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आठ साल से नहीं है राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में डॉक्टर
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Fri, 19 May 2017 10:47 PM IST
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अस्पपताला
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गांव खनंका उचसिया के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में पिछले आठ वर्षों से डॉक्टर की तैनाती नहीं है। अस्पताल में स्टॉफ और संसाधनों का भी अभाव है। इस वजह से क्षेत्र के लोगों को इस अस्पताल से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
गांव खनंका उचसिया का राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल एक छोटे से भवन में चल रहा है। भवन में स्थान की काफी कमी होने के कारण सारी व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल में फर्नीचर के नाम पर केवल दो कुर्सियां हैं। मरीजों को बैठने के लिए बेंच तक नहीं है। अस्पताल में बिजली के पंखे तो लगे हैं लेकिन कनेक्शन न होने के कारण पंखे शोपीस बने हुए हैं। बिजली न होने के कारण आजकल भीषण गर्मी में अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है। अस्पताल की चहारदीवारी न होने के कारण आवारा पशु परिसर में विचरण करते रहते हैं, जो परिसर में गंदगी भी करते हैं और इन पशुओं से मरीजों को खतरा भी बना रहता है। अस्पताल के चारों ओर काफी गंदगी है। अस्पताल के चिकित्साधिकारी जितेंद्र कुमार का तबादला आठ वर्ष पूर्व पूर्वांचल को हो गया था। उसके बाद से अभी तक किसी चिकित्साधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। अस्पताल में मानक के अनुरूप पांच लोग होने चाहिए लेकिन पिछले काफी समय से यह अस्पताल फार्मेसिस्ट और सफाई कर्मचारी के सहारे ही चल रहा है। बाकी तीनों पद लंबे अरसे से खाली पड़े हैं। अस्पताल की इस बदहाली के कारण ही रोजाना बमुश्किल 15 से 20 मरीज ही आते हैं। यद्यपि इस बीच जागरूक लोगों ने विभागीय उच्चाधिकारियों का ध्यान इस ओर कई बार आकर्षित कराया लेकिन उच्चाधिकारी सुनने को तैयार नहीं है, जिससे लोगों में रोष व्याप्त है।
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गांव खनंका उचसिया का राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल एक छोटे से भवन में चल रहा है। भवन में स्थान की काफी कमी होने के कारण सारी व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल में फर्नीचर के नाम पर केवल दो कुर्सियां हैं। मरीजों को बैठने के लिए बेंच तक नहीं है। अस्पताल में बिजली के पंखे तो लगे हैं लेकिन कनेक्शन न होने के कारण पंखे शोपीस बने हुए हैं। बिजली न होने के कारण आजकल भीषण गर्मी में अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है। अस्पताल की चहारदीवारी न होने के कारण आवारा पशु परिसर में विचरण करते रहते हैं, जो परिसर में गंदगी भी करते हैं और इन पशुओं से मरीजों को खतरा भी बना रहता है। अस्पताल के चारों ओर काफी गंदगी है। अस्पताल के चिकित्साधिकारी जितेंद्र कुमार का तबादला आठ वर्ष पूर्व पूर्वांचल को हो गया था। उसके बाद से अभी तक किसी चिकित्साधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। अस्पताल में मानक के अनुरूप पांच लोग होने चाहिए लेकिन पिछले काफी समय से यह अस्पताल फार्मेसिस्ट और सफाई कर्मचारी के सहारे ही चल रहा है। बाकी तीनों पद लंबे अरसे से खाली पड़े हैं। अस्पताल की इस बदहाली के कारण ही रोजाना बमुश्किल 15 से 20 मरीज ही आते हैं। यद्यपि इस बीच जागरूक लोगों ने विभागीय उच्चाधिकारियों का ध्यान इस ओर कई बार आकर्षित कराया लेकिन उच्चाधिकारी सुनने को तैयार नहीं है, जिससे लोगों में रोष व्याप्त है।
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