माना जाता है। कई वर्षों तक हाथी इन इलाकों में विचरण करते रहे, लेकिन समय से साथ आए बदलाव में कॉरिडोर खेती में तब्दील हो गया। जंगल क्षेत्र को उजाड़कर खेती करनी शुरू कर दी गई।
इसके बाद भी नेेेपाल की ओर से हाथियों के आने का सिलसिला बंद नहीं हो सका। कॉरिडोर नष्ट होने से हाथी रास्ता भटकने लगे। पिछले कुछ सालों से स्थिति बिगड़ने लगी। इसके बाद विभागीय स्तर से रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी गई। 22 अक्तूबर, 2022 को केंद्र पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने ट्विटर अकाउंट से तराई एलीफैंट रिजर्व को केंद्र की मंजूरी मिलने की जानकारी साझा की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से पत्राचार तेज कर दिए थे। बृहस्पतिवार को राज्यपाल की सहमति के बाद प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
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चार जनपदों का 307235.80 हेक्टेयर क्षेत्र होगा शामिल
प्रदेश सरकार ने तराई एलीफैंट रिजर्व के लिए पीलीभीत के अलावा लखीमपुर, शाहजहांपुर के अलावा बहराइच जनपद के जंगलों को शामिल किया है। इसमें दुधवा टाइगर रिजर्व, शाहजहांपुर वन प्रभाग का बफर जोन, कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के अलावा पीलीभीत टाइगर रिजर्व का 307235.80 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल किया गया है। इसमें पीटीआर का 73024.98 हेक्टेयर दायरा शामिल हैं।
प्रदेश सरकार ने तराई एलीफैंट की प्रस्तावना को मंजूरी दे दी है। इसमें पीलीभीत टाइगर रिजर्व का 73024.98 हेक्टेयर हिस्सा शामिल किया गया। यह हाथियों के संरक्षण के लिए बेहतर उपलब्धि साबित होगा। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेटर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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पीटीआर की बराही रेंज की सीमा नेपाल की शुक्लाफांटा सेंचुरी से मिली हुई है। इसके चलते पीलीभीत का जंगल बाघ समेत अन्य वन्यजीवों के अलावा हाथियों के लिए भी शुरू से मुफीद रहा। बराही रेंज के लग्गा-भग्गा से लेकर दुधवा टाइगर रिजर्व तक का जंगल हाथियों का कॉरिडोर माना जाता है। कई वर्षों तक हाथी इन इलाकों में विचरण करते रहे, लेकिन समय से साथ आए बदलाव में कॉरिडोर खेती में तब्दील हो गया। जंगल क्षेत्र को उजाड़कर खेती करनी शुरू कर दी गई।
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इसके बाद भी नेेेपाल की ओर से हाथियों के आने का सिलसिला बंद नहीं हो सका। कॉरिडोर नष्ट होने से हाथी रास्ता भटकने लगे। पिछले कुछ सालों से स्थिति बिगड़ने लगी। इसके बाद विभागीय स्तर से रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी गई। 22 अक्तूबर, 2022 को केंद्र पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने ट्विटर अकाउंट से तराई एलीफैंट रिजर्व को केंद्र की मंजूरी मिलने की जानकारी साझा की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से पत्राचार तेज कर दिए थे। बृहस्पतिवार को राज्यपाल की सहमति के बाद प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
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चार जनपदों का 307235.80 हेक्टेयर क्षेत्र होगा शामिल
प्रदेश सरकार ने तराई एलीफैंट रिजर्व के लिए पीलीभीत के अलावा लखीमपुर, शाहजहांपुर के अलावा बहराइच जनपद के जंगलों को शामिल किया है। इसमें दुधवा टाइगर रिजर्व, शाहजहांपुर वन प्रभाग का बफर जोन, कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के अलावा पीलीभीत टाइगर रिजर्व का 307235.80 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल किया गया है। इसमें पीटीआर का 73024.98 हेक्टेयर दायरा शामिल हैं।
प्रदेश सरकार ने तराई एलीफैंट की प्रस्तावना को मंजूरी दे दी है। इसमें पीलीभीत टाइगर रिजर्व का 73024.98 हेक्टेयर हिस्सा शामिल किया गया। यह हाथियों के संरक्षण के लिए बेहतर उपलब्धि साबित होगा। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेटर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व