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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Electricity in the rain Is not a death

बारिश में बिजली  न बन जाए मौत

Fri, 08 Jul 2016 11:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत Updated Fri, 08 Jul 2016 11:07 PM IST
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बारिश का मौसम आ चुका है। ऐसे में बिजली कटौती और फॉल्ट की समस्या का सामना तो जिलेवासियों को करना ही है। पर चिंताजनक बात यह है कि बिजली आने पर जानलेवा न साबित हो जाए। विभाग की ओर से की गई अनदेखी बरसात में हादसों का सबब बन सकती है। इससे पूरी तरह से इंकार नहीं किया जा सकता। जर्जर विद्युत पोल, लटकते तारों से बारिश के दौरान खतरा बना हुआ है। शहर से लेकर देहात तक अव्यवस्थाएं हावी है। 
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वैसे तो लोगों के सामने बिजली की समस्या कोई नई बात नहीं है। पर हालात को देखते हुए एक सवाल खड़ा है। बिजली न आई तो आफत, आ गई तो मौत न बन जाए। जी हां विभागीय अधिकारी भले ही अपने इंतजामात को दुरुस्त बताएं , लेकिन सड़कों पर हकीकत कुछ और ही है। विभाग की लापरवाही तो है ही, लेकिन कई स्थानों पर हाल ही में बनाए गए मकानों में उपभोक्ताओं ने खुद मुसीबत को करीब बुला लिया है। मकान का झज्जा आगे की ओर बढ़ा लिया, जिससे पहले से गुजर रही विद्युत लाइन प्रतिष्ठानों को छूकर गुजर रही हैं, जिससे कभी भी हादसा घटित हो सकता है। 
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पेड़ों से होकर गुजरते हैं बिजली के तार 
टनकपुर हाइवे पर आफीसर्स कालोनी, सिविल लाइन चौकी के आसपास का इलाका हो या फिर  मुख्य रेलवे स्टेशन रोड पर सुनगढ़ी, चावलस चौराहा का। सभी जगहों पर बिजली के तार पेड़ों के बीच से होकर गुजर रहे है। इसके अलावा देहात क्षेत्रों में भी हाल इससे कम नहीं है। ऐसे में बरसात के मौसम में हादसे की आशंका भी बनी रहती है। बारिश के बाद स्पार्किंग होती रहती है। तो कई तारों मेें आग भी लग जाती है। जिससे वह टूटकर गिरते है और हादसे होता है। इस ओर समय रहते कोई ध्यान नहीं दिया गया है। 
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हवा में लहराती है मौत  
अक्सर देखा गया है कि बिजली के झूलते तार लोगों की मौत का कारण बन जाते है। बरसात के समय में इनसे निकलने वाला करंट किसी जानलेवा मुसीबत से कम नहीं है। इनके सुधार के लिए कई बार आवाज उठाई गई। विभाग की ओर से काम कराने के दावे भी किए गए, लेकिन अभी भी तमाम जगहों पर हवा में मौत झूल रही है। दूधिया मंदिर रोड, नखासा, तुलाराम, लालरोड, काला मंदिर, बाग गुलशेर खां, डालचंद सहित दर्जनों मोहल्लों के लोग जर्जर तारों से परेशान है।  यही नहीं बरेली गेट के पास एक गली में रखा ट्रांसफार्मर और उससे निकलने वाले तार लोगों के सिर को छूकर गुजरते हैं, जबकि यहां से चंद कदमों की दूरी पर स्कूल है। 

हो चुके हैं दुखद हादसे 
विभागीय अनदेखी से हादसे भी कई बार हुए है। हाल ही में एक दिन पूर्व बुधवार को माधोटांडा के गांव खासपुर में कक्षा तीन के छात्र आकाश को पेड़ के बीच होकर गुजर रही हाइटेंशन लाइन से करंट लगा था, जिसकी हालत नाजुक बनी हुई है। पिछली बरसात में ठेका चौकी से अल्लाहू मियां मजार शरीफ की ओर जाने वाले रास्ते पर बने ठेकेदार के मकान में करंट उतर आया था। करंट मकान के नजदीक से छूकर गुजरती विद्युत लाइन से पहुंचा। जिसमें कई लोग घायल भी हुए थे। इसके अलावा पूरनपुर, माधौटांडा, बरखेड़ा में भी हादसे हुए है। बिलगवां , पिपरा गांव में भी कई बार गांव में करंट उतर चुका है। इसके अलावा लकड़ी मंडी रोड, जाटो चौराहा, ईमली चौराहा, राजीव कालोनी, निरंजनकुंज, रामा कालोज रोड, रूपपुर आदि क्षेत्रों में विद्युत पोल में करंट आने से पशुओं की मौत भी हो चुकी है, तो कई लोग करंट से झुलसे है। 

किसे कितना मिलता है मुआवजा
बिजली विभाग की ओर से करंट से मरने वाला चाहे पशु हो या फिर इंसान। सभी को मुआवजा देने का प्रावधान है। करंट से मरने वाले लोगों के घर वालों को पहले एक लाख की रकम बतौर मुआवजा दी जाती थी, लेकिन अब इसको बढ़ाकर दो लाख कर दिया गया है। दुधारू पशुओं की मौत पर पांच हजार से बढ़ाकर मुआवजे की रकम 20 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा चोटों के आधार पर धनराशि दी जाती है। 

मुआवजा पाने का ये है तरीका 
बिजली विभाग से मुआवजा पाने के लिए सर्व प्रथम शव का पोस्टमार्टम कराना जरूरी है। इसके घटना की एफआईआर संबंधित थाने में दर्ज कराई जानी चाहिए। इसके बाद विद्युत सुरक्षा निदेशालय और विभागीय रिपोर्ट का आंकलन करने के बाद जिला स्तर पर मौजूद अधिकारी रिपोर्ट अनुमति के लिए जिला अधिकारी को भेजते है। अनुमति मिलने के बाद मुख्यालय से रुपये की मांग की जाती है। मुआवजे की रकम विभाग से मिलते ही मरने वाले के वारिस के नाम चेक के जरिए दी जाती है। 


हादसों की रोकथाम के लिए विभाग की ओर से पुख्ता कदम उठाए गए है। कई जगहों पर लोगों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए बिजली की तारों से सटाकर तो कही नीचे की ओर अपने भवनों का निर्माण करा लिया है। इसको लेकर नोटिस भी विभाग की ओर से संबंधित लोगों को भेजे गए है। क्षमता से अधिक कनेक्शनों को लेकर भी कार्रवाई की गई है। 
- लोकेंद्र बहादुर सिंह, अधिशासी अभियंता (विद्युत विभाग) 
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