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बाघ के हमले में बुजुर्ग किसान की मौत

Tue, 23 Feb 2016 11:45 PM IST
गजरौला/पीलीभीत।
गजरौला/पीलीभीत। Updated Tue, 23 Feb 2016 11:45 PM IST
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Elderly farmer killed in tiger attack
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला रेंज में जंगल किनारे गाय चराने गए एक किसान को बाघ ने हमला कर मार डाला। बाघ किसान को खींचकर जंगल में ले जा रहा था लेकिन उसके साथी के शोर मचाने पर आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया तो किसान के शव को छोड़कर भाग गया। किसान के परिवार ने घटना की सूचना पुलिस और वन विभाग के लोगों को दी। वन विभाग के अधिकारियों ने भी घटना स्थल का दौरा कर पीड़ित परिवार से मुलाकात की है।
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माला रेंज के जंगल से सटे गांव अशोक नगर कॉलोनी निवासी सुपद सरकार (65) मंगलवार करीब तीन बजे अपने साथी सुबल मास्टर (60) के साथ गांव से सटे जंगल किनारे गाय चराने गया था। बताया जाता है कि इसी दौरान जंगल की ओर से झाड़ियों में छुपे बाघ ने सुपद पर हमला कर दिया। सुपद के चिल्लाने पर कुछ दूरी पर मौजूद सुबल मास्टर की नजर उस पर पड़ी तो वह भी चिल्लाने लगे। बताया जाता है कि इस बीच बाघ सुपद सरकार की गर्दन मुंह में दबाकर जंगल की ओर घसीट कर माला नदी की ओर ले जाने लगा। हिम्मत जुटा कर सुबल मास्टर भी शोर मचाते हुए कुछ दूरी तक बाघ के पीछे गया, लेकिन दहशत के चलते कुछ दूरी पर बेहोश हो गया। शोर सुनकर इतने में आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग घटना स्थल की ओर भागे। माला नदी के करीब पहुंचे तो बाघ सुपद को छोड़ भाग गया। ग्रामीणों ने पास पहुंचकर देखा तो सुपद सरकार की मौत हो चुकी थी। उधर बेहोश सुबल मास्टर के चेहरे आदि पर पानी की छींटे डाल कर होश में लाया गया।
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मृतक किसान सवा एकड़ भूमि का स्वामी है। उसके पुत्र संजीव सरकार ने गजरौला पुलिस को घटना की तहरीर दे दी है। सूचना पर फारेस्टगार्ड राम भारत यादव व डीएफओ कैलाश प्रकाश ने भी मौके पर पहुंच स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
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मैं स्वयं टीम के साथ मौके पर गया था। प्रथम दृष्ट्या जंगल के भीतर गाय चराते समय घटना घटित होना प्रतीत हो रही है। मामले की जांच कराई जा रही है। मृतक के परिवार को तात्कालिक सहायता के रूप में 10 हजार रूपये दे दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के बाद मुआवजा आदि की कार्रवाई की जाएगी।

- कैलाश प्रकाश, डीएफओ टाइगर रिजर्व
 
मुंह व गर्दन पर है घाव के निशान
बाघ के हमले से मारे गए किसान सुपद सरकार के चेहरे और गर्दन पर बाघ के हमले के निशान हैं। सुपद के साथी सुबल मास्टर की मानें तो वृद्ध सुपद पर बाघ ने पहले पीछे से वार किया था, जिससे उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला, लेकिन इसके बाद भी वह चीखे चिल्लाए व कुछ देर हौसला भी दिखाया, लेकिन दूसरे झटके में बाघ ने उनकी गर्दन अपने मुंह में ले ली। इसके बाद वह बेबस हो गए और बाघ उन्हें घसीटता जंगल में ले जाने लगा। 
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