फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   deer in forest

हिरन की सबसे दुर्लभ और सुंदर प्रजाति है चौसिंघा हिरन, अब विलुप्त होने की कगार पर

Sun, 08 Mar 2020 01:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 08 Mar 2020 01:45 AM IST
विज्ञापन
deer in forest
पीलीभीत। तराई के जंगल में ही चौसिंगा हिरनों की आबादी कम होती जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2013 में जहां 52 चौसिंगा हिरन थे, वहीं यह संख्या अब घटकर मात्र 10 रह गई है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में हिरन की यह दुर्लभ और खूबसूरत प्रजाति तराई की धरती से लुप्त हो सकती है।
विज्ञापन

टाइगर रिजर्व बनने के बाद पीलीभीत के जंगल में बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। वन्यजीव प्रेमियों के मुताबिक यह एक शुभ संकेत भी है। टाइगर रिजर्व प्रशासन वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर बड़े दावे भी कर रहा है, लेकिन इन सब दावों के बीच हिरन की चौसिंगा प्रजाति खतरे में है। टाइगर रिजर्व बनने से साल भर पहले तक इनकी आबादी बढ़ रही थी। चौसिंगा हिरन अक्सर खेतों और जंगलों के किनारे दिखाई पड़ जाते थे, मगर अब एकाएक इनकी आबादी घटना शुरू हो गई है। हालात ये हैं कि जंगल के आसपास इक्का-दुक्का ही चौसिंगा दिखाई पड़ते हैं। जंगल में एक तरफ जहां हिरन की बारहसिंगा, चीतल, सांभर और पाढ़ा प्रजातियों की संख्या बढ़ी है, वहीं चौसिंगा प्रजाति लुप्त होने के कगार पर है। वन्य जीव विशेषज्ञों के मुताबिक चौसिंगा हिरनों की घटती संख्या के पीछे टाइगर रिजर्व प्रशासन की उदासीनता और शिकारियों द्वारा इनका अवैध शिकार माना जा रहा है। पर्यावरण चिंतक एवं वन्यजीव प्रेमी टीएच खान के मुताबिक चौसिंगा के लिए तराई की धरती और यहां की जलवायु हमेशा अनुकूल रही है। इसके बावजूद इनकी संख्या में कमी आना चिंता और शोध का विषय है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर भी पहुंच सकती है।
विज्ञापन

प्राकृतिक वास न होना भी एक वजह
जानकारों के मुताबिक जंगल में ग्रासलैंड ही चौसिंगा के प्राकृतिक आवास माने जाते हैं। मगर वन क्षेत्र घटने और घास के मैदानों के बदलते स्वरूप के कारण चौसिंगा हिरनों के लिए प्राकृतिक आवास घटते जा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक जंगल में प्राकृतिक आवास घटने की वजह से चौसिंगा जंगल से बाहर निकलते हैं। खेतों में घुसने की वजह से शिकारियों के हत्थे चढ़ जाते हैं। इनकी संख्या कम होने के पीछे एक बड़ी वजह यही मानी जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

हर तीन साल में होती है शाकाहारी जीवों की गणना
टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक शाकाहारी वन्यजीवों की गणना हर तीन साल में होती है। मगर टाइगर रिजर्व प्रशासन अपनी ही गणना को मानने को तैयार नहीं है। उनका तर्क है कि गणना तो हर तीन साल बाद होती है लेकिन यह मात्र तीन दिन होती है। तीन दिन में जितने वन्यजीव दिख जाते हैं, उन्हें ही काउंट किया जाता है। फिलहाल टाइगर रिजर्व प्रशासन इसको लेकर भले ही अपना अलग तर्क दे रहा हो, लेकिन जंगलों में या फिर जंगलों के किनारे चौसिंगा के झुंड अब देखने को नहीं मिलते हैं।

इसलिए हिरनों में सबसे खूबसूरत है चौसिंगा
हिरनों में चौसिंगा सबसे खूबसूरत माना जाता है। चार सींगों वाले इस हिरन की ऊंचाई करीब दो फुट होती है। मादा चौसिंगा के सींग नहीं होते हैं।
यूं बढ़े और घटे साल दर साल हिरन प्रजातियों के वन्यजीव
वर्ष सांभर चीतल चौसिंगा बारहसिंगा
2013 78 3514 52 340
2016 195 4104 52 561
2019 231 5276 10 845
टाइगर रिजर्व में बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। शाकाहारी जीवों की गणना मात्र तीन दिन की जाती है। इसमें जो जानवर दिख जाते हैं, केवल वही गणना में शामिल किए जाते हैं। फिर भी चौसिंगा हिरनों के बारे में जानकारी की जाएगी। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed