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मरीजों! सरकारी अस्पताल की दवाओं पर आंख मूंदकर भरोसा मत करना
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पीलीभीत। जिला अस्पताल को भेजी गईं मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन की आठ दवाएं अधोमानक निकली हैं। मामले का खुलासा होने पर सीएमएस ने सभी दवाएं मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को वापस भिजवा दी हैं।
शासन से सीएमओ की डिमांड पर भेजी गई इन दवाओं में करोड़ों या अरबों का गोलमाल हो सकता है क्योंकि इस कंपनी की दवाएं पूरे प्रदेश के जिला अस्पतालों को भी भेजी गई हैं। हालांकि अधिकारी इन दवाओं के उपलब्ध न होने पर स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी तरह का फर्क नहीं पड़ने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। इन दवाओं की जगह वैकल्पिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के द्वारा की जाती है। प्रदेश में पीलीभीत समेत 75 जिलों के सभी सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति करने के लिए भारी मात्रा में दवा की जरूरत होती है। आपूर्ति करने वाली कंपनियां पांच से छह बैच की दवाओं का उत्पादन करती हैं। अनुबंध की शर्त के अनुसार यदि किसी दवा के दो बैच अधोमानक पाए जाते हैं तो सभी बैचों की दवा कंपनी को लौटा दी जाती है। इसके बदले कंपनी को उतनी ही संख्या में मानक गुणवत्ता वाली दवाएं देनी पड़ती हैं और उसके खिलाफ वैधानिक या आर्थिक दंड की कार्रवाई का भी प्रावधान है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इन अधोमानक दवाओं की सप्लाई मात्र जिला अस्पताल में ही की गई है। जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉॅ. रतनपाल सिंह सुमन ने बताया कि आठ दवाओं के सेंपल अधोमानक पाए गए थे। मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन ने इस आधार पर सप्लाई की गई दवाओं को वापस मंगा लिया है। कंपनी की ओर से 270 प्रकार की दवाओं की आपूर्ति की गई है। इनमें से कुछ दवाएं एक दूसरे के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होती हैं।
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सीएचसी पीएचसी में नहीं हुई सप्लाई
ड्रग वेयर हाउस के फार्मासिस्ट एचएन सिंह ने बताया कि कॉरपोरेशन द्वारा जारी की गई अधोमानक दवाओं की आपूर्ति यहां नहीं की गई थी। हालांकि इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ था।
इन मरीजों को होती है इन दवाओं की जरूरत
अधोमानक पाई गई दवाओं को अस्पताल में भर्ती होने वाले मलेरिया पीड़ित, हृदयरोगियों और माइनर सर्जरी के मरीजों के लिए जरूरत पड़ती है। इसी तरह से ओपीडी में आने वाले घायल मरीज, त्वचा रोगी, आंखों के संक्रमण से पीड़ितों को भी वैकल्पिक दवाओं के जरिए इलाज दिया जा रहा है।
ये दवाएं पाई गई अधोमानक
- लिग्नोकेन जेल-
प्रयोग- शरीर के किसी हिस्से को सुन्न करने के काम आती है। इस दवा का उपयोग अधिकतर पाइल्स में किया जाता है।
- इंजेक्शन आर्टिसुनेट-
प्रयोग- ये इंजेक्शन मलेरिया बुखार में दिया जाता है।
- इंजेक्शन डी बुटामिन-
प्रयोग- कैल्शियम बढ़ाने के लिए ये इंजेक्शन दिया जाता है। इससे शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं।
- टेबलेट इरिथ्रोमाइसिन-
प्रयोग- ये एंटी बॉयोटिक है। फोड़ा फुंसी में इंफेक्शन पर दिया जाता है।
- लिग्नोकेन विद एड्रिनेलिन-
प्रयोग- छोटे-मोटे ऑपरेशन पर शरीर के किसी हिस्से को सुन्न करने या दांत सुन्न करने के लिए दी जाती है।
- इरिथ्रोमाइसिन-
प्रयोग- एंटी बॉयोटिक
- कार्बाक्सी मेथाइल सेल्यूलोज आई ड्रॉप
प्रयोग- आंख न सूखने के लिए ये दवा दी जाती है।
- नियामाइसिन पॉलीमिस्किसन पॉवडर-
प्रयोग- फोड़ा फुंसी को ठीक करने के लिए एंटी बॉयोटिक के तौर पर ।
दवा का नाम/कंपनी
आर्टिसुनेट- एएनएजी लाइफ साइसेंज
कार्बाक्सी मेथाइल सेल्यूालोज आई ड्राप- पुष्कर फार्मा
लिग्नोकेन जेल- ग्रैपस फार्मा
इरिथ्रोमाइसिन-ओमेगा फार्मा
लिग्नोकेन विद् एड्रिनेलिन और डो बूटामिन- हिमालया ड्रग
जो दवाएं लौटाई गई हैं उसके विकल्प उपलब्ध हैं। इसीलिए मरीजों को कोई समस्या नहीं होगी। जो दवाएं वापस भेजी गई हैं, उनका नया स्टाक जल्द आने की उम्मीद है। मरीजों को किसी तरह की समस्या नहीं होने दी जाएगी।
डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, सीएमएस, जिला पुरुष अस्पताल
पीलीभीत। यदि दवाएं अधोमानक पाई गई हैं तो इससे मरीज को कोई नुकसान तो नहीं होगा, लेकिन उसको फायदा नहीं होगा। अधोमानक क्वालिटीवाइज पाया गया है या फिर उसकी मात्रा भी स्पष्ट होना चाहिए।
डॉ. जेडी गंगवार, एमबीबीएस
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शासन से सीएमओ की डिमांड पर भेजी गई इन दवाओं में करोड़ों या अरबों का गोलमाल हो सकता है क्योंकि इस कंपनी की दवाएं पूरे प्रदेश के जिला अस्पतालों को भी भेजी गई हैं। हालांकि अधिकारी इन दवाओं के उपलब्ध न होने पर स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी तरह का फर्क नहीं पड़ने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। इन दवाओं की जगह वैकल्पिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
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सरकारी अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के द्वारा की जाती है। प्रदेश में पीलीभीत समेत 75 जिलों के सभी सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति करने के लिए भारी मात्रा में दवा की जरूरत होती है। आपूर्ति करने वाली कंपनियां पांच से छह बैच की दवाओं का उत्पादन करती हैं। अनुबंध की शर्त के अनुसार यदि किसी दवा के दो बैच अधोमानक पाए जाते हैं तो सभी बैचों की दवा कंपनी को लौटा दी जाती है। इसके बदले कंपनी को उतनी ही संख्या में मानक गुणवत्ता वाली दवाएं देनी पड़ती हैं और उसके खिलाफ वैधानिक या आर्थिक दंड की कार्रवाई का भी प्रावधान है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इन अधोमानक दवाओं की सप्लाई मात्र जिला अस्पताल में ही की गई है। जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉॅ. रतनपाल सिंह सुमन ने बताया कि आठ दवाओं के सेंपल अधोमानक पाए गए थे। मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन ने इस आधार पर सप्लाई की गई दवाओं को वापस मंगा लिया है। कंपनी की ओर से 270 प्रकार की दवाओं की आपूर्ति की गई है। इनमें से कुछ दवाएं एक दूसरे के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होती हैं।
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सीएचसी पीएचसी में नहीं हुई सप्लाई
ड्रग वेयर हाउस के फार्मासिस्ट एचएन सिंह ने बताया कि कॉरपोरेशन द्वारा जारी की गई अधोमानक दवाओं की आपूर्ति यहां नहीं की गई थी। हालांकि इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ था।
इन मरीजों को होती है इन दवाओं की जरूरत
अधोमानक पाई गई दवाओं को अस्पताल में भर्ती होने वाले मलेरिया पीड़ित, हृदयरोगियों और माइनर सर्जरी के मरीजों के लिए जरूरत पड़ती है। इसी तरह से ओपीडी में आने वाले घायल मरीज, त्वचा रोगी, आंखों के संक्रमण से पीड़ितों को भी वैकल्पिक दवाओं के जरिए इलाज दिया जा रहा है।
ये दवाएं पाई गई अधोमानक
- लिग्नोकेन जेल-
प्रयोग- शरीर के किसी हिस्से को सुन्न करने के काम आती है। इस दवा का उपयोग अधिकतर पाइल्स में किया जाता है।
- इंजेक्शन आर्टिसुनेट-
प्रयोग- ये इंजेक्शन मलेरिया बुखार में दिया जाता है।
- इंजेक्शन डी बुटामिन-
प्रयोग- कैल्शियम बढ़ाने के लिए ये इंजेक्शन दिया जाता है। इससे शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं।
- टेबलेट इरिथ्रोमाइसिन-
प्रयोग- ये एंटी बॉयोटिक है। फोड़ा फुंसी में इंफेक्शन पर दिया जाता है।
- लिग्नोकेन विद एड्रिनेलिन-
प्रयोग- छोटे-मोटे ऑपरेशन पर शरीर के किसी हिस्से को सुन्न करने या दांत सुन्न करने के लिए दी जाती है।
- इरिथ्रोमाइसिन-
प्रयोग- एंटी बॉयोटिक
- कार्बाक्सी मेथाइल सेल्यूलोज आई ड्रॉप
प्रयोग- आंख न सूखने के लिए ये दवा दी जाती है।
- नियामाइसिन पॉलीमिस्किसन पॉवडर-
प्रयोग- फोड़ा फुंसी को ठीक करने के लिए एंटी बॉयोटिक के तौर पर ।
दवा का नाम/कंपनी
आर्टिसुनेट- एएनएजी लाइफ साइसेंज
कार्बाक्सी मेथाइल सेल्यूालोज आई ड्राप- पुष्कर फार्मा
लिग्नोकेन जेल- ग्रैपस फार्मा
इरिथ्रोमाइसिन-ओमेगा फार्मा
लिग्नोकेन विद् एड्रिनेलिन और डो बूटामिन- हिमालया ड्रग
जो दवाएं लौटाई गई हैं उसके विकल्प उपलब्ध हैं। इसीलिए मरीजों को कोई समस्या नहीं होगी। जो दवाएं वापस भेजी गई हैं, उनका नया स्टाक जल्द आने की उम्मीद है। मरीजों को किसी तरह की समस्या नहीं होने दी जाएगी।
डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, सीएमएस, जिला पुरुष अस्पताल
पीलीभीत। यदि दवाएं अधोमानक पाई गई हैं तो इससे मरीज को कोई नुकसान तो नहीं होगा, लेकिन उसको फायदा नहीं होगा। अधोमानक क्वालिटीवाइज पाया गया है या फिर उसकी मात्रा भी स्पष्ट होना चाहिए।
डॉ. जेडी गंगवार, एमबीबीएस