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Pilibhit News: इलाज से पहले अव्यवस्था फुला रही हांफी
Tue, 02 Dec 2025 11:47 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 02 Dec 2025 11:47 PM IST
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असलम
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पीलीभीत। जिला अस्पताल आने वाले दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिक (वृद्ध) पर्चा, परामर्श और दवा की लाइन में हांफ रहे हैं। इन मरीजों को लंबी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। दिव्यांग व वृद्ध मरीजों के लिए अलग से बना पर्चा काउंटर सिर्फ कागजों पर ही दौड़ रहा है। मरीजों को कतार में धक्के खाने पड़ रहे हैं। भर्ती के अलग वार्ड स्वीकृत होने के बाद भी वृद्धजनों को सामान्य मरीजों के साथ भर्ती किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में इजाफा हुआ, लेकिन दिव्यांगजन व वृद्ध मरीजों पर ध्यान नहीं दिया गया। जिला अस्पताल में पूर्व में दिव्यांग व वरिष्ठजनों के परामर्श पर्चा बनवाने के लिए अलग से खिड़की की व्यवस्था की गई है। कर्मचारियों के अभाव में खिड़की अधिकांश समय बंद ही रहती है। वृद्ध व दिव्यांगजन को आम मरीजों की कतार में लगकर घंटों इंतजार करना पड़ता है। इन मरीजों को धक्का-मुक्की भी झेलनी पड़ती है।
मंगलवार को पर्चा काउंटर बंद था। वहींं दिव्यांगजन को अस्पताल के अंदर पहुंचने के लिए लाठी-डंडों का सहारा ही लेना पड़ा। ओपीडी ब्लॉक से लेकर कक्ष तक व्हीलचेयर की सुविधा नहीं थी। कुछ वृद्धजन दवा काउंटर की लंबी कतार में खड़े अपनी बारी का इंतजार व धक्का-मुक्की झेलते दिखे। काफी देर लगने पर कई वृद्ध मरीज थककर बैठे नजर आए।
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जेरियाट्रिक वार्ड, फिर भी आम मरीजों के साथ किया जा रहा भर्ती
जिला अस्पताल में पूर्व से ही जेरियाट्रिक वार्ड की व्यवस्था है। इसके लिए चार कमरे भी आवंटित हैं। मगर, स्टाफ की कमी के चलते इन वार्डों को आईसीयू में तब्दील कर दिया गया है। इससे वृद्धजनों को अन्य मरीजों के साथ ही सामान्य वार्ड में भर्ती किया जा रहा है।
व्हीलचेयर व स्ट्रेचर की हमेशा रहती कमी
जिला अस्पताल में ओपीडी के कई कक्ष पहली मंजिल पर हैं। यहां जाने के लिए दिव्यांगों को व्हीलचेयर की आवश्यकता होती है। मगर, जिला अस्पताल में लंबे समय से व्हीलचेयर व स्ट्रेचर का अभाव बना हुआ है। इसके चलते कई बार दिव्यांग मरीजों को पहली मंजिल जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
दर्द में दिक्कतों से गुजरते हैं हड्डी संबंधी रोगी
जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर को जिला अस्पताल से अलग बनाया है। जब भी कोई भी हड्डी टूटने संबंधी मरीज जिला अस्पताल पहुंचता है, तो उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मरीजों को पहले पर्चा फिर दूसरी ओर बने ट्रामा में जाना पड़ता है। बाद में एक्सरे की सलाह पर फिर ओपीडी आना और आखिर में चिकित्सक से सलाह के लिए ट्रामा सेंटर की दौड़ मरीजाें का दर्द बढ़ा रही है।
दवा लेने के लिए आया था। वृद्धजनों के लिए बनी पर्चा खिड़की बंद है। साथ आए बच्चे को कतार में लगाया है। - मो. असलम, न्यूरिया
दवा की कतार में लगा था, थक गया हूं। बेटे को अब अपनी जगह लगाया है। यहां की व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। - भगवान दास
दिव्यांग व वृद्ध मरीजों के लिए अलग से खिड़की की व्यवस्था की गई है। अगर बंद है तो जानकारी की जाएगी। जेरियाट्रिक वार्ड की भी उपलब्धता है। अभी स्टाफ के अभाव के चलते समस्या हो रही है। जल्द ही वार्ड का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। - डॉ. रमाकांत सागर, अधीक्षक जिला अस्पताल
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मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में इजाफा हुआ, लेकिन दिव्यांगजन व वृद्ध मरीजों पर ध्यान नहीं दिया गया। जिला अस्पताल में पूर्व में दिव्यांग व वरिष्ठजनों के परामर्श पर्चा बनवाने के लिए अलग से खिड़की की व्यवस्था की गई है। कर्मचारियों के अभाव में खिड़की अधिकांश समय बंद ही रहती है। वृद्ध व दिव्यांगजन को आम मरीजों की कतार में लगकर घंटों इंतजार करना पड़ता है। इन मरीजों को धक्का-मुक्की भी झेलनी पड़ती है।
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मंगलवार को पर्चा काउंटर बंद था। वहींं दिव्यांगजन को अस्पताल के अंदर पहुंचने के लिए लाठी-डंडों का सहारा ही लेना पड़ा। ओपीडी ब्लॉक से लेकर कक्ष तक व्हीलचेयर की सुविधा नहीं थी। कुछ वृद्धजन दवा काउंटर की लंबी कतार में खड़े अपनी बारी का इंतजार व धक्का-मुक्की झेलते दिखे। काफी देर लगने पर कई वृद्ध मरीज थककर बैठे नजर आए।
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जेरियाट्रिक वार्ड, फिर भी आम मरीजों के साथ किया जा रहा भर्ती
जिला अस्पताल में पूर्व से ही जेरियाट्रिक वार्ड की व्यवस्था है। इसके लिए चार कमरे भी आवंटित हैं। मगर, स्टाफ की कमी के चलते इन वार्डों को आईसीयू में तब्दील कर दिया गया है। इससे वृद्धजनों को अन्य मरीजों के साथ ही सामान्य वार्ड में भर्ती किया जा रहा है।
व्हीलचेयर व स्ट्रेचर की हमेशा रहती कमी
जिला अस्पताल में ओपीडी के कई कक्ष पहली मंजिल पर हैं। यहां जाने के लिए दिव्यांगों को व्हीलचेयर की आवश्यकता होती है। मगर, जिला अस्पताल में लंबे समय से व्हीलचेयर व स्ट्रेचर का अभाव बना हुआ है। इसके चलते कई बार दिव्यांग मरीजों को पहली मंजिल जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
दर्द में दिक्कतों से गुजरते हैं हड्डी संबंधी रोगी
जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर को जिला अस्पताल से अलग बनाया है। जब भी कोई भी हड्डी टूटने संबंधी मरीज जिला अस्पताल पहुंचता है, तो उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मरीजों को पहले पर्चा फिर दूसरी ओर बने ट्रामा में जाना पड़ता है। बाद में एक्सरे की सलाह पर फिर ओपीडी आना और आखिर में चिकित्सक से सलाह के लिए ट्रामा सेंटर की दौड़ मरीजाें का दर्द बढ़ा रही है।
दवा लेने के लिए आया था। वृद्धजनों के लिए बनी पर्चा खिड़की बंद है। साथ आए बच्चे को कतार में लगाया है। - मो. असलम, न्यूरिया
दवा की कतार में लगा था, थक गया हूं। बेटे को अब अपनी जगह लगाया है। यहां की व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। - भगवान दास
दिव्यांग व वृद्ध मरीजों के लिए अलग से खिड़की की व्यवस्था की गई है। अगर बंद है तो जानकारी की जाएगी। जेरियाट्रिक वार्ड की भी उपलब्धता है। अभी स्टाफ के अभाव के चलते समस्या हो रही है। जल्द ही वार्ड का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। - डॉ. रमाकांत सागर, अधीक्षक जिला अस्पताल

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