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Pilibhit News: एक डॉक्टर के भरोसे दियोरिया सीएचसी, पांच माह से पैथोलॉजी बंद
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पीलीभीत। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के सरकारी दावों के बीच दियोरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात ये हैं कि पूरी सीएचसी एक डॉक्टर के भरोसे संचालित हो रही है। यहां अधीक्षक की तैनाती तक नहीं है और पैथोलॉजी लैब पिछले पांच माह से बंद पड़ी है। इस कारण मरीजों को जांच के लिए भटकना पड़ रहा है। अधूरी सुविधा के चलते लोग लंबी दूरी तय कर बीसलपुर सीएचसी जाने पर मजबूर हैं।
सीएचसी दियोरिया की बात करें तो भवन में पर्याप्त कक्ष हैं। केंद्र पर डॉ. तपश कुमार त्रिपाठी अकेले चिकित्सक के रूप में तैनात हैं, जो ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। शुक्रवार को दोपहर करीब 12 बजे तक ओपीडी में मरीजों की संख्या 80 के आसपास पहुंच चुकी थी।
मरीजों की लगातार बढ़ती भीड़ के बावजूद यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों और अन्य जरूरी स्टाफ की कमी बनी हुई है। स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मासिस्ट राहुल कुमार दवाओं का वितरण कर रहे हैं। इसके अलावा दो स्टाफ नर्स, दो वार्ड आया समेत कुल लगभग 11 कर्मचारियों के सहारे अस्पताल की व्यवस्था संचालित हो रही है। वहीं महिला चिकित्सक की तैनाती न होने से प्रसव सेवाएं भी प्रभावित हैं। अस्पताल में शुरू से महिला डॉक्टर नहीं होने के कारण स्टाफ नर्स ही प्रसव कराती हैं। हर माह यहां करीब 45 से 50 प्रसव होते हैं।
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हालांकि जटिल या गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। संवाद
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सीएचसी दियोरिया की बात करें तो भवन में पर्याप्त कक्ष हैं। केंद्र पर डॉ. तपश कुमार त्रिपाठी अकेले चिकित्सक के रूप में तैनात हैं, जो ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। शुक्रवार को दोपहर करीब 12 बजे तक ओपीडी में मरीजों की संख्या 80 के आसपास पहुंच चुकी थी।
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मरीजों की लगातार बढ़ती भीड़ के बावजूद यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों और अन्य जरूरी स्टाफ की कमी बनी हुई है। स्वास्थ्य केंद्र पर फार्मासिस्ट राहुल कुमार दवाओं का वितरण कर रहे हैं। इसके अलावा दो स्टाफ नर्स, दो वार्ड आया समेत कुल लगभग 11 कर्मचारियों के सहारे अस्पताल की व्यवस्था संचालित हो रही है। वहीं महिला चिकित्सक की तैनाती न होने से प्रसव सेवाएं भी प्रभावित हैं। अस्पताल में शुरू से महिला डॉक्टर नहीं होने के कारण स्टाफ नर्स ही प्रसव कराती हैं। हर माह यहां करीब 45 से 50 प्रसव होते हैं।
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हालांकि जटिल या गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। संवाद